खाद्य वस्तुओं की शुद्धता और गुणवत्ता जांचने वाले अधिकारी नहीं

हिमाचल प्रदेश की जनता के स्वास्थ्य का तो राम ही रखवाला है। 12 जिले वाले इस प्रदेश में खाद्य वस्तुओं की शुद्धता और गुणवत्ता को जांचने वाले अधिकारियों की प्रदेश में भारी कमी चल रही है। यूं तो हिमाचल में फ़ूड सेफ्टी अधिकरियों के 13 पद सेंक्शन हैं। लेकिन मौजूदा समय में विभाग के पास सिर्फ एक खाद्य सुरक्षा अधिकारी ही सेवाएं दे रहा है।

खाद्य पदार्थों की सैम्पलिंग नहीं हो पा रही

राज्य सरकार द्वारा चम्बा-कांगड़ा में तैनाती दी गई है। ऐसे में सरकार द्वारा प्रदेशवासियों को शुद्ध खाद्य पदार्थ उपलब्ध करवाने के दावों पर कितना अमल हो पाएगा इसका अंदाजा आप स्वयं लगा सकते हैं। विभाग के अभिहित अधिकारी जगदीश धीमान की मानें तो प्रदेश में खाद्य सुरक्षा अधिकारियों की कमी चल रही है और जिस कारण खाद्य पदार्थों की सैम्पलिंग नहीं हो पा रही है। उन्होंने बताया कि नियमों के मुताबिक फूड सेफ्टी ऑफिसर ही सैम्पल भर सकते हैं।

हिमाचल प्रदेश में कुछ ही दिनों में मानसून दस्तक देने वाला है, लेकिन प्रदेशवासियों को शुद्ध और स्वच्छ खाद्य पदार्थ उपलब्ध करवाने के लिए हेल्थ सेफ्टी एंड रेगुलेशन विभाग नाकारा साबित हो रहा है। पूरे राज्य में सिर्फ एक ही अधिकारी के पास स्वच्छ खाद्य पदार्थ उपलब्ध करवाने का जिम्मा है। ऐसे में कोई भी आसानी से यह अंदाजा लगा सकता है कि एक अधिकारी पूरे राज्य के स्वास्थ्यकारी भोजन का ख्याल रख कर सकता है।

डॉ. संजीव कुमार ने बताया कि मिलावटी वस्तुएं खाने से उल्टियां, दस्त, बुखार, डायरिया और आंखों की बीमारियां होने का खतरा बना रहता है। ऐसे में सरकार और विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठना लाजिमी है कि सरकार और विभाग मिलावटखोरों पर इतनी दया क्यों दिखा रही है?

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