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मानवाधिकार आयोग :

  • संविधान के विपरीत सिफारिश लीगल कैसे, चयन कमेटी बताए
  • आयोग में मेंबर की नियुक्ति का मामला उलझा

राजेश मंढोत्रा। शिमला
राज्य मानवाधिकार आयोग में मेंबर के चयन के लिए मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह और विधानसभा अध्यक्ष बीबीएल बुटेल की ओर से की गई सिफारिश को राजभवन ने आपत्ति के साथ लौटा दिया है। रविवार को गवर्नर आचार्य देवव्रत ने इस फाइल पर फैसला लिया और सोमवार को फाइल मुख्यमंत्री कार्यालय को मिल गई। गवर्नर ने लिखा है कि जिस व्यक्ति का चयन किया गया है, उसके बारे में मेमोरेंडम में ही लिखा है कि इनके पास न तो मानवाधिकारों का कोई अनुभव है और न ही संवैधानिक बाध्यता इनके पक्ष में है।

राज्यपाल ने मुख्यमंत्री और विधानसभा से पूछा है कि चयन कमेटी पहले ये बताए कि संविधान के अनुच्छेद 319 को देखते हुए क्या इनका चयन वैध है? राजभवन ने दोबारा चयन समिति की बैठक कर फैसला लेने को कहा है। साथ ही इस बारे में सारी प्रोसीडिंग्स भी तलब की गई हैं। गौरतलब है कि इसी संवैधानिक बाध्यता के कारण कमेटी के तीसरे सदस्य नेता प्रतिपक्ष प्रेम कुमार धूमल इस चयन से दूर रहे थे।

गौरतलब है कि हिमाचल दस्तक ने सात सितंबर के अंक में ये खबर प्रकाशित की थी कि क्या राज्यपाल नेता प्रतिपक्ष की असहमति को नजरअंदाज करेंगे? इसी रिपोर्ट में आर्टिकल 319 का भी जिक्र था, जिसके अनुसार लोक सेवा आयोग का अध्यक्ष संघ लोक सेवा आयोग या राज्य लोक सेवा आयोग के अलावा कहीं और नियुक्त नहीं हो सकता।

आयोग के चेयरमैन होंगे जस्टिस जगदीश भल्ला

राज्य मानवाधिकार आयोग के चेयरमैन के लिए हिमाचल हाईकोर्ट के पूर्व चीफ जस्टिस जगदीश भल्ला का चयन फाइनल हो गया है। चयन कमेटी की सिफारिश पर राज्यपाल ने इनके नाम को मंजूरी दे दी है। बशर्ते राज्य सरकार को इनसे अभी कन्सेंट लेनी होगी। इनका नाम भी सीएम की अध्यक्षता वाली चयन समिति ने सुझाया था। जस्टिस भल्ला पहले पंजाब मानवाधिकार आयोग के अध्यक्ष रह चुके हैं और वर्तमान में उत्तराखंड में इसी आयोग के चेयरमैन हैं। आयोग के एक्ट के अनुसार वह एक साथ दो राज्यों का कार्यभार देख सकते हैं।

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