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पत्र बम की बम-बम में टूटेगा शीतकालीन सत्र का दम

नए खत की टाइमिंग से बदले हालात,जनता की हालत पर असर

सबको अपनी-अपनी फिक्र, नहीं जनता का कोई जिक्र
हिमाचल दस्तक। उदयबीर पठानिया

शीतकालीन सत्र के लिए पक्ष-विपक्ष दोनों ने जनता के मुद्दों की कमर तोड़ने के लिए कमर कस ली है। सत्ता पक्ष भी दिल्ली में बैठकर कसरत कर रहा है और विपक्ष भी दिल्ली में ही डटा हुआ है। सत्ता पक्ष के लोग दिल्ली में अपनी-अपनी कुर्सियों के लिए हाड़-तोड़ मेहनत कर रहे हैं। कुछ दिल्ली दरबार में अपनी-अपनी कुर्सियों को बचाने के लिए ‘पाएं लागू सरकार’ की मुद्रा में हैं तो कुछ कुर्सियां हासिल करने के लिए,’ तुम्ही हो माता, पिता तुम्ही हो’ का प्रार्थना गीत गा रहे हैं। विपक्ष के लोग भी सत्ता पक्ष के खिलाफ खड़े होने की जगह दिल्ली के सोनिया दरबार में नतमस्तक हुए पड़े हैं। बस अगर कहीं कुछ नहीं है तो वह हैं जनता और उससे जुड़े मुद्दे।

सिलसिलेवार बात करें तो सत्ता पक्ष की हालत यह है कि अपने हालात दुरस्त रखने के लिए सारा कुनबा लगा हुआ है। मंत्रिमंडल के संभावित या कथित विस्तार की बात भी करें तो यह भेड़िया आया-भेड़िया आया की कहानी जैसा ही बना हुआ है। रोज अंदाजे ही लगते हैं कि अब हुआ या अब हुआ । इस विस्तार के हल्ले ने सरकार का आकार छोटा कर दिया है। सचिवालय में सरकार दिखने ही बंद हो गई है।

हर दिन मंत्री दिल्ली दौड़े हुए हैं। मकसद सिर्फ अपने वजूद को बनाए रखना है। कब कौन मंत्री दिल्ली चला जा रहा है, इसका पता सीएम ऑफिस को भी नहीं होता। पता अखबारों से चलता है कि आज फलां वजीर तो दिल्ली दरबार मे हैं। प्रदेश भर में मंत्रियों की हाजिरी कम होती जा रही है। लगातार इनके टूअर प्रोग्राम रद्द हो रहे हैं। एक मंत्री महोदय तो विदेश की जमीन से लौट कर सचिवालय की दहलीज पर पहुंचे ही थे कि उल्टे पांव दिल्ली लौट गए। तमाम मंत्रियों के दिल्ली के दौरे खत्म नहीं हो रहे।

BJP and Congress

दिल्ली के हिमाचल भवन और सदन में सरकार की गर्माहट बनी हुई है। हिमाचल की जनता सरकारी बेरुखी की ठंड में ठिठुर रही है। सचिवालय में भी मंत्री नहीं मिल रहे और जमीन पर भी यह फिलवक्त लुप्तप्राय: प्रजाति घोषित होने के कगार पर पहुंच गए हैं। कोई ऐसी बात सत्ता पक्ष की तरफ से अभी तक सामने नहीं आ पाई है, जिसके दम पर यह एहसास हो कि सत्ता पक्ष जनता के लिए कोई दम लगा रहा हो। सब अपने लिए दम लगाए हुए हैं। विपक्ष में बैठी कांग्रेस का भी यही हाल और चाल हैं। जंग सत्ता पक्ष की बजाय आपस मे पूरे उफान पर है। दिल्ली में सीएलपी और प्रदेशाध्यक्ष बनने के लिए उफान पर है।

सिरमौर के नेता कांग्रेस के सिरमौर तो बिलासपुर वाले सियासी डैम से बाहर निकल कर खुद को सीएलपी बनाने के लिए दम लगाए हुए हैं। चंबा वाले भी दिल्ली कनेक्शन के करंट से कांग्रेस संगठन सुप्रीमों बन कर रिचार्ज करने के लिए तैयार बताए जा रहे हैं। हमले सत्ता पक्ष की बजाए एक-दूसरे पर हो रहे हैं। सदन में बैठे कांग्रेसी सीएलपी के लिए तो सड़क पर बैठे पीसीसी चीफ के लिए ताकत लगाए हुए हैं। जनता के लिए पूरी हाथ वाली टीम हाथ पर हाथ रखे हुए है। पक्ष-विपक्ष दोनों की नजर उस पत्र बम पर टिकी हुई है जिसका दूसरा पार्ट अभी रिलीज हुआ है। कांग्रेस हमलावर और भाजपा रक्षात्मक होने के लिए रणनीति बनाए जा रहे हैं। आम आदमी के खास मुद्दे बर्फ में ही लगे नजर आ रहे हैं। कमर तोडऩे के लिए कमर कसी जा रही हैं।

Investor Meeting

इन्वेस्टर मीट पर जोर नहीं, अपने लिए जुगाड़

प्रदेश के विकास के लिए जो ग्लोबल इन्वेस्टर्स मीट हुई थी,उसकी कामयाबी के लिए कोई ठोस काम करता नजर नहीं आ रहा। जिस जयराम टीम को इस मीट की कामयाबी के लिए काम करना चाहिए था,वह अपने काम को तमाम होने से रोकने में लगी हुई है। कागजों में दिल्ली दौरे इनवेस्टरमीट के नाम पर हो रहे हैं। जबकि हकीकत यह है कि कोई अपने करिअर की इन्वेस्टमेंट को बनाए रखने तो कोई इस पॉलिटिकल इन्वेस्टमेंट का हिस्सा बनने के लिए काम कर रहा है।

दो ‘गरीब’ ब्राह्मण कर रहे ‘स्थापना’ आसन

विरह की मार से त्रस्त दो ब्राह्मण नेता दिल्ली की सड़कों पर अपने-अपने वजूद के मुताबिक कर रहे सेटिंग भाजपा के दिल्ली दरबार में हिमाचल के एक पुराने तो एक मौजूदा कांग्रेसी नेता जुगाड़ तंत्र के मंत्र जप रहे हैं। इनमे से एक नेता जी दो साल पहले कांग्रेस से नाता तोड़ कर भाजपाई बने थे। दूसरे वह हैं जिनका कथित सियासी प्रेम प्रसंग भाजपा से चंद महीने पहले ही शुरू हुआ माना जाता है। सबसे पहले किस्सा उन पंडित जी से जुड़ा हुआ है जो लोकसभा चुनावों के दौरान भाजपा में रहते हुए भी धर्मसंकट में फंस गए थे। नतीजा यह रहा जनाब न इधर के रहे न उधर के। बताया जा रहा है कि वीरवार को यह दिल्ली में भाजपा के नंबर दो के नेता जी के पास पेश हुए और अपनी अनदेखी का दर्द साझा किया। दिल्ली दरबार मे उन्होंने मुम्बई के एक उद्योगपतियों के समूह के साथ मुलाकात की।

दूसरी खबर उन ब्राह्मण नेता जी से जुड़ी हुई है जो बीते विधानसभा उपचुनाव में कांग्रेस को धत्ता बताया था। तब ही इन पर यह आरोप लग गए थे कि यह भाजपा के साथ प्रेम की पींगे बढ़ा रहे हैं। कई कांग्रेसी इनके खिलाफ आवाज बुलंद किए हुए हैं। स्थापना की चाहत में यह भी दिल्ली के हिमाचल सदन में हिमाचल भाजपा के बड़े साहब के साथ डेढ़ घंटे तक सुख की तलाश में दुख सांझा करते रहे। बीते सप्ताह उनको बड़े साहब के सानिध्य में बैठने का सौभाग्य बड़े साहब के ही उन एक एक अभिन्न ब्राह्मण मित्र की मध्यस्था से संपन्न हुआ जो हैं तो कांगड़ा से मगर शिमला दरबार में यह राज पुरोहित का दर्जा रखते हैं। खबरें दोनों बाहर आ गई हैं,पर सार अभी तक छिपा हुआ है।

एक गरीब ब्राह्मण था…

कहानी ठीक वैसी ही है, जैसी पुरातन कहानियों में पढ़ने को मिलती है। जिनमे यह कहा-सुनाया जाता है कि एक गरीब ब्राह्मण राजा के पास गया और राजा ने उसको ढेर सारी स्वर्ण मुद्राएं देकर रवाना किया। ब्राह्मण बाद में खुशी-खुशी जीवन यापन करने लगा। सियासत में अचानक गरीब हुए इन दोनों गरीब ब्राह्मणों को भविष्य कैसा होगा, यह तो तभी पता चलेगा जब यह पता चलेगा कि इन राजनीति के राजाओं ने इन दोनों को दिया क्या है ?

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