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kiwi chain lal

फौजी की मेहनत से बंजर जमीन उगलने लगी सोना

प्रेरित होकर अन्य लोगों ने भी शुरू की खेती

सोमी प्रकाश भुव्वेटा। चंबा
अगर कुछ नया करने का जुनून हो तो विपरीत परिस्थितियों को भी अपने अनुकूल बनाया जा सकता है। अब देखिए न जलवायु परिवर्तन की वजह से जिस एरिया में ढंग से खेती तक नहीं की जा सकती थी। अब उस एरिया की बंजर जमीन को एक फौजी की मेहनत ने उपजाऊ बनाने का कमाल कर दिखाया है। जमीन को उपयुक्त बनाने के इस फौजी के सभी प्रयोग इतने सार्थक साबित हुए हैं कि अब उस एरिया की जमीन जैसे सोना उगलने लगी है। यह जिक्र बाट पंचायत के संडू गांव के चैन लाल का किया जा रहा है।

चैन लाल पहले बंदूक उठा कर देश की रक्षा करते रहे। अब सेवानिवृत्ति के बाद 67 साल की उम्र में खेती करके दूसरों को भी प्रेरित कर रहे हैं। चूंकि संडू समेत आसपास के एरिया पर जलवायु परिवर्तन का व्यापक असर रहा है। इसका अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि वर्षों पहले जिस तरह से यहां की जमीन में पैदावार होती रही। अब उस लिहाज से सभी तरह की फसलों की पैदावार नहीं हो रही। इसी वजह से संडू समेत आसपास के लोगों ने धीरे-धीरे खेती-बाड़ी करनी बंद करके कोई और काम धंधा शुरू कर दिया था लेकिन चैन लाल ने यहां की जमीन को उपयुक्त बनाने के लिए प्रयास जारी रखे।

इनके अपने एरिया में कीवी के 950 पेड़ हैं

शुरुआत में कुछेक कीवी के पौधे अपनी जमीन पर लगाए। प्रयोग जब सफल रहा तो विटामिन्स, मिनरल्स, पोटाशियम, कैल्शियम, आयरन और मैग्नीशियम जैसे खनिज तत्व और कई एंटी ऑक्सिडेंट से भरपूर कीवी फल की पौधशाला का दायरा बढ़ा दिया गया। अब इनके अपने एरिया में कीवी के 950 पेड़ हैं। जिनसे हर साल साढ़े नौ लाख की कमाई हो रही है। कीवी फल की खेती के सफल उपयोग से प्रेरित होकर संडू गांव के अन्य लोगों ने भी कीवी की पैदावार शुरू कर दी है। उनके ऐसा करने से उनकी भी आर्थिक स्थिति मजबूत हुई है।

अन्यथा संडू समेत आसपास के एरिया के लोग गुरबत का जीवन जीने को मजबूर थे। सेवानिवृत्त फौजी चैन लाल ने कड़ी मेहनत करके कीवी की बंपर फसलें तैयार कर दूसरों को भी इस राह पर चलने के लिए प्रेरित कर दिया है। आज जब संडू समेत आसपास के एरिया के लोग कीवी की बदौलत अच्छी कमाई कर रहे हैं तो यहां के लोग चैन लाल का इसके लिए शुक्रिया अदा करते नहीं थकते।

जिले मेंं कीवी की खेती की मजबूत नींंव डालने वाले चैन लाल अब कीवी मैन के तौर मशहूर हैं। पहले देश की खातिर अपनी जवानी खपा देने और अब बंजर जमीन को उपजाऊ बनाने में कामयाब रहे देश के इस असली वीर से इन दिनों कई विश्वविद्यालयों के स्कॉलर मिलने पहुंच रहे हैं।

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