god-goddess journey

आवश्यकता पडऩे पर असुरी शक्तियों से करेंगे युद्ध

आज लोहड़ी की संध्या पर वापस लौटेंगे भूलोक पर

मोहन लाल ठाकुर। बंजार
देवभूमि हिमाचल में देवी-देवताओं की सुबह के भोरकाल से जाने जाने वाले पौष मास में देवी-देवताओं के प्रमुख कार्यों के संपन्न होते ही बंजार क्षेत्र के सभी देवी-देवता स्वर्गलोक की यात्रा पर रवाना हो गए हैं। जो मकर सक्रांति की पूर्व संध्या पर लोहड़ी की शाम को भूलोक पर वापस लौटेंगे। इस पौष माह में देवी-देवताओं के प्रमुख देवकार्यों का निष्पादन होता है। इसमें देव प्रतिष्ठानों व देवरथों की प्रतिष्ठा व आगामी वर्ष में होने वाले देवकार्यों को अंतिम रूप दिया जाता है।

इस पौष माह में इस वर्ष जिभी घाटी के अधिष्ठाता देवता गढ़पति मूल शेषनाग व नरहां के देवता विष्णु नारायण के नवनिर्मित देवरथ की प्रतिष्ठाएं संपन्न हुई हैं। यहां के देवी-देवता हर वर्ष लोहड़ी से नौ, सात, पांच व तीन दिन पूर्व देवताओं के पदानुसार व क्षेत्राधिकारानुसार स्वर्ग लोक की यात्रा पर रवाना होते थे। लेकिन इस वर्ष इन प्रमुख देव कार्यों के चलते पौष माह में दिन बढऩे का आगाज होते ही क्षेत्र के सभी देवी-देवता समय पर स्वर्गलोक की यात्रा पर नहीं जा पाए हैं।

आज शनिवार को लोहड़ी की संध्या को भूलोक पर वापस लौटेंगे

जो लोहड़ी से एक दिन पूर्व शुक्रवार को इस यात्रा पर रवाना हुए हैं और आज शनिवार को लोहड़ी की संध्या को भूलोक पर वापस लौटेंगे। इसके चलते कल मकर सक्रांति से उनके देवालयों में हर वर्ष की भांति एक माह तक विशेष पूजा अर्चना का आगाज फिर से होगा। उल्लेखनीय है कि स्वर्गलोक की यात्रा के दौरान सभी देवी-देवताओं के कपाट, रथ व मोहरे कारकूनों द्वारा विशेष कपड़ों से बंद कर दिए जाते हैं।

माना जाता है कि इस दौरान सभी देवी-देवता स्वर्गलोक में राजा इंद्र की सभा में भाग लेते हैं व भूलोक के उद्धार के लिए रणनीति बनाते हैं और यदि असुरी शक्तियों द्वारा कोई विपति भूलोक के लिए लाई गई है तो उससे निपटने के लिए आवश्यकता पडऩे पर इन असुरी शक्तियों से ये देवी देवता युद्ध भी करते हैं ताकि मानवजाति पर कोई संकट न आ सके। उनके वापस लौटने की खुशी में यहां मकर संक्रांति के दूसरे दिन उनका अवतार समारोह फागुली उत्सव के रूप में मनाया जाता है।

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