house built fake documents

नगर परिषद की जांच रिपोर्ट में खुलासा

  • राजस्व विभाग के दस्तावेजों में हुई पुष्टि
  • भोजपुर वार्ड में फर्जी दस्तावेज पेश कर सरकारी योजना का लाभ लेने का मामला आया सामने

हिमाचल दस्तक ब्यूरो। सुंदरनगर
नगर परिषद सुंदरनगर के भोजपुर वार्ड में फर्जी दस्तावेज पेश करके सरकारी योजना का लाभ उठाने का मामला सामने आया है। शहरी विकास विभाग के नियमों को ताक पर रखकर मकान बना डाला है। इसके लिए फर्जी दस्तावेज पेश करके IHSDP स्कीम से लाभ उठाया है और सरकारी पैसे का नगर परिषद के नाक तले सरेआम दुरुपयोग किया है। इस बात का खुलासा नगर परिषद से की जांच रिपोर्ट में हुआ है। राजस्व विभाग के दस्तावेजों में भी इस बात की पुष्टि हुई है।

IRDP की पात्रता रखने वाले व्यक्ति को एक लाख 20 हजार के करीब पैसा मकान बनाने के लिए इस योजना के तहत वर्ष 2012 में मंजूर हुआ, लेकिन पात्र व्यक्ति की ओर से एग्रीमेंट के तहत पेश किए गए दस्तावेजों में 1101 और 1102 खसरा नंबर बताए गए हैं, जबकि राजस्व विभाग की ओर से जारी किए गए ततीमा पत्र में एक ही नंबर का दिया गया है और दूसरा नंबर अन्य किसी सहयोगी के रकवे का निकला है, जबकि एग्रीमेंट में दर्शाया गया है कि पात्र व्यक्ति के पास 39.95 वर्ग मीटर रकवा होना अनिवार्य है और कम से कम 32.11 वर्ग मीटर पर मकान बनाया जाए, लेकिन व्यक्ति के पास महज 5.72 वर्ग मीटर ही अपना रकवा बनता है।

गलत दस्तावेज पेश करके इस योजना का लाभ उठाया तो ऐसे लोगों को रिकवरी करने के लिए मामला हाउस में लाया जाएगा

इतना ही नहीं बल्कि शहरी गरीबी पहचान पत्र में भी चार परिवार के सदस्य दर्शाए गए हैं और राशन कार्ड में दो सदस्य परिवार के दर्शाए गए हैं। नगर परिषद के किसी भी अधिकारी एवं कर्मचारी ने किस्त जारी करने के बाद निरीक्षण करने की जहमत नहीं उठाई है। नियम के तहत पहली किस्त जारी होने के बाद नगर परिषद के अधिकारियों द्वारा संयुक्त निरीक्षण करने के बाद ही आगामी किस्तें जारी की जाती हैं। ऐसे में नगर परिषद के अधिकारियों की कार्यप्रणाली भी सवालों के कटघरे में आ गई है।

गौर हो कि एग्रीमेंट के तहत अगर गलत दस्तावेज पाए जाते हैं तो नियमों के तहत नगर परिषद को पूरी रकम पात्र व्यक्ति की ओर से 18 प्रतिशत ब्याज समेत देय होगी। मामला नगर परिषद के ध्यान में होने के बावजूद भी अभी तक ठंडे बस्ते में पड़ा हुआ है। उधर, नगर परिषद सुंदरनगर के अध्यक्ष पूनम शर्मा व उपाध्यक्ष दीपक सेन ने कहा कि अगर किसी ने गलत दस्तावेज पेश करके इस योजना का लाभ उठाया है, तो ऐसे लोगों को चिन्हित करके उनसे रिकवरी करने के लिए मामला हाउस में लाया जाएगा। अधिकारियों और कर्मचारियों से इस संदर्भ में रिपोर्ट तलब की जाएगी और मौके पर जायजा लिया जाएगा।

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