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kullu holi festival

भगवान रघुनाथ जी की नगरी में होली उत्सव पर होगा समापन परंपरा

वृंदावन में भी पर्व बसंत पंचमी को होता है शुरू

गीता। कुल्लू
कुल्लू में होली उत्सव का आगाज 40 दिन पहले शुरू हो गया है, जिसका समापन भगवान रघुनाथ जी की नगरी में होली उत्सव के दौरान किया जाएगा। कुल्लूू ही नहीं अपितु भगवान कृष्ण की लीलास्थली वृंदावन में भी यह पर्व बसंत पंचमी के दिन शुरू होता है। देश भर की अन्य होलियों में अलग स्थान रखने वाली कुल्लू व वृंदावन की होली अन्य स्थानों पर मनाई जाने वाली होली से 40 दिन पूर्व शुरू हो जाती है। देवभूमि में जहां भगवान रघुनाथ के साथ होली खेली जाती है, तो वहीं मथुरा के वृंदावन में कान्हा संग होली खेली जाती है जो एक ही दिन शुरू होती है।

सुल्तानपुर में भगवान रघुनाथ विराजमान रहते हैं। 40 दिन पहले शुरू हुई कुल्लू में होली का समापन वीरवार को किया जाएगा। भगवान रघुनाथ के छड़ीबदार महेश्वर सिंह बतातें हैं कि बसंत पर्व के दिन से कुल्लू व वृंदावन में भगवान राम व कृष्ण की होली आरंभ होती है। उन्होंने कहा कि कुल्लू में पर्व मनाने की शुरुआत 1651 से भगवान रघुनाथ की मूर्ति के कुल्लू आने से हुई हैं। उस काल में कुल्लू में राजा जगत सिंह थे तथा उनके शासनकाल में मूर्ति के आने के बाद बैरागी समुदाय के लोग भी कुल्लू आए थे जिन्हें आखाड़ा बाजार में शरण दी गई थी।

कुल्लू में मंहत सबसे पहले इसे नगर झीणी के नरसिंह माता के दरबार से शुरू करते हैं

वहीं, देवता गौहरी, वीरनाथ के कारदार ने बताया कि यह त्यौहार वंसत पंचमी के दिन से शुरू होता है। कुल्लू में मंहत सबसे पहले इसे नगर झीणी के नरसिंह माता के दरबार से शुरू करते हैं। उसके बाद रघुनाथ के मंदिर से होकर, अपने बर्जुगों के चरणों में होली के गुलाल के आर्शीवाद पाकर घर-घर जाकर होली गीत गाते हैं। इस दिन का लोगों का बड़ी बेसब्री से इंतजार रहता है। लोग ढोल-नगाड़ों के साथ टोली बनाकर एक गांव से दूसरे गांवो में जाकर एक दूसरे को गुलाल लगाकर होली का त्यौहार मनाते हैं।

फिर शाम को एक जगह पर इकट्ठे होकर फाग जलाते हैं और मिठाई बांटते हैं। वहीं, सोमवार को कुल्लू में छोटी होली का आयोजन किया गया। महंत समुदाय के लोग एकत्रित होकर कुल्लू शहर की प्रक्रिया कर होली उत्सव को मनाया। बुधवार को आखाड़ा बाजार मे बैरागी समुदाय के लोगों ने होली मनाई। युवाओं ने एक-दूसरे को रंग लगाकर होली उत्सव की बधाई दी। इस दौरान बैरागी समुदाय के लोगों ने पारंपारिक गीत गाकर होली का जश्र मनाया।

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