mid day meal

मिड-डे मील की मॉनिटरिंग का काम देने वाली निजी कंपनी का विरोध करेगी एटक

सरकार के फैसले के खिलाफ शुरू होंगे आंदोलन

हिमाचल दस्तक। बिलासपुर
बिलासपुर की एटक जिला परिषद ने सरकार द्वारा पिछले दरवाजे से मिड-डे मील की मॉनिटरिंग का फैसला एक निजी कंपनी को देने का विरोध किया है। तथा कहा कि समीक्षा के नाम पर निजी कंपनियों और अपने चहेतों को मिड-डे मील वर्करों को परेशान करने के निर्णय को जिला एटक नहीं मानेगी और इस निर्णय के विरुद्ध पर प्रदेश में आंदोलन शुरू किया जाएगा। इसकी जिम्मेवारी सरकार पर होगी। यहां पर शुक्रवार को जारी बयान में एटक सचिव परवेश चंदेल ने कहा कि प्रदेश सरकार मिड-डे मील की मॉनिटरिंग का फैसला एक निजी कंपनी को देकर पिछले दरवाजे इसका निजीकरण करने की योजना बनानी शुरू कर दी है।

इसका एटक पुरजोर विरोध करेगी। क्योंकि इसी तरह की मॉनिटरिंग के नाम पर यूपी की योगी सरकार ने भी अक्षयपात्रा नाम की एनजीओ को मिड-डे मील का नाम सौंप दिया है परन्तु सीएम जयराम हिमाचल को यूपी न समझें। यहां के वर्कर संगठित हैं और जागरूक हैं । वह इस तरह के किसी भी षड्यंत्र को कामयाब नहीं होने देंगे। क्योंकि जिस किसी क्षेत्र में निजीकरण हुआ है वहां भ्रष्टाचार का बोलबाला बढ़ा है जिसका जीता जागता उदाहरण महाराष्ट्र के अंदर एनएन और दिल्ली में बिजली और पानी कंपनियां हमारे सामने उदाहरण हैं ।

निर्णय को जिला एटक नहीं मानेगी और इस निर्णय के विरूद्ध पूरे राज्य आंदोलन शुरू किया जाएगा

इसके अलावा आंध्र प्रदेष में डा. उमावती महेष्वरी द्वारा दी गई विस्तृत रिपोर्ट है, जिसमें यह कहा गया है कि स्कूल में ताजा बनाए गए भोजन के अन्दर ही न्यूट्रीशन वैल्यू है। जबकि तमाम एनजीओ और कंपनियां एक जगह पर बहुत पहले खाना बनाकर बच्चों को बासी खाना खिलाती हैं। जिसका आंध्र प्रदेष व तेलंगाना में बहुत बड़ा विरोध हुआ है और सरकार को कमेटी बिठाकर प्राईवेट कंपनियों के काम की समीक्षा करनी पड़ी है।

उन्होंने कहा कि खाने की समीक्षा सरकार का काम शिक्षा विभाग पहले से कर रहा है क्योंकि सरकारी अध्यापक भी वहीं खाना खाते हैं जो मिड-डे मील में अच्छी गुणवत्ता का प्रतीक है परंतु समीक्षा के नाम पर निजी कंपनियों और अपने चहेतों को मिड-डे मील वर्करों को परेशान करने के निर्णय को जिला एटक नहीं मानेगी और इस निर्णय के विरूद्ध पूरे राज्य आंदोलन शुरू किया जाएगा।

क्योंकि सरकार इस महत्वपूर्ण योजना से अपना पल्लू झाड़कर तमाम जिम्मेदारी निजी कंपनियों पर डालने का षड्यंत्र कर रही है जिसको एटक भली भांति जानती है। उनका कहना है कि यदि सरकार ने अपना यह मजदूर विरोधी फैसला वापस न लिया तो एटक आंदोलन के लिए बाध्य होगी जिसकी सारी जिम्मेदारी सरकार की होगी।

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