bus stand

1 सितंबर, 2010 में पूर्व CM प्रेम कुमार धूमल ने रखी थी आधारशिला

सत्ता परिवर्तन के बाद किसी ने नहीं ली सुध

सुरेश कश्यप। हमीरपुर

हमीरपुर का अंतरराज्यीय बस अड्डा सियासत के पेच में फंस कर रह गया। बस अड्डे के निर्माण के लिए पूर्व सरकार के कार्यकाल में प्रयास शुरू हुए। सत्ता तबदील होते ही यह प्रयास हिमाचल पथ परिवहन निगम की फाइलों में दब कर रह गए। 1 सितंबर, 2010 को इस बस अड्डे के निर्माण कार्य की आधारशिला पूर्व मुख्यमंत्री प्रेम कुमार धूमल व परिवहन मंत्री महेंद्र सिंह ने रखी थी। सरकार ने इस बस अड्डे को पब्लिक-प्राइवेट मोड पर बनाने का प्रावधान किया था।

करीब 90 करोड़ के इस प्रोजेक्ट पर कोई कार्य नहीं हो सका। पूर्व सरकार के कार्यकाल में इस निर्माण कार्य के लिए मुंबई की एक कंपनी ने जिम्मा उठाया था। सत्ता तबदील होते ही कंपनी ने कार्य करने से हाथ खड़े कर दिए। बताया जा रहा है कि HRTC ने तीन बार इस कार्य का जिम्मा सौंपने के लिए टेंडर प्रक्रिया अपनाई, लेकिन जिम्मेदारी लेने के लिए कोई भी आगे नहीं आया।

लोगों में रोष इस बात का है कि पूर्व सरकार के कार्यकाल में इस बस अड्डे के लिए जो प्रोजेक्ट बना था यदि उसके तहत कार्य करने में बाधाएं उत्पन्न होने लगी तो सरकार ने इस प्रोजेक्ट में फेरबदल करते हुए नए बजट का प्रावधान क्यों नहीं किया। पूर्व सरकार के कार्यकाल में मनाली व कुल्लू के बस अड्डे को भी इसी प्रोजेक्ट के तहत बनाने का प्लान बनाया था। दोनों ही बस अड्डे बन चुके हैं, लेकिन हमीरपुर का बस अड्डा फाइलों की धूल बन चुका है। शिलान्यास पट्टिका भी बाईपास धूल फांक रही थी।

पब्लिक-प्राइवेट मोड

पब्लिक-प्राइवेट मोड एक निजी कंपनी के साथ डील होती है। इसमें होने वाले संपूर्ण खर्चे का जिम्मा निजी कंपनी उठाएगी। निर्माण से 20 साल तक बस अड्डे से होने वाली आय का हक निर्माण वाली निजी कंपनी का होता है। हमीरपुर के बस अड्डे के लिए मालिकाना हक 20 की बजाए 30 वर्ष निर्धारित किया गया था।

सरकार का पांच वर्ष का कार्यकाल विकास विरोधी रहा है। हमीरपुर के साथ सरकार का ऐसे भी भेदभाव रहता है। इसी का शिकार अंतराज्जीय बस अड्डा हमीरपुर बना है। जानबूझ कर सरकार ने हमीरपुर बस अड्डे को नजर अंदाज किया है। -प्रेम कुमार धूमल, नेता प्रतिपक्ष एवं हमीरपुर विधायक

हमीरपुर के बस अड्डे के निर्माण के लिए सरकार ने अथक प्रयास किए हैं। इसके लिए प्लान भी तबदील किया गया। लेकिन निर्माण कार्य का किसी भी कंपनी ने जिम्मा नहीं उठाया। -जीएस बाली, परिवहन मंत्री

बस अड्डे में ये होनी थीं सुविधाएं

अंतरराज्यीय बस अड्डे का प्लान बड़े बस अड्डों पर आधारित था। बसों की पार्किंग के साथ-साथ मल्टी पर्पज स्टोरी, कार पार्किंग, होटल, शॉपिंग कांप्लैक्स की सुविधाएं इसके भीतर होनी थी। पक्का भरो के पास इसके लिए भूमि भी चिन्हित की गई है, लेकिन अब इस भूमि पर HRTC की फालतू बसें पार्क की जाती हैं।

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