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सरकार को लग रहा करोड़ों का चूना, रिकवरी से डरे ठेकेदार

ठेकेदार एसोसिएशन ने प्रदेश सरकार से उठाई मांग

हिमाचल दस्तक। मंडी
बेशक सरकार करोड़ों के कर्ज के नीचे दबी हो लेकिन सरकारी विभागों में पिछले एक वर्ष से GST एक्ट को लागू न होने से करोड़ों का चूना लग रहा है। इससे जहां सरकार को करोड़़ों का राजस्व नहीं मिल पाया हैं, वहीं ठेकेदार रिकवरी से खौफ खाने लगे हैं। सरकार की इस लापरवाही पर अब ठेकेदार एसोसिएशन ने भी मुद्दे का समाधान जयराम सरकार से जल्द मांगा है। गौरतलब है कि सरकारी विभागों में ठेकेदारों को जो कार्य आवंटित हो रहे, उन पर कोई GST नहीं लग रहा है। ठेकेदारों का कहना है कि कहीं बैक डेट से जीएसटी लागू किया गया तो उन्हें सारी रिकवरी एक मुश्त जमा करवानी पड़ेगी।

कहा सरकार को जल्दी ही इस पर निर्णय लेना होगा

सूत्रों के मुताबिक सरकार के पास कई विभागों के प्रपोजल पड़े हैं कि किस तरह से जीएसटी को लागू किया जाए। सरकार को जल्दी ही इस पर निर्णय लेना होगा। उधर कंटेक्टर वेलफेयर एसोसिएशन के चेयरमैन दिनेश कुमार शर्मा, अध्यक्ष सतीश कुमार की अध्यक्षता में बैठक मंगलवार को मंडी में आयोजित की गई जिसमें इस मुद्दे पर विशेष चर्चा की गई। इस मौके पर दिनेश कुमार ने बताया कि यदि सरकार उक्त मुद्दे पर कार्रवाई करती है तो सरकार को करोड़ों का जहां फायदा होगा वहीं पर ठेकेदार भी बड़ी रिकवरियों से बच जाएंगे। उन्होंने कहा कि प्रदेश के लोक निर्माण विभाग के ठेकेदारों का एक प्रतिनिधि मंडल प्रधान सचिव लोक निर्माण विभाग से मिला था।

उन्होंने जल्दी ही इस विषय पर कार्रवाई का आश्वासन दिया था। मगर अभी तक जीएसटी लागू न होने के कारण कार्य प्रभावित हो रहे हैं। उन्होंने कहा कि जीएसटी के बारे में अभी तक कोई भी कार्रवाई अमल में नहीं लाई गई है जिस कारण असमंजस की स्थिति बनी हुई है। एसोसिएशन के जनरल सैक्रेटरी भूपेंद्र पाल महाजन ने बताया कि GST एक्ट के अनुसार जीएसटी की राशि सरकार द्वारा दी जानी है और ठेकेदार ने उसे जमा करवाना है और यह एक्ट पूरे भारतवर्ष में लागू हो चुका है।

कर्ज में मिलती राहत

यदि GST लागू कर ठेकेदारों से जीएसटी की वसूली की जाती है, तो करोड़ों रुपये इकट्ठा किए जा सकते हैं। इससे सरकार को कर्ज में कुछ राहत मिलती। फिलहाल तो सरकार को ही फैसला लेना है कि ठेकेदारों से वसूली कैसे हो पाए।

इस मामले में विभाग का प्रपोजल सरकार के विचाराधीन है। जल्द ही इस पर फैसला हो जाएगा। सरकार व विभाग इस पर गंभीर है, लेकिन कुछ अड़चनों के कारण इसमें देरी हो रही है। इसे जल्दी ही लागू किया जाएगा। -केहर सिंह, चीफ इंजीनियर, पीडब्ल्यूडी

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