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kuldeep rathore

लोकसभा चुनाव से पहले बदलाव किया राहुल गांधी ने

एक भी चुनाव नहीं लड़े हैं आनंद शर्मा के करीबी राठौर

हिमाचल दस्तक ब्यूरो। शिमला
कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष राहुल गांधी ने लोकसभा चुनाव से ठीक पहले सुखविंद्र सुक्खू की जगह अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी के सदस्य कुलदीप राठौर को हिमाचल प्रदेश कांग्रेस कमेटी का नया अध्यक्ष नियुक्त किया है। एआईसीसी के महासचिव अशोक गहलोत की ओर से अधिसूचना में राहुल गांधी ने इस पद पर सुखविंद्र सुक्खू के योगदान की भी तारीफ की है। जानकारी के मुताबिक सुक्खू की जगह कुलदीप राठौर को हिमाचल कांग्रेस कमेटी का अध्यक्ष बनाने का फैसला वीरवार को दिल्ली में आयोजित उच्च स्तरीय बैठक में लिया गया।

लोकसभा चुनाव की तैयारियों को लेकर आयोजित इस बैठक की अध्यक्षता पार्टी अध्यक्ष राहुल गांधी ने की। इसमें हिमाचल सहित अन्य राज्यों के प्रदेश अध्यक्षों, प्रभारियों, मुख्यमंत्रियों और एआईसीसी के सदस्यों सहित अन्य वरिष्ठ नेताओं ने भाग लिया। पूर्व केेंद्रीय मंत्री आनंद शर्मा के करीबी रहे कुलदीप राठौर ने अब तक एक भी चुनाव नहीं लड़ा है, लेकिन वीरभद्र सिंह बनाम सुखविंद्र सुक्खू के झगड़े का लाभ उन्हें मिला है।

इसी कारण अध्यक्ष पद के लिए आशा कुमारी, रामलाल ठाकुर और हर्षवर्धन सिंह जैसे वरिष्ठ विधायक इग्नोर हो गए। कुलदीप राठौर का इससे पहले वीरभद्र सिंह के साथ छत्तीस का आंकड़ा रहा है, लेकिन पार्टी के भीतर बने नए समीकरणों के कारण वह अब वीरभद्र खेमे को रास आएंगे।

प्रोफाइल – हिमाचल कांग्रेस के नए अध्यक्ष

कुलदीप राठौर छात्रकाल से लेकर ही कांग्रेस के साथ जुड़े रहे हैं और विभिन्न पदों पर रहकर पार्टी के लिए कार्य किया है। 29 अगस्त, 1960 को गांव छेबरी तहसील कुमारसैन में पैदा हुए कुलदीप राठौर अब 56 वर्षीय हैं। उन्होंने 1978 में एनएसयूआई ज्वाइन की और 1981 से लेकर 1987 तक छह साल एनएसयूआई के अध्यक्ष रहे। इसके बाद वह लगभग 15 साल तक प्रदेश कांग्रेस कमेटी के महासचिव और बाद में मुख्य प्रवक्ता भी रहे। उन्होंने प्रदेश कांग्रेस के कई अध्यक्षों के साथ बतौर महासचिव एवं प्रवक्ता कार्य किया है। वह हिमाचल कांग्रेस मीडिया विंग के चेयरमैन भी रहे हैं।

छह साल वीरभद्र खेमे को खटकते रहे सुक्खू

निर्वतमान अध्यक्ष सुखविंद्र सुक्खू ने पार्टी अध्यक्ष के पद पर करीब 6 साल काम किया। वह विधानसभा चुनाव हारने के बाद जनवरी 2013 में अध्यक्ष बन गए थे। लेकिन वीरभद्र सिंह चुनाव से अध्यक्ष का चुनाव करवाने पर अड़े रहे। विधानसभा चुनाव तक सुक्खू भी डटे रहे और संगठन में अपनी एक टीम तैयार की। पार्टी तो चुनाव हारकर सत्ता से बाहर हो गई, पर सुक्खू नादौन से जीतकर विधायक बन गए। इसके बाद राज्य कांगे्रस की नई प्रभारी रजनी पाटिल के प्रदेश के दौरों में हुए सम्मेलनों में सुक्खू पर वीरभद्र खेमे के हमले होते रहे और उन्हें अब जाना पड़ा।

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