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Government to give 1500 new bus routes to stop overloading

बंजार हादसे से सबक : 

  • मुख्य सचिव ने 3 जुलाई को शिमला बुलाए सभी डीसी
  • नए बस रूट तलाशने का काम डीसी करेंगे, विभाग नहीं
  • रूट परमिट के लिए लागू 60:40 की शर्त भी रिव्यू होगी

राजेश मंढोत्रा। शिमला : कुल्लू के बंजार में हुए बस हादसे से सबक लेते हुए राज्य सरकार ने ऐसे ग्रामीण क्षेत्रों में और बस रूट परमिट देने का फैसला लिया है, जहां बस सेवाओं की कमी के कारण ओवरलोडिंग होती है। ऐसे 1500 नए रूट तलाशे जाएंगे।

इन रूटों को तलाशने का काम भी परिवहन विभाग के बजाय जिलों के डीसी करेंगे। इसके लिए मुख्य सचिव बीके अग्रवाल ने सभी उपायुक्तों को 3 जुलाई को शिमला बुलाया है। मुख्य सचिव ने बताया कि परिवहन विभाग ने बताया है कि कोर्ट ऑर्डर है कि परिवहन विभाग सीधे रूट परमिट नहीं बांट सकता। इसे पहले विज्ञापित करना जरूरी है। इसलिए सभी जिलाधीश अपने-अपने जिलों की सूची देंगे और सरकार उन्हें विज्ञापित करेगी।

उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री ने भी अपने बजट भाषण में नए रूट परमिट देने का एलान किया हुआ है। छोटे वाहनों के रूट परमिट देने में ज्यादा दिक्कत नहीं है, लेकिन बड़ी बसों के लंबे रूट से पहले स्टडी करनी होगी। उन्होंने बताया कि इस प्रक्रिया में यदि ट्रांसपोर्ट पॉलिसी में लागू की गई 60:40 की शर्त आड़े आई, तो इसकी भी समीक्षा की जाएगी। मुख्य सचिव ने ये जानकारी भी दी कि अब सभी ट्रांसपोर्ट वाहनों में ड्राइवर की फोटो और आरटीओ का नंबर लगाना जरूरी होगी। बस आपरेटरों को ये भी बताना होगा कि यदि ड्राइवर छुट्टी करेगा, तो विकल्प के तौर पर कौन ड्राइवर होगा।

उसका भी पूरा रिकॉर्ड आधार नंबर सहित पहले परिवहन विभाग के पास होगा। इस व्यवस्था को लागू करने के लिए जिलों में आरटीओ को डीसी के साथ जोड़ा जाएगा, ताकि फैसले पर अमल हो। इसके लिए डीसी भी अपने जिला के सभी ट्रांसपोर्टरों के साथ बैठकें करेंगे।

सड़क सुरक्षा पर जुलाई से छेड़ेंगे अभियान

मुख्य सचिव ने बताया कि राज्य में सड़क सुरक्षा पर एक व्यापक अभियान जुलाई माह में छेड़ा जा रहा है। इसमें हर स्कूल, कॉलेज, टैक्सी और ट्रक यूनियन आदि को कवर किया जाएगा। ड्राइविंग स्कूलों को ठीक करेंगे। 266 स्कूलों में से 160 का इंस्पेक्शन भी हो गया है। एचआरटीसी के ड्राइविंग स्कूलों में सिमुलेटर लगवाएंगे। सर्टिफिकेट से पहले थर्ड पार्टी सर्टिफिकेशन जरूरी होगी। 2982 स्कूल बसों में से 1719 की इंस्पेक्शन हो चुकी है।

व्हीकल पासिंग में कंपनियों की मदद लेंगे

बीके अग्रवाल ने कहा कि गाडिय़ों के पासिंग के वर्तमान फॉर्मूले से रिजल्ट नहीं आ रहे हैं। सरकार को भी ये लगता है कि मोटर व्हीकल इंस्पेक्टर की चेकिंग और पासिंग वाली व्यवस्था काफी नहीं है। इसलिए हम वाहन निर्माता कंपनियों की मदद भी इसमें लेंगे। इन कंपनियों के पास कंप्यूटरीकृत प्रणाली होती है, जिससे वाहन की फिटनेस सौ फीसदी चेक हो जाती है। परिवहन विभाग को कहा गया है कि इस दिशा में भी जल्द काम शुरू करे।

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