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hpca case

1900 पेज की फाइल एक ही दिन में पार कर गई थी 8 चैनल

पी. मित्रा ने हाथों हाथ ली थी उर्मिला सिंह से अभियोजन मंजूरी

राजेश मंढोत्रा। शिमला
पूर्व कांग्रेस सरकार के समय HPCA Case में पूर्व मुख्यमंत्री प्रेम कुमार धूमल को लपेटने के लिए अभियोजन मंजूरी की फाइल बिजली की गति से दौड़ी थी। 1900 पेज की ये फाइल एक ही दिन में 8 चैनल से क्लीयर हो गई। यानी गृह विभाग के एसओ, अंडर सेके्रटरी, सेक्रेटरी, जीएडी सेक्रेटरी, फिर ब्रांच के बाद मुख्य सचिव और गवर्नर तक कोई भी इसे अपने पास एक घंटे भर के लिए भी नहीं रोक पाया।

ये भी गौर करने की बात है कि 2 अप्रैल 2014 को तब की राज्यपाल उर्मिला सिंह से ये मंजूरी पी. मित्रा ने हाथों हाथ ली थी। मित्रा के पास तब मुख्य सचिव का अतिरिक्त कार्यभार था। अब ये खुलासे इसलिए हो रहे हैं, क्योंकि धूमल ने वर्तमान सरकार को सामान्य प्रशासन विभाग के माध्यम से अभियोजन मंजूरी वापस लेने के लिए रिप्रेजेंट किया है। कांग्रेस सरकार ने एक अगस्त 2013 को HPCA के खिलाफ दर्ज एफआईआर 12-2013 में धूमल को अन्य 16 लोगों के साथ आरोपी बनाया था।

मुख्य सचिव ने गृह और विजिलेंस से भी इस पर कमेंट मांगे थे

इसी केस में 2 अप्रैल 2014 को उनको प्रोसीक्यूट करने की मंजूरी राज्यपाल से ली गई। लेकिन उनके आवेदन पर अब जब सरकार ने इस केस का रिकार्ड मंगवाया तो कई हैरान करने वाली बातें सामने आ रही हैं। मुख्य सचिव ने गृह और विजिलेंस से भी इस पर कमेंट मांगे थे। इसके बाद फाइल जीएडी के मार्फत दोबारा राजभवन जाएगी।

हालांकि अभी केस सुप्रीमकोर्ट में लंबित है। विजिलेंस ने भी इस बारे में सरकार को रिपोर्ट दी है। इसमें एक तथ्य यह भी सामने आया है कि चार्जशीट में धूमल को एचपीसीए का पैट्रन खुद ही मान लिया गया, जबकि इसका कोई सबूत रिकॉर्ड में नहीं है। धूमल ने एचपीसीए की किसी बैठक में हिस्सा लिया हो, इसका भी कोई रिकॉर्ड नहीं है, जबकि आरोप लगाया गया है।

मुख्य सचिव ने विजिलेंस प्रमुख से ली जानकारी

शुक्रवार को सचिवालय में मुख्य सचिव विनीत चौधरी ने एडीजीपी विजिलेंस डॉ. अतुल वर्मा से लंबी बैठक की। माना जा रहा है कि इस बारे में विजिलेंस से भी फीडबैक लिया गया है कि प्रोसीक्यूशन को रिजेक्ट करने के लिए और क्या तथ्य जोड़े जाएं। अभियोजन मंजूरी पर पुनर्विचार के लिए नए तथ्यों का सामने आना जरूरी है।

सुप्रीमकोर्ट में भी जवाब देना है राज्य सरकार को

HPCA Case में राज्य सरकार को एडवोकेट जनरल के माध्यम से सुप्रीमकोर्ट में भी जवाब देना है। पिछली सुनवाई में एजी अशोक शर्मा के आवेदन पर कोर्ट ने चार सप्ताह का समय दिया था। इसमें अब करीब एक हफ्ता बचा है। संभव है इससे पहले धूमल के खिलाफ दी गई अभियोजन मंजूरी वापस लेने पर ही फैसला हो जाए।

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