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भाग-2

राज दरबार बुलाकर नंगे बदन पर मारे जाते थे 100 कोड़े

  • राजा चढ़त सिंह हाथी पर बैठ कर करते थे चौगान की सैर
  • सैर के बहाने कमियां निकालकर करवाते थे उन्हें दुरुस्त

सोमी प्रकाश भुव्वेटा। चंबा
हिमाचल में चंबा की शान माने जाने वाले चंबा नगर के ऐतिहासिक चौगान के साथ चंबा रियासत के राजाओं का बेहद लगाव रहा है। इस लगाव का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि यदि कोई चौगान के खिलाफ कुछ बोलता भी था, तो उसे सजा के तौर पर कोड़े पड़ते थे। एक बार चौगान में बैठे किसी व्यक्ति ने भूलवश कहा था कि जितना बड़ा चौगान है, यदि यह उसकी अपनी जमीन होती तो वह यहां पर फसलें उगाकर खूब कमाई करता।

ऐसा कहने वाले व्यक्ति की शिकायत जब राजा के पास पहुंची, तो उस व्यक्ति को राजा ने राज दरबार में बुलाकर उसे सजा के तौर पर 100 कोड़े उसके नंगे बदन पर मारने के निर्देश दिए थे। आधा मील लंबे और 80 गज चौड़े ऐतिहासिक चौगान की राजा चढ़त सिंह हाथी पर सवार होकर सैर के बहाने खुद इसमें कमियां निकालकर उन्हें दुरुस्त करवाते थे। आज जब ऐतिहासिक चौगान के हालात खराब होते दिख रहे हैं, तो इन हालात को राजा चढ़त सिंह देखकर काफी दुखी होते। इस तरह का खुलासा पदम श्री विजय शर्मा ने किया हैं।

राजा चढ़त सिंह को चौगान से बेहद लगाव था

पदम श्री विजय शर्मा कहते हैं कि राजा चढ़त सिंह को चौगान से बेहद लगाव था। जब भी राजा साहब को मौक मिलता। हाथी पर बैठकर पूरे चौगान की सैर किया करते थे। इस दौरान जब चौगान में उन्हेंं किसी तरह की कोई कमी लगती तो तुरंत उस कमी को दूर करने के निर्देश भी दिए जाते थे। इस निर्देश पर अमल करवाने की जिम्मेदारी राजा चढ़त सिंह के साथ सैर के दौरान हर वक्त साथ रहने वाले उनके वजीर जोरावर सिंह की रहती थी।

आधा मील लंबे और अस्सी गज चौड़े चौगान को अगर रियासत काल में खूबसूरत बनाया रखा जा सकता है, तो अब तो आधुनिकता के दौर में इस चौगान को पहले से कहीं अधिक खूबसूरत बनाने के लिए जिला प्रशासन कई तरह की योजनाएं आसानी से बना सकता है, क्योंकि आधा मील लंबे और अस्सी गज चौड़ा चौगान अब पांच भागों में बंट गया है।

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