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राज्यपाल की जीरो बजट खेती अब बजट में

कीटनाशकों की जगह जैविक खाद खरीदेगी सरकार

हिमाचल दस्तक ब्यूरो। शिमला
जयराम सरकार के बजट में राज्यपाल आचार्य देवव्रत के जीरो बजट खेती अभियान को भी स्थान मिला है। मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर ने शुक्रवार को बजट पेश कर प्रदेश में जीरो बजट की खेती को प्राथमिकता देने की घोषणा की। उन्होंने कहा कि सरकार जीरो बजट प्राकृतिक कृषि को प्रोत्साहित करेगी, जिससे फसलों की लागत को कम किया जा सके।

उन्होंने राज्यपाल द्वारा इस विषय पर मार्गदर्शन करने के लिए धन्यवाद किया। जैविक खेती एवं जीरो बजट प्राकृतिक कृषि को प्रोत्साहन देने के लिए कृषकों तथा कृषि, बागवानी तथा पशुपालन विभाग के विस्तार अधिकारियों को इस नई प्रणाली में प्रशिक्षित किया जाएगा। इस प्रणाली के बारे में विस्तृत जागरुकता कार्यक्रम प्रारंभ किए जाएंगे। विश्वविद्यालयों द्वारा इसके लिए पैकेज ऑफ प्लास्टिक तैयार किए जाएंगे।

जैविक कीटनाशक संयंत्र के लिए 50 फीसदी अनुदान

जैविक खेती के प्रोत्साहन के लिए जैविक कीटनाशक संयंत्र की स्थापना के लिए 50 प्रतिशत निवेश उपदान दिया जाएगा। प्रदेश सरकार ने वित्त वर्ष 2018-19 में 25 करोड़ का बजट प्रावधान किया गया है। मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर ने कहा कि आगामी 5 साल में हिमाचल को जैविक कृषि राज्य बनाने की परिकल्पना को साकार करेंगे। सीएम ने कहा कि वर्तमान में जो बजट कृषि और बागवानी विभाग को कीटनाशकों के लिए दिया जाता है, उससे जैविक खादों की खरीद होगी।

फसल उपकरण खरीदने के लिए 23 करोड़ का प्रावधान

सुरक्षित खेती को बढ़ाने के लिए पॉलीहाउस के निर्माण हेतु वाईएस परमार किसान स्वरोगार योजना में 2018-19 के लिए 23 करोड़ का प्रावधान प्रस्तावित है। इसके अंतर्गत क्षतिग्रस्त पॉलीशीट्स बदलने के लिए सरकार ने सब्सिडी 50 से बढ़ाकर 70 प्रतिशत करने की घोषणा की। कृषक ट्रैक्टर, पॉवर वीडर, पॉवर टिल्लर जैसे उपकरण खरीद के लिए प्रदेश सरकार ने कृषि उपकरण सुविधा केंद्र स्थापित करने की घोषणा की है। इन केंद्रों की स्थापना के लिए हिमाचल के किसानों, युवा उद्यमियों को 25 लाख की राशि तक की मशीनरी पर 40 प्रतिशत उपदान दिया जाएगा। कृषकों को पॉवर स्प्रेयर, पॉवर टिलर उपदान पर देने के लिए 12 करोड़ का बजट रखा गया है।

फूलों की खेती के लिए 10 करोड़ निर्धारित

मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर ने प्रदेश में पुरूप क्रांति लाने की घोषणा की है। राज्य में उच्च मूल्य वाले फूलों की संरक्षित खेती की बहुत संभावना है, जोकि पारंपरिक खेती की तुलना में उत्पादकों को अधिक मूल्य देती है। इसे देखते हुए सीएम ने हिमाचल पुष्प क्रांति योजना का शुभारंभ करने की घोषणा की है। इसके फलस्वरूप प्रदेश में रोजग़ार के अवसर पैदा होंगे तथा हिमाचल एक पुष्प राज्य के रूप में विकसित होगा। वर्ष 2018-19 में इस योजना के लिए 10 करोड़ का बजट प्रावधान किया है। फूलों की ढुलाई के लिए एचआरटीसी किराये में भी कटौती की गई है।

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