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Sewerage

विभाग के सुस्त रवैये से लटकी Sewerage योजना

हिमाचल दस्तक ब्यूरो, बिलासपुर।। बिलासपुर शहर की चिरंलबित 22 करोड़ की Sewerage योजना करीब पिछले 10 वर्षों से सरकार व विभाग के सुस्त रवैये के चलते अब तक अधर में लटक गई है। सरकार व विभाग के सुस्त रवैये के कारण अब इस सीवरेज योजना का निर्माण कार्य शुरू करने के लिए एक नई ईंट भी नहीं लग पाई है।

  • Sewerage व्यवस्था को 22 करोड़ की डीपीआर तैयार कर राशि हुई थी स्वीकृत
  • अब सीवरेज के टैंक वाली जमीन के लिए फिर से होगी निशानदेही
  • भाजपा व कांग्रेस कार्यकाल में नहीं शुरू हो पाया काम
  • निशानदेही के बाद काम शुरू होने के आसार

इस सीवरेज योजना के बारे में अगर विभागीय अधिकारियों की मानें तो बिलासपुर शहर से बाहर बसे खैरियां गांव के किनारे जहां पर सीवरेज योजना के लिए बनने वाले सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट टैंक बनना प्रस्तावित हैं, वहां जमीन बीबीएमबी की है। इस कारण विभाग फिर से वहां पर जमीन की निशान देही लेने का प्रयास कर रहा है। अगर निशान देही सही पाई गई तो विभाग सीवरेज प्रणाली का कामकाज शुरू कर सकने की संभावना है।

यह निशानदेही बीबीएमबी की जमीन पर निर्भर करती है कि वहां पर कितने प्रतिशत जमीन बीबीएम की है अथवा नहीं। बताया जा रहा है कि पूरी तरह निशानदेही होने के बाद स्थानीय शहर की नई सीवरेज प्रणाली का निर्माण कार्य शुरू होने की संभावना जताई जा रही है।

बिलासपुर शहर के लिए भाखड़ा बांध बनने के बाद 1960 के दशक मेें सीवरेज व्यवस्था चालू की गई थी। लेकिन उसके बाद करीब 57 वर्षों तक इस ओर किसी ने इस मुद्दे पर गंभारता नहीं दिखाई। बिलासपुर शहर वर्षों पुरानी सीवरेज व्यवस्था के सहारे चल रही है। काबिले गौर है कांग्रेस सरकार के पूर्व कार्यकाल में नई सीवरेज व्यवस्था का निर्माण करने के लिए 22 करोड़ की डीपीआर तैयार कर गई थी व राशि स्वीकृत हुई थी।

उसके बाद प्रदेश में सत्ता परिवर्तन हुआ और भाजपा सत्ता पर काबिज हुई। परंतु किसी ने भी इस मुददे को गंभीरता से नहीं लिया। फिर से प्रदेश में कांग्रेस सत्ता पर कब्जा किया। लेकिन अब मसला निशानदेही तक पहुंच गया है। अब सीवरेज टैंक बनने वाली जमीन की निशान देही सही पाई गई तो शीघ्र शुरू हो सकता है।

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