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high court orders

हाईकोर्ट ने कहा, 5 बीघा तक कब्जे रेगुुलर करने की नीति में आवेदन करो

संबंधित अथॉरिटी को भी 4 महीनों में लेना होगा इस आवेदन पर फैसला

हिमाचल दस्तक ब्यूरो। शिमला
प्रदेश हाईकोर्ट ने वन भूमि पर 5 बीघा तक अवैध कब्जे को नियमित करने वाली राज्य सरकार की नीति को ध्यान में रखते हुए आदेश जारी कर कहा है कि प्रार्थियों ने अगर इस नीति के मुताबिक अवैध कब्जों को नियमित करने बाबत आवेदन दाखिल नहीं किया है तो वह 2 सप्ताह के भीतर उपयुक्त अथॉरिटी के समक्ष आवेदन दाखिल करें। अथारिटी को 4 महीनों के भीतर इस आवेदन पर निर्णय लेने के आदेश दिए गए हैं।

मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत और न्यायाधीश अजय मोहन गोयल की खंडपीठ ने कुल्लू जिला में मनाली तहसील के चमन लाल, सरवन कुमार, तेजू राम, हुक्म राम व दौलत राम द्वारा दायर याचिका की सुनवाई के दौरान यह आदेश पारित किए। प्रार्थियों ने अपनी याचिका में कहा था कि उनके पिता सुखराम की मृत्यु के पश्चात उनके हिस्से में लगभग अढ़ाई-अढ़ाई बीघा जमीन हिस्से में आई है।

हिमाचल प्रदेश भूमि राजस्व अधिनियम 1954 और राज्य सरकार द्वारा बनाई गई नीति के मुताबिक वे 5-5 बीघा कब्जाई गई वन भूमि को नियमित करवाने का हक रखते हैं। गौरतलब है कि राज्य सरकार ने अवैध कब्जों को नियमित करने के विषय में यह आदेश जारी किए हैं कि अगर किसी व्यक्ति द्वारा वन भूमि पर अवैध कब्जा किया है तो सरकार 5 बीघा तक उस कब्जे को नियमित करने के लिए विचार कर सकती है। लेकिन उसकी अपनी जमीन व अवैध कब्जे में ली गई जमीन 10 बीघा से अधिक नहीं होनी चाहिए।

अवैध कब्जाधारियों के नाम सार्वजनिक करेगा वन विभाग

  • वेबसाइट पर डाली जाएगी भूमि कब्जाने वालों की सूची
  • वेब पोर्टल लगभग तैयार, सभी सर्किलों में दी जा रही टे्रनिंग

हिमाचल दस्तक ब्यूरो। शिमला
अवैध कब्जाधारियों के नाम सार्वजनिक करने के लिए प्रदेश का वन विभाग अब हाईटेक हो रहा है। प्रदेश हाईकोर्ट द्वारा बार-बार फटकार लगाने के बाद अब वन भूमि पर अवैध कब्जाधारियों की सूची को वेब पर दर्शाने के लिए सॉफ्टवेयर तैयार कर दिया है। ऐसे में अब प्रदेश के किसी भी कोने में वन भूमि पर हो रहे अवैध कब्जे की जानकारी संबंधित नाम और पता सहित वेबसाइट पर मिलेगी। वन विभाग ने प्रदेश में वन अतिक्रमण एवं बेदखली करने की प्रक्रिया में पारदर्शिता लाने के लिए क्षेत्रीय कर्मचारियों के लिए आसान सॉफ्टवेयर तैयार किया है, जिसमें सार्वजनिक पोर्टल पर कोई भी व्यक्ति अतिक्रमण के मामलों की जानकारी प्राप्त कर सकता है।

इस सॉफ्टवेयर के बारे में वन विभाग के अफसरों को इन दिनों ट्रेनिंग भी दी जा रही है। पीसीसीएफ अजय शर्मा ने बताया कि ट्रेनिंग में सर्किल और डिविजन स्तर के अधिकारियों, सहायक अरण्यपालों, वन परिक्षेत्र अधिकारियों और वन रक्षकों को अतिक्रमण के मामलों के डाटा को अपडेट करने संबंधी जानकारी दी जा रही है।

उन्होंने कहा कि विभाग द्वारा पिछले वर्षां में सूचना प्रौद्योगिकी को बढ़ावा देने के लिए विभिन्न सॉफ्टवेयर तैयार किए हैं जिनमें ऑनलाइन वृक्ष कटान की अनुमति, ऑनलाइन वृक्ष परागमन अनुमति तथा ऑनलाइन भर्ती प्रक्रिया शामिल है। अब रेंज अधिकारियों तक सभी को ऑनलाइन वार्षिक संपत्ति रिटर्न भरने की सुविधा प्रदान कर दी गई है। उन्होंने कहा कि विभाग के अधिकारियोंं और कर्मचारियों को 16 अक्तूबर तक वन विभाग मुख्यालय शिमला में ट्रेनिंग दी जाएगी।

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