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200 एलोपैथी और 300 आयुर्वेद के होंगे

  • 2000 पैरा मेडिकल स्टाफ भरने की प्रक्रिया जारी
  • टेलीमेडिसिन प्रणाली में आएंगे 50 स्वास्थ्य उपकेंद्र

हिमाचल दस्तक ब्यूरो। शिमला
प्रदेश सरकार जल्द ही आयुर्वेद और ऐलोपैथी के 500 डॉक्टरों की नियुक्ति करेगी। इसमें 200 एलोपैथी और 300 आयुर्वेद के होंगे। स्वास्थ्य विभाग के एक प्रवक्ता ने बताया कि स्वास्थ्य संस्थानों में बुनियादी सुविधाएं मुहैया करवाने के साथ-साथ चिकित्सकों व पैरा मेडिकल स्टाफ के पदों को भरने का कार्य सरकार ने राज्य की बागडोर संभालते ही आरंभ कर दिया। ऐलोपेथी व आयुर्वेद चिकित्सकों के 500 के करीब पदों को भरने का तुरंत निर्णय लिया गया। इसके साथ ही लगभग 2000 से अधिक पैरा मेडिकल स्टाफ के पदों पर भर्ती की प्रक्रिया जारी है।

प्रवक्ता ने बताया कि प्रदेश को स्वस्थ प्रदेश बनाने के लक्ष्य को प्राप्त करने स्वास्थ्य विभाग द्वारा इस वर्ष से मुख्यमंत्री निरोग योजना संचालित की जाएगी। सामान्य स्वास्थ्य परीक्षण के अंतर्गत रेंडम रक्त शूगर परीक्षण, रक्तचाप परीक्षण, दृष्टि जांच तथा अन्य लैब परीक्षण किए जाएंगे। इससे आरंभिक अवस्था में ही संभावित समस्याओं के बारे में पता लग जाएगा तथा शीघ्र निदान एवं चिकित्सा मिलने से लंबी अवधि तक रहने वाली बीमारियों से बचाव होगा।

प्रवक्ता ने बताया कि राष्ट्रीय एंबुलेंस सेवा से स्वास्थ्य सुविधाओं में बड़ा बदलाव आया है

राज्य के दूर-दराज तथा पिछड़े क्षेत्रों के लोगों को टेलीमेडिसिन के माध्यम से बेहतर चिकित्सा उपचार सुविधा प्रदान करवाने के उद्देश्य से राज्य के 50 स्वास्थ्य उप केंद्रों को टेलीमेडिसिन प्रणाली के अंतर्गत लाया जाएगा। वर्तमान में यह सुविधा लाहौल-स्पिति जिले के काजा तथा केंलग में उपलब्ध करवाई जा रही है और इस वर्ष से पांगी को भी इसके तहत शामिल किया जाएगा। प्रदेश के जरूरतमंद गरीब लोगों के स्वास्थ्य उपचार की जरूरतों को पूरा करने के लिये मुख्यमंत्री चिकित्सा सहायता कोष का गठन किया गया है। इसके लिये 10 करोड़ रुपये का बजट प्रावधान है।

स्वस्थ्य विभाग के प्रवक्ता ने बताया कि राष्ट्रीय एंबुलेंस सेवा से स्वास्थ्य सुविधाओं में बड़ा बदलाव आया है। राज्य के विभिन्न भागों में 198 एंबुलेंस सेवाए तैनात हैं और हर चौथे मिनट में इसकी आवश्यकता पड़ती है। हर एक घंटे आपात में फंसी एक जिंदगी का बचाव इस एंबुलेंस सेवा के माध्यम से होता है।

विशेषकर गर्भवती महिलाओं के लिए यह सेवा वरदान साबित हुई है। अभी तक 10.50 लाख आपातकालीन मामलों में सेवा का उपयोग किया गया है। इसके अलावा राज्य की कठिन भौगोलिक परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए बाइक एंबुलेंस सेवा आरंभ की गई है। यह सेवा फस्र्ट रिस्पांडर बाइक के नाम से भी जानी जाती है।

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