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stone crushers

एनजीटी ऑर्डर के खिलाफ अपील पर चर्चा जारी

कैबिनेट में भी हुई थी बात, पर अभी फैसला नहीं

हिमाचल दस्तक ब्यूरो। शिमला
एनजीटी के फैसले के बाद स्टोन क्रशरों पर बने खतरे पर सरकार कानूनी राय लेगी। इससे तय होगा कि एनजीटी के फैसले के खिलाफ आगे अपील की जानी है या नहीं? हालांकि इस बीच सरकार ने स्टोन क्रशरों के मालिकों को अपने स्तर पर कानूनी रूप से कोर्ट में पक्ष रखने को कहा है। हिमाचल में नदियों व खड्डों के किनारे स्टोन क्रशर स्थापित नहीं किए जा सकेंगे।

एनजीटी ने इस मामले में सख्त रुख अपनाते हुए नदियों किनारे या वाटर बॉडी कर सौ मीटर के दायरे में किसी भी तरह से खनन की अनुमति देने से इनकार किया है। हिमाचल में नदियों के किनारे सौ मीटर के दायरे में जिन स्टोन क्रशर्स को खनन की अनुमति दी गई थी, एनजीटी ने उसे रद कर दिया है। ट्रिब्यूनल ने इसे गैर कानूनी करार दिया है।

साथ ही कहा है कि यह पर्यावरण संरक्षण एक्ट 1986 खिलाफ है। एनजीटी के इस आदेश के बाद से हिमाचल में कई स्टोन क्रशर बंद करने पड़ेंगे। उद्योग विभाग ने तीन सौ से अधिक स्टोन क्रशर को खदान की अनुमति दी है। बताया जा रहा है कि इसमें से 147 के करीब ऐसे हैं, जो नदियों व खड्डों के बिलकुल साथ हैं। एनजीटी ने अपने हालिया आदेश में हिमाचल प्रदेश राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड प्रबंधन को दो माह के भीतर उक्त आदेशों के संदर्भ में कंप्लायंस रिपोर्ट दाखिल करने को कहा है।

बताया गया कि कई स्टोन क्रशर बिना अनुमति के चल रहे हैं और कानूनों का पालन नहीं कर रहे हैं

उल्लेखनीय है कि नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल में इस मामले की सुनवाई चेयरमैन न्यायमूर्ति आदर्श कुमार गोयल कर रहे हैं। अपने आदेश में एनजीटी ने कहा कि नदियों व खड्डों के किनारे सौ मीटर के दायरे में खनन की अनुमति कतई नहीं होगी। इस बारे में प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की कंसेट को रद किया जाता है। एनजीटी ने अपने आदेश में यह भी कहा कि प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड को यह सुुनिश्चित करना होगा कि उक्त दायरे में किसी भी तरह का खनन न हो। साथ ही आदेश की कंप्लांयस रिपोर्ट भी दो महीने के भीतर दाखिल करनी होगी।

गौरतलब है कि हिमाचल के मंडी जिला के सज्यायो पिपलू में स्थापित स्टोन क्रशर को लेकर एनजीटी में शिकायत की गई थी। शिकायत में कहा गया था कि ये क्रशर नियमों के खिलाफ खनन कर रहा है। बताया गया कि कई स्टोन क्रशर बिना अनुमति के चल रहे हैं और कानूनों का पालन नहीं कर रहे हैं। एनजीटी से ऑर्डर आने के बाद की स्थिति पर 5 नवंबर की कैबिनेट में भी चर्चा हुई थी। लेकिन कोई फैसला नहीं हो पाया था।

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