Anupam-Kher

हिमाचल दस्तक ब्यूरो। सोलन
शिमला ने मुझे सपने, विचार और कल्पनाएं दी हैं। इस वजह से मैं आज अपनी पहचान और 508 फिल्में करने में कामयाब रहा हूं। छोटे शहर में पैदा होने से लोगों ने मुझे वैल्यूज बताई। लोग एक दूसरे को पहचानते व समय देते थे। यह शब्द लिटफेस्ट के अंतिम दिन बॉलीवुड के सुपरस्टार व लेखक अनुपम खेर ने कही। अनुपम खेर ने श्रोताओं को हंसाने में कोई कसर नहीं छोड़ी। उन्होंने शिमला में बताए बचपन के दिनों को याद करते हुए इसे लोगों के साथ साझा किया। उन्होंने बताया कि वह न तो पढ़ाई में अच्छे थे न ही खेलो में। कभी 38 से ज्यादा नंबर नहीं आए। यहां तक उनकी पीटी टीचर कहते थे कि अकेले भी भागोगे तो भी सेकंड ही आओगे। उन्होंने उन्होंने हंसते हुए कहा कि इसलिए तो आज 38 वाला व्यक्ति आप के बीच है। एक्टर जन्मजात नहीं होता उन्हें बनाया जाता है।

खुशवंत सभी विषयों के थे ज्ञाता

अनुपम खेर ने कहा कि खुशवंत सिंह के साथ बिताई करीब 20 शाम मेरे दिल में हमेशा जीवित रहेगी। वे महान शिक्षाविद व सभी विषयों के ज्ञाता थे। कसौली लिटफेस्ट को इंडियन आर्मी को समर्पित करना और इंडियन एयर फोर्स-डे पर मेरा इस लिटफेस्ट में 400 जवानों के साथ विचार साझा करना सुखद है। उन्होंने अगले वर्ष से लिटफेस्ट में बेस्ट डेब्यू राइटर को एक लाख देने कि घोषणा भी की।

भीगा हुआ आदमी बारिश से नहीं डरता

अनुपम ने अपने दादा जी को समर्पित अपनी पहली किताब में लिखी गई लाइन भीगा हुआ आदमी बारिश से नहीं डरता पर बताया कि एक्टिंग स्कूल से निकलने के बाद जब मुंबई पहुंचा तो डेढ़ साल तक कोई काम नहीं मिला। मैंने घर वापस आने का फैसला किया। दादा जी ने मुझसे कहा कि तुम्हारे माता-पिता ने तुम्हें यहां तक पहुंचाने में बहुत मुश्किल समय गुजारा है। इन शब्दों ने मेरी जिंदगी में ही बदल दी।

साहित्कारों ने साझा किए विचार

सोलन। लिटफेस्ट के समापन पर लेखक, साहित्यकारों ने अपनी किताब और विचारों को लोगों के साथ साझा किया। खुशवंत सिंह के बेटे राहुल सिंह ने सभी का धन्यवाद किया। उन्होंने कहा कि कसौली लिटफेस्ट खुशवंत सिंह को लोगों के बीच हमेशा जिंदा रखेगा। सुभाष चंद्र बोस द्वितीय विश्वयुद्ध के दौरान पेशावर से काबुल ले जाने वाले जासूस से प्रभावित नहीं थे। मुस्लिम क्षेत्र से निकलने के लिए सुभाष चंद्र बोस को मुस्लिम नाम मोहम्मद जियाउद्दीन रखना पड़ा। यह बात लिटफेस्ट में अपनी किताब ‘स्टोरी ऑफ रेमार्केबल इंडियन स्पय ऑफ 2 वल्र्ड वार पर चर्चा के दौरान मिहिर बोस ने कही।

उन्होंने कहा कि जासूस भगत राम तलवार जो हिंदू पठान था उसे कीर्ति पार्टी की तरफ से नेता जी को पेशावर से काबुल पहुंचाने की जिम्मेदारी थी। 1940 में ब्रिटिश पुलिस द्वारा भगत राम के भाई को मारने के बाद भगत राम कीर्ति पार्टी में शामिल हुए। कीर्ति पार्टी के कोलकाता में अच्छे संबंध से उन्होंने नेता जी को पेशावर लाने का जिम्मा शिशिर बोस को दिया। इस चर्चा में उनके साथ सुमंत्र बोस, मार्क टुली व आनंद सेठी शामिल रहे। इसके बाद अश्विन सांघी ने अपनी किताब पर चर्चा की। वहीं, अपनी किताब बैटल ग्राउंड पर बोलते हुए जनरल संधू ने कहा कि आज तक भारत पाक के बीच हुए युद्ध में सबसे ब्लडिएस्ट युद्ध था 1971 छंब का।

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