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हिमाचल दस्तक,अमीर बेदी । पालमपुर

प्रदेश राजनीति में एक मिसाल कायम करता बुटेल परिवार अपने संस्कारों को आज भी सहेजे हुए है। राजनीति के पहले पायदान पर जगह बनाने वाले इस परिवार में सेवा भाव आज भी कूट-कूट कर भरा है। जिसके चलते जनता और बुटेल परिवार के बीच प्रगाढ़ सम्बंध माने जाते रहे हैं।

समर्पण भाव और घर में आए मेहमानों का आदर सत्कार कैसे हो यह देखना हो तो पालमपुर में बृज बिहारी बुटेल के घर चले आइए। करीब छह दशकों से प्रदेश कांग्रेस की सक्रिय राजनीति में योगदान देने वाला बुटेल परिवार अपने संस्कारों को पीढ़ी दर पीढ़ी निभाता आया है। राजनीति में दर्जनों ओहदे बुटेल परिवार के नाम पर हैं।

जनता गवाह है कि सभी ओहदे पैराशूट के जरिए ना मिल कर धरातल पर की गई मेहनत से ही बृज बिहारी बुटेल परिवार को मिले हैं। इन ओहदों की हिफाजत करना बृज बिहारी बुटेल के सुपुत्र विधायक आशीष बुटेल भी सीख चुके हैं। आशीष बुटेल ने अपने पिता के नक्शे कदम पर चल कर समर्पण भाव से अपने और परिवार के व्यक्तित्व को निखारने के सफल प्रयास किए हैं।

भले ही कांग्रेस पार्टी सत्ता में नहीं है लेकिन बृज बिहारी बुटेल के आवास पर फरियादियों कि आज भी कमी नहीं है। आशीष बुटेल घर पहुंचने वाले किसी भी शख्स के चेहरे से कभी नहीं पूछते कि वह किस पार्टी से संबंध रखता है। हिमाचल दस्तक ने बृज बिहारी बुटेल के आवास पर पहुंचकर पाया कि सुबह करीब आठ बजे लोगों की दस्तक शुरू हो जाती है।

लोगों के आते ही पहले तो उन्हें निहायत ही सुंदर एक बड़े हॉल में बैठने के लिए कहा जाता है। यह वही पुराना हाल है जहां किसी समय इंदिरा गांधी जैसी महान हस्तियों ने भी पैर रखे थे। बुटेल परिवार ने आज भी कुछ पुराने चित्र इस बड़े हॉल में लगा रखे हैं जोकि उनका पुरानी राजनीति से संबंध होने की ओर इशारा कर देता है।यहां लोगों को उनकी पसंद के अनुसार चाय पान करवाया जाता है।

विधायक आशीष बुटेल भी समय की नजाकत को भांपते 10 बजे से पहले ही फरियादियों की समस्याओं को सुनकर उनका निपटारा करने की कोशिश करते हैं। आशीष बुटेल खुद मानते हैं कि बुजुर्गों द्वारा अपनाए गए संस्कारों को वे जारी रखना चाहेंगे।

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