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गुडिय़ा केस की कस्टोडियल डेथ मामले में 17 महीने से थे अंदर

प्रदेश हाईकोर्ट ने 6 लाख रुपये के मुचलके पर रिहा करने के आदेश दिए

हिमाचल दस्तक ब्यूरो। शिमला
पूर्व आईजी जहूर जैदी के बाद अब शिमला के पूर्व एसपी डीडब्ल्यू नेगी को 17 महीने की लंबी हिरासत के बाद प्रदेश हाईकोर्ट से जमानत मिल गई है। आईपीएस अधिकारी जहूर जैदी, डीडब्ल्यू नेगी और सात पुलिस कर्मियों के खिलाफ शिमला के बहुचर्चित गुडिय़ा कांड के कथित आरोपी सूरज को पुलिस हिरासत में जान से मारने का आरोप है।

न्यायाधीश सुरेश्वर ठाकुर ने नेगी द्वारा दायर जमानत याचिका की सुनवाई के पश्चात तीन लाख रुपये के निजी और उतनी ही राशि के दो जमानती द्वारा मुचलके पेश करने की स्थिति में नेगी को रिहा करने के आदेश पारित कर दिए हैं। पूर्व एसपी फिलहाल शिमला की कंडा जेल में बंद हैं।

गौरतलब है कि ठियोग पुलिस लॉकअप में गुडिय़ा के साथ दुष्कर्म और हत्या के कथित आरोपी सूरज की पुलिस हिरासत में हुई मौत के मामले में सीबीआई ने पूर्व आईजी जहूर जैदी समेत आठ पुलिस कर्मचारियों को इनसे पहले 29 अगस्त 2017 को गिरफ्तार किया था। जहूर जैदी को गत 5 अप्रैल को सर्वोच्च न्यायालय से जमानत मिल गई है।

अब जहूर जैदी को छोड़कर सीबीआई की ओर से गिरफ्तार सात पुलिस कर्मी न्यायिक हिरासत में हैं। पुलिस लॉकअप में हुई मौत मामले में ठियोग के पूर्व डीएसपी मनोज जोशी, एसआई राजेंद्र सिंह, एएसआई दीपचंद, एचएससी सूरत सिंह, मोहन लाल, रफीक अली, रंजीत सरेटा अभी तक सलाखों के पीछे हैं। सीबीआई ने इसी मामले में 16 नवंबर 2017 को शिमला के पूर्व एसपी शिमला डीडब्ल्यू नेगी को गिरफ्तार किया था।

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