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2011 व 2014 के निर्देशों में उलझकर चूक की शिक्षा विभाग ने,  बैच में जनरल कोटे की सीटें रिजर्व को देने से कोर्ट जाएगा यह झगड़ा

हिमाचल दस्तक ब्यूरो। शिमला : जेबीटी की बैच वाइज भर्ती में जनरल कोटे की सीटों पर रिज़र्व से शिक्षक नियुक्त करने का विवाद शिक्षा विभाग ने अब सरकार को भेज दिया है। बुधवार शाम को शिक्षा सचिव अरुण शर्मा ने सचिवालय में इस मुद्दे पर लंबी बैठक की।

इसमें एलिमेंट्री निदेशक रोहित जमवाल भी थे। सारा रिकॉर्ड देखने के बाद तय हुआ कि 2011 और 2014 में इस बारे में कार्मिक विभाग से जारी क्लेरिफिकेशन पर दोबारा कार्मिक विभाग से ही राय ली जाए। तब तक बिलासपुर समेत उन सभी जिलों में नियुक्तियों पर रोक रहेगी, जहां यह भर्ती नहीं हुई है। संपर्क करने पर अरुण शर्मा ने बताया कि इन्हीं दो क्लेरिफिकेशन के अलग-अलग अर्थ निकाले गए। हालांकि उन्होंने भी माना कि बैच वाइज में 15 अंकों की मेरिट से आरक्षण कोटा नहीं बदला जाना चाहिए था।

अब इस विवाद को हमेशा के लिए सुलझाने के लिए जरूरी हुआ तो लीगल ओपिनियन भी लेंगे। गौरतलब है कि बिलासपुर में जेबीटी की बैच वाइज भर्ती में सामान्य वर्ग की 25 सीटों में से 17 ही भरी गई थी। बाकी सीटें एससी और ओबीसी में बंट गईं। ऐसा उप निदेशक ने इस आधार पर किया कि इंटरव्यू खत्म होने के बाद लागू 15 अंकों के आधार पर मेरिट बनाई और टॉपर रिजर्व के अभ्यर्थियों को जनरल की सीटें दे दीं, जबकि यह प्रक्रिया केवल सीधी भर्ती की है।

जो ज्वाइन कर गए उनका क्या होगा?

शिक्षा विभाग ने कई और जिलों में भी ऐसा किया है और वहां जनरल की सीटों के अगेंस्ट रिजर्व वाले ज्वाइन भी कर गए हैं। अब यदि पूरी प्रक्रिया नए सिरे से होती है तो इनका क्या होगा? शिक्षा विभाग को अब खुद लग रहा है कि यह केस कोर्ट जाएगा। दूसरी और यह फाइल आने से पहले ही कार्मिक विभाग का कहना है कि हम इस केस में एडवाइस तभी देंगे, यदि आर एंड पी रूल्स पहले कार्मिक विभाग से वेट करवाए गए हों।

 

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