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44 वर्ष बाद सैकड़ों श्रद्धालु बने ऐतिहासिक क्षण के गवाह

जिभी मंदिर में हुई कलश स्थापना, शेषनाग के देवरथ की प्रतिष्ठा में उमड़ा आस्था का जनसैलाब

हिमाचल दस्तक। बंजार
बंजार उपमंडल मुख्यालय से आठ किलोमीटर दूर औट-सैंज एनएच 305 पर जिभी घाटी की दो खाड़ागाढ़ व तिलोकपुर कोठियों के अधिष्ठाता देवता गढ़पति मूल शेषनाग के नए देवरथ के प्राण प्रतिष्ठा समारोह के उपलक्ष्य में वीरवार को पूरी जिभी घाटी वाद्य यंत्रों की कलरव ध्वनि से गूंज उठी। इसमें दर्जनों देवी देवताओं के कारकूनों, हारियानों, शेषनाग के भक्तों व श्रद्धालुओं की आस्था का जनसैलाब उमड़ पड़ा।

इससे पूरी घाटी देवमयी हो गई। इस अवसर पर वीरवार सुबह शेषनाग के जिभी मंदिर में कलश की स्थापना की गई। गौरतलब है कि इससे पहले 21 दिसंबर 1973 को गढ़पति मूल शेषनाग जिभी का देवरथ बना था व इसकी प्राण प्रतिष्ठा हुई थी। अब 44 वर्ष बाद वीरवार को नए देवरथ का प्राण प्रतिष्ठा समारोह जभी मंदिर में आयोजित किया जा रहा है और आज शुक्रवार 15 दिसंबर को जिभी मंदिर में एक शाही धाम का आयोजन किया जा रहा है।

इस ऐतिहासिक अवसर पर हजारों श्रद्धालुओं व भक्तजनों, हारियानों व कारकूनों ने शेषनाग द्वारा अपने देवसाम्राज्य को चलाने के लिए स्वयं जीभ के आकार की बनाई गई भूआकृति जिभी में गढ़पति मूल शेषनाग के मंदिर में वीरवार की मध्यरात्रि को नए देवरथ के प्राण प्रतिष्ठा समारोह की धार्मिक व पारंपरिक रस्मों को कड़ाके की ठंड में शून्य डिग्री तापमान पर आस्था के जनसैलाब में शेषनाग के चरणों में नतमस्तक होकर निभाया व इस ऐतिहासिक क्षण के साक्षी बने।

आस्था व श्रद्धा के सैलाब में गढ़पति शेषनाग जिभी के चरणों में नतमस्तक हुए श्रद्धालु

गढ़पति मूल शेषनाग के नए देवरथ के निर्माण कार्य से लेकर प्रतिष्ठा समारोह तक सक्रिय भूमिका निभाने वाले गढ़पति मूल शेषनाग की खाड़ागाढ़ व तिलोकपुर की दो कोठियों के कारकूनों वरिष्ठ कारदार सत्यदेव नेगी, भंडारी लोभूराम, काईथ भादर सिंह, गूर पूर्ण चंद, पुरोहित गोभिंद्र सिंह, पुजारी पुनेराम तथा शेषनाग के तीनों बहढ़ों मिहार बहढ़ के कारदार प्रेमदास व दरोगा प्यारे सिंह, तांदी बहढ़ के कारदार देवराज नेगी व दरोगा खूबराम और खाड़ागाढ़ बहढ़ के कारदार प्रताप सिंह व दरोगा चेतराम और बृतदार केहर सिंह व ज्ञान चंद और देवदूत बालकराम की अगुवाई में 44 वर्ष बाद आयोजित किए जा रहे इस प्राण प्रतिष्ठा समारोह में कुल्लू व मंडी जिला के करीब डेढ़ दर्जन देवी-देवताओं व हारियानों सहित स्थानीय देवी देवताओं के कारकूनों, हारियानों, हजारों श्रद्धालुओं तथा भक्तजनों के शीश आस्था व श्रद्धा के सैलाब में गढ़पति शेषनाग जिभी के चरणों में नतमस्तक हुए ।

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