Heritage: Habits and Sanskar: Baba Bal Ji

पूजा मनकोटिया, ऊना। श्री राधा कृष्ण मंदिर कोटलां कलां में बुधवार को राष्ट्रीय संत बाबा बाल जी महाराज द्वारा संक्राति पर्व मनाया गया। इस अवसर पर सुबह से ही मंदिर में भक्तों की भीड़ लगनी शुरु हो गई थी। सैकड़ों की तादाद में भक्तों ने बाबा बाल जी महाराज का आशीर्वाद प्राप्त किया।

इस मौके पर संत बाबा बाल जी महाराज ने कहा कि अंतिम समय में प्रभु का सिमरन होता रहे, ऐसा प्रयास किया जाना चाहिए। संस्कार व आदतें विरासत में परिवार से मिलती हैं। उन्होंने कहा कि बुरे मार्ग पर चलने के लिए बाप भी कहे, तो नहीं चलना चाहिए और सदमार्ग पर चलने को शत्रु भी कहे, तो चलना चाहिए। बाबा बाल जी महाराज ने कहा कि साधु व संत का सत्संग करना चाहिए। इश्वरीय कार्य कभी नही रुकते और पुण्य के कार्य को स्वयं भगवान आकर करते हैं । उन्होंने कहा कि भक्त की जिज्ञासा व व्याकुलता जब चरम पर पहुंचती है तो भगवान अवश्य प्रकट होते हैं।
भगवान सोना-चांदी को नहीं देखते,वह तो भक्त की भक्ति को देखते हैं। उन्होंने कहा कि मनुष्य जीवन पाना मुश्किल है, लेकिन मनुष्य जीवन पाने से अधिक मोक्ष प्राप्त करना इससे भी मुश्किल है। उन्होंने कहा कि गुरु शिष्य को अंधकार से प्रकाश की तरफ ले जाता है। संत खुद सच के मार्ग पर चलकर तप और त्याग की भावना से ओतप्रोत होकर निकलता है और सच्चा संत सच का ही मार्ग दिखाता है। भगवान की कृपा के बिना सत्संग नहीं मिलता। उन्होंने कहा कि भक्ति सबसे पवित्र है सब गुणों की खान है। उन्होंने कहा कि गौसवा सबसे उतम सेवा है। जो गौ-माता की सेवा करता है उसे पुण्य मिलता है।

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