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मुख्यमंत्री ने कहा, ऊर्जा उत्पादकों के हित में किए जाएंगे संशोधन

प्रदेश सरकार यह सुनिश्चित करेगी कि सभी विभागों की ओर से लगभग एक माह के भीतर दी जाएं स्वीकृतियां

हिमाचल दस्तक ब्यूरो। शिमला
मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर ने जल विद्युत डवेलपर्स और उत्पादकों के साथ आयोजित बैठक की अध्यक्षता करते हुए ऊर्जा उत्पादकों को आश्वासन दिया कि उनकी सभी शिकायतों को सुना जाएगा तथा इनका निपटारा प्राथमिकता के आधार पर किया जाएगा।

उन्होंने कहा कि छोटे जल विद्युत उत्पादकों की छोटी समस्याओं का समाधान करना आवश्यक है ताकि राज्य के लिए इन ऊर्जा उत्पादकों द्वारा चिन्हित लगभग 3000 मैगावाट की ऊर्जा क्षमता का दोहन किया जा सके। मुख्यमंत्री ने कहा कि सभी लंबित पड़े मामलों के समाधान के लिये प्रभावी कदम उठाए जाएंगे, ताकि प्रदेश में चिन्हित कुल 27400 मैगावाट जल विद्युत क्षमता दोहन किया जा सके। अभी तक केवल 10519 मैगावाट का ही उत्पादन किया जा रहा है।

कहा कि टैरिफ मुद्दे पर नियामक के साथ चर्चा की जा सकती है

उन्होंने कहा कि राज्य सरकार जल विद्युत नीति में बदलाव करने पर विचार कर रही है। उन्होंने कहा कि सरकार सुनिश्चित करेगी कि पहले चरण में स्वीकृतियां संबंधित सभी विभागों द्वारा लगभग एक माह के भीतर बिना किसी विलंब के दी जानी चाहिए। दूसरे टैरिफ से संबंधित मुद्दों को हल किया जाना चाहिए और तीसरे चरण में योजना के आरंभ होने से पूर्व के मुद्दों पर विचार विमर्श किया जा सकता है।

उन्होंने कहा कि टैरिफ मुद्दे पर नियामक के साथ चर्चा की जा सकती है और वाणिज्यिक कमीशन की तिथि से टैरिक उपयुक्तता का पता लगाया जा सकता है। मुख्यमंत्री ने कहा कि वन स्वीकृति, अन्य अनापत्ति प्रमाण पत्र जारी करने की प्रक्रिया में तेजी लाई जाएगी। ऊर्जा मंत्री अनिल शर्मा ने कहा कि सरकार निश्चित रूप से चर्चा में तय किए मुद्दों के समाधान के लिए तत्काल उपाय करेगी ताकि स्वीकृतियों संबंधी प्रक्रिया, टैरिफ तथा रॉयल्टी मुद्दों का समाधान हो सके। उन्होंने कहा कि जल विद्युत नीति में बदलाव करने के प्रयास किए जाएंगे।

ज्यादा रॉयल्टी और कम टैरिफ है निवेश में बाधा

हिमालय ऊर्जा उत्पादक संघ के अध्यक्ष अरूण कुमार तथा बोनाफाइड हिमाचल ऊर्जा डिवेल्पर्स संघ के अध्यक्ष राजेश शर्मा ने हिमालय ऊर्जा उत्पादक संघ के मुख्य संरक्षक आरके वर्मा के साथ पिछले दस वर्षों से लंबित मामलों तथा ऊर्जा उत्पादन में आ रही समस्याओं को मुख्यमंत्री के समक्ष रखा। उन्होंने कहा कि प्रदेश में वर्तमान में अन्य राज्यों की तुलना में रॉयल्टी की दरें काफी अधिक है।

पंजाब में रॉयल्टी दर 1.5 रुपये प्रति यूनिट, उत्तराखंड में 15 वर्षों तक शून्य और 16वें वर्ष के बाद 18 प्रतिशत, जम्मू व कश्मीर में ये दरें पहले 15 वर्षों के लिए शून्य और इसके उपरांत 16वें वर्ष से 12 प्रतिशत हैं। हिमाचल प्रदेश में रॉयल्टी दर पहले 12 वर्षों के लिए 12 प्रतिशत और अगले 18 वर्षों के लिए 18 प्रतिशत और इसके पश्चात शेष 10 वर्षों के लिए 30 प्रतिशत हैं जो काफी अधिक है।

उन्होंने कहा कि हिमाचल में टैरिफ दरें बहुत कम हैं, जो 2.98 रुपये प्रति यूनिट है, जबकि केंद्रीय विद्युत नियामक आयोग ने हिमाचल प्रदेश के लिए 5.07 रुपये प्रति यूनिट टैरिफ दर निर्धारित की है। टैरिफ दर परियोजना की व्यावसायिक संचालन तिथियों से संबद्ध नहीं है और इसके अलावा ट्रांसमिशन शुल्क भी बहुत अधिक है।

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