murder case

नाराज अदालत ने पूछा, जांच नहीं होती, तो NIA को दें

पुलिस अफसरों के खिलाफ अभियोजन मंजूरी का इंतजार

विधि संवाददाता। शिमला
CBI ने गुडिय़ा रेप और मर्डर तथा इसी मामले से जुड़े आरोपी सूरज की लॉकअप में हत्या की जांच से जुड़ी पांचवीं संयुक्त स्टेटस रिपोर्ट सील्ड कवर में हाईकोर्ट को सौंपी। कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश संजय करोल न्यायाधीश संदीप शर्मा की खंडपीठ ने CBI की जांच रिपोर्ट देखने पर CBI को फटकारते हुए कहा कि CBI की अभी तक की स्टेटस रिपोर्टों से प्रतीत होता कि CBI के हाथ अभी तक कोई सुराग नहीं लगा है, जबकि CBI का खुद का मांगा गया समय समाप्त होने को है।

कहा CBI के पास भी यदि संसाधन नहीं हैं तो ये केस NIA को दे देते हैं

कोर्ट ने उपस्थित CBI अधिकारियों को 25 अक्तूबर तक विस्तृत जानकारी कोर्ट के समक्ष रखने के आदेश दिए और कहा कि यदि फिर भी कोर्ट से कुछ छिपाया गया तो सीबीआई के डायरेक्टर को कोर्ट में तलब करना पड़ेगा। मामले पर सुनवाई 25 अक्टूबर को होगी। कोर्ट ने कहा कि यदि इतने समय से भी जांच पूरी नहीं हुई और CBI के पास भी यदि संसाधन नहीं हैं तो ये केस NIA को दे देते हैं। कोर्ट ने तर्क दिया कि एजेंसी या तो समय ज्यादा मांगती। जो रिपोट्र्स दी जा रही हैं, उनमें सुराग कोई नहीं है।

जब हम बोल रहे हैं कि विस्तृत रिपोर्ट बताओ तो एजेंसी कोर्ट से ही छिपा रही है, जबकि बहुत सी बातें अब पब्लिक डोमेन में हैं। हाईकोर्ट ने जब पुलिस कस्टडी में आरोपी सूरज के हत्याकांड के आरोपियों के खिलाफ पेश किए जाने वाले चालान में हो रही देरी को लेकर पूछा तो CBI ने बताया कि आरोपी पुलिस कर्मियों के खिलाफ अभियोजन मंजूरी अभी नहीं मिली है।

राज्य और केंद्र सरकार से इसके मिलते ही चालान पेश कर दिया जाएगा। जब ये पूछा गया कि इस बात को जवाब में क्यों शामिल नहीं किया? CBI के वकील ने जवाब दिया कि शामिल किया था लेकिन CBI आफिस में कट गया। कोर्ट ने इस पर हैरानी जताते हुए कहा कि ये आपकी सुनते नहीं क्या? आपके ऐसे क्लाइंट को क्यों डिफेंड कर रहे हो?

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