drug addiction

न शासन और न प्रशासन उठा रहा कोई कदम, कई युवा चढ़ गए नशे की भेंट

देवेंद्र सूद। गगरेट
पंजाब सीमा के साथ सटे ऊना जिले में महज भाषा के मामले में ही पंजाब के साथ समानता नहीं है, बल्कि कई और चीजें भी ऐसी हैं जिसकी पंजाब के साथ कई समानताएं है। इनमें से एक ऐसी समानता हैं जिसे लेकर जिले का हर नागरिक चिंतित है। पंजाब को झकझोर कर रख देने वाले इस मामले की गूंज बेशक पंजाब में विधानसभा चुनावों के दौरान हर मंच से सुनने को मिल रही थी।

लेकिन जिले की जवानी छीन रहे इस मामले में इन विधानसभा चुनावों में राजनीतिक दलों की रहस्यमय चुप्पी यह बताने के लिए काफी है कि वोट की राजनीति में जनता के साथ जुड़े मुद्दे कैसे गौण हो जाते हैं। जिले में नशे के बढ़ते प्रचलन से बेशक हर किसी के चेहरे पर अपने वंश पर छाए संकट की चिंता साफ पढ़ी जा सकती है लेकिन राजनीतिक दल इस सबसे बड़ी समस्या पर पूरी तरह से मौन हैं।

पहले जहां मेडिकल स्टोर पर आसानी से उपलब्ध नशे के लिए प्रयोग की जाने वाली दवाओं का प्रचलन बढ़ा वहीं चूरा पोस्त, भांग से होते हुए अब स्मैक व हेरोइन जैसे घातक मादक द्रव्य पदार्थों ने आसानी से यहां पैठ बना ली।

न सरकार न राजनीतिक दल उठा रहे सख्त कदम

जाहिर है कि सीमावर्ती जिला ऊना में चैकिंग के पुख्ता प्रबंध न होने के चलते नशीले पदार्थ आसानी से सीमा पार कर यहां पहुंचाए जा रहे हैं। हालांकि बुरी तरह से नशे की गिरफ्त में आ चुकी युवा पीढ़ी के इसके आदि हो जाने के चलते पंजाब में तो इसके खिलाफ आवाजें उठती रहीं हैं लेकिन जिले में फैलते जा रहे नशे के कारोबार पर न कोई राजनीतिक दल आवाज उठा रहा है और न ही सरकार इस पर लगाम कसने के पु ता प्रबंध कर पाई।

विधानसभा चुनावों में भी किसी तरह से जीत दर्ज करने के लिए दोषारोपण की राजनीति तो खूब हो रही है लेकिन इस सामाजिक बुराई का समूल नाश किसी राजनीतिक दल के एजेंडे में शामिल नहीं है। जिले में नशीले पदार्थों का प्रचलन इस कद्र बढ़ा कि न शासन और न ही प्रशासन ने इस तरफ स त कदम उठाए।

ऐसे में सवाल यह है कि क्या पंजाब जैसे हालात पैदा होने का राजनीतिक दल इंतजार कर रहे हैं ताकि उस समय जनता की दुखती रग पर हाथ रख कर इसे चुनावी मुद्दा बनाया जा सके? क्या तेजी से फैल रही नशे के सेवन जैसी सामाजिक बुराई का खात्मा राजनीतिक दलों की प्रमुखताओं में शुमार नहीं होना चाहिए?

पुलिस नशाखोरियों पर शिकंजा कसने में नाकाम

हालांकि जिला पुलिस ने कई बार चूरा पोस्त व भांग जैसे नशीले पदार्थों की खेप पकड़ी तो कई बार जिले में नशे के लिए प्रयोग की जाने वाली दवाओं को भी प्रचुर मात्रा में पकड़ा, लेकिन फिर भी इन नशाखोरियों पर पूरी तरह से शिकंजा नहीं लगा। अब हालात यह हो गए हैं कि स्मैक जैसे घातक नशे भी पुलिस द्वारा बरामद किए जाने लगे हैं। जिला ऊना में नशीले पदार्थों का जाल इस कद्र फैलने लगा है कि आम आदमी अपनी औलाद के इसकी चपेट में आने की बात सोच कर ही कांप उठता है।

कई युवा चढ़े नशे की भेंट

विधानसभा क्षेत्र गगरेट के मनोहर लाल (बदला हुआ नाम) की आंखों के सामने उसके दो जवान बेटे भरपूर जवानी में इस नशे की बलि चढ़ गए। पहला बेटा रात को खाना खाकर बिस्तर पर लेटा तो वह दोबारा कभी नहीं उठा। पिता पहले बेटे के गम को भूला नहीं था कि कुछ साल बाद उसका दूसरा बेटा भी ऐसे ही नशे की बलि चढ़ गया। हालांकि मनोहर लाल ने बदनामी के डर से सीने पर पत्थर रख लिया और नशे के सौदागरों के विरुद्ध आवाज नहीं उठाई। इसके अलावा अकेले गगरेट क्षेत्र में कई युवा रहस्यमय परिस्थितियों में मर चुके हैं।

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