biggest hanuman statue

लागत 2.50 करोड़, क्षेत्रफल 1600मीटर

  • 21 जून को होगा अनावरण, विश्व मानचित्र पर अंकित होगा सोलन का लाडो गांव
  • ऊंचाई 156 फीट
  • हनुमान भक्त हैं विश्वविद्यालय के संस्थापक डॉ. राज कुमार राणा

नवीन शर्मा/सोलन

जिला सोलन का लाडो गांव जल्द ही विश्व मानचित्र पर अंकित होने जा रहा है। मानव भारती फाउंडेशन ने यहां अढ़ाई करोड़ रुपये की लागत से हनुमान जी की विश्व की सबसे ऊंची 156 फीट मूर्ति की स्थापना की है। हनुमान जी की इस मूर्ति को केसरी रंग से रंगा जाएगा। खास बात यह है कि 1600 मीटर क्षेत्रफल में निर्मित मूर्ति का चेहरा 21 फीट, हथेली 19 फीट और पांव 26 फीट के होंगे। इसके अलावा हनुमान जी के गले में 20 इंच व्यास की रुद्राक्ष की माला होगी। इस मूर्ति का वजन करीब दो हजार टन है।

ये मूर्ति लगभग बनकर तैयार है और आगामी 21 जून को इस मूर्ति का अनावरण करने की तैयारी है। ट्रस्ट के मुताबिक भगवान हनुमान की प्रतिमा बनाने का जिम्मा पद्मश्री अवार्ड से सम्मानित मशहूर मूर्तिशाला मातूराम आट्र्स सेंटर के मूर्तिकार नरेश कुमार व टीम को दिया गया है। मातूराम आर्ट सेंटर के निदेशक नरेश कुमार ने बताया कि जाखू मंदिर शिमला में हनुमान की 108 फीट ऊंची प्रतिमा का निर्माण भी उन्होंने ही किया है। आर्ट सेंटर ने दुनिया के कई देशों में इस तरह की कई प्रतिमाओं का निर्माण कर विशेष पहचान बनाई है।

इस प्रतिमा में आधुनिक इंजीनियर व पौराणिक शिल्पकारी का नायाब संगम दुनिया के सामने पेश होगा। इस प्रतिमा के निर्माण में विशेष प्रकार की बहुमूल्य सामग्री इस्तेमाल में लाई गई है। इसमें कंक्रीट की परत का इस्तेमाल किया गया है जिससे इसकी उम्र करीब 200 वर्षों से अधिक होगी। उन्होंने इसके लिए सिडनी में इस पर रिसर्च की है। इसके अलावा इस प्रतिमा को भूकंप को ध्यान रखते में हुए भूकंपरोधी बनाया है।

सदियों तक फीकी नहीं होगी चमक

मानव भारती यूनिवर्सिटी परिसर में बनी इस मूर्ति की चमक बरसों बनी रहे, इसके लिए इसे मेटल कोट किया जा रहा है। इसकी विशेषता यह होगी कि मेटल कोटिड होने के कारण मूर्ति पर पक्षी या परजीवी नहीं आ सकेंगे। साथ ही धूप से चमक पर भी कोई असर नहीं होगा। परिंदों को दूर रखने के लिए मूर्ति पर शॉक वेर्वस भी लगाए जा रहे हैं। इससे मूर्ति के नजदीक कोई पक्षी नहीं आएगा। इसके अतिरिक्त मूर्ति में लगी पाइपें बारिश के पानी को बाहर निकालेंगी।

लिम्का बुक में दर्ज होगी सबसे ऊंची मूर्ति

अब तक दुनिया में सबसे ऊंची हनुमान की प्रतिमा आंध्र प्रदेश में स्थापित है जिसकी ऊंचाई 135 फीट है। दुनिया की दूसरी सबसे ऊंची हनुमान की प्रतिमा ओडिशा में स्थापित है जिसकी ऊंचाई 108.9 फीट है। वहीं शिमला व कर्नाटका में भी 108 फीट ऊंची हनुमान की प्रतिमा स्थापित है। इसके बाद महाराष्ट्र में 105 फीट ऊंची हनुमान की प्रतिमा स्थापित की गई है।

मानव भारती में स्थापित की जा रही हनुमान की प्रतिमा दुनिया की जानी-मानी वेबसाइट विकिपीडिया पर जल्द दुनिया में सबसे ऊंची हनुमान की प्रतिमा की श्रेणी में नंबर वन का तगमा हासिल करने वाली है। इसके अलावा इसका नाम लिम्का बुक ऑफ वल्र्ड रिकॉर्ड में भी दर्ज होगा। मानव भारती विश्वविद्यालय ने इसके लिए सारे दस्तावेज तैयार करके भेज दिए हैं। उम्मीद है जल्द लिम्का बुक ऑफ वल्र्ड रिकॉर्ड की टीम इसकी जांच लिए पहुंच सकती है।

धार्मिक पर्यटन को मिलेगा बढ़ावा

इस मूर्ति के बन जाने के बाद मानव भारती यूनिवर्सिटी धार्मिक पर्यटन का एक नया डेस्टिनेशन बनेगा और निसंदेह इससे स्थानीय लोगों को रोजगार भी मिलेगा। मूर्ति के दर्शन के लिए यूनिवर्सिटी के अलग से रास्ता बनाया है, ताकि पर्यटक यहां पर आसानी से दर्शन कर सकें। प्रतिमा को ऐसी जगह स्थापित किया है जहां से यह चंडीगढ़ शिमला राष्ट्रीय मार्ग के साथ-साथ सोलन शहर की तरफ से आने वाली सड़क से दूर से नजर आएगी।

चाइना में दुनिया की सबसे ऊंची प्रतिमा

मातू राम आर्ट सेंटर के निदेशक नरेश कुमार ने बताया कि दुनिया में सबसे ऊंची प्रतिमा भगवान बुद्ध की है। यह प्रतिमा करीबन 502 फीट ऊंची है। उन्होंने बताया कि अब तक वह कैनेडा, हिमाचल व भारत के कई प्रदेशोंं में अलग-अलग कई तरह की मूर्तियां व प्रतिमाएं बना चुके हैं।

हर मंगलवार लगता है भंडारा ….

मानव भारती यूनिवर्सिटी के चेयरमैन डॉ. राज कुमार राणा भगवान हनुमान के भक्त हैं। यूनिवर्सिटी कैंपस में उन्होंने हनुमान जी का मंदिर भी बनवाया है। साथ ही हर मंगलवार को विवि परिसर में भंडारे का आयोजन होता है जिसमें सैकड़ों श्रद्धालु प्रसाद ग्रहण करते है। भंडारा ग्रहण करने न सिर्फ विवि के छात्र बल्कि आसपास के ग्रामीण भी काफी संख्या में विवि पहुंचते है।

पर्यटन बढ़े और लोगों को रोजगार मिले, तब सफल होगी मेरी आराधना : राज कुमार राणा

हिमाचल दस्तक के साथ विशेष बातचीत कर यूनिवर्सिटी के संस्थापक राज कुमार राणा ने बताया कि उनका मकसद अपने आराध्य को यहां स्थापित कर प्रदेश में धार्मिक भावना के साथ पर्यटन को बढ़ावा देना है। उन्होंने बताया कि इसके लिए नि:स्वार्थ भाव से काम करवाया है। इससे जिला से प्रदेश को पर्यटन की दृष्टि से पंख लगते हैं या स्थानीय लोगों को रोजगार मिलता है तो मेरी अराधना व साधना सफल होगी।

डॉ. राणा ने बताया कि 21 जून को मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर से इस मूर्ति का अनावरण करवाने की तैयारी है। इस दिन केंद्रीय मंत्रियों को भी बुलाने का प्रयास किया जा रहा है। उन्होंने बताया कि मानव भारती चैरिटेबल ट्रस्ट ने वर्ष 2014 में मूर्ति के निर्माण का कार्य शुरू किया था। इसका काम मातूराम आर्ट सेंटर दिल्ली को दिया था। इस प्रतिमा को मूर्तिकार पद्मश्री नरेश कुमार ने बनाया है।

हनुमान की उपासना से जीवन के सारे कष्ट, संकट मिट जाते हैं। माना जाता है कि हनुमान एक ऐसे देवता हैं, जो थोड़ी-सी प्रार्थना और पूजा से ही शीघ्र प्रसन्न हो जाते हैं। मंगलवार और शनिवार का दिन इनके पूजन के लिए सर्वश्रेष्ठ है। पढ़ें उनके 108 पवित्र नाम…

1.आंजनेया : अंजना का पुत्र
2.महावीर : सबसे बहादुर
3.हनूमत : जिसके गाल फुले हुए हैं
4.मारुतात्मज : पवन देव के लिए रत्न जैसे प्रिय
5.तत्वज्ञानप्रद : बुद्धि देने वाले
6.सीतादेविमुद्राप्रदायक : सीता की अंगूठी भगवान राम को देने वाले
7.अशोकवनकाच्छेत्रे : अशोक बाग का विनाश करने वाले
8.सर्वमायाविभंजन : छल के विनाशक
9.सर्वबन्धविमोक्त्रे : मोह को दूर करने वाले
10.रक्षोविध्वंसकारक : राक्षसों का वध करने वाले
11.परविद्या परिहार : दुष्ट शक्तियों का नाश करने वाले
12.परशौर्य विनाशन : शत्रु के शौर्य को खंडित करने वाले
13.परमन्त्र निराकर्त्रे : राम नाम का जाप करने वाले
14.परयन्त्र प्रभेदक : दुश्मनों के उद्देश्य को नष्ट करने वाले
15.सर्वग्रह विनाशी : ग्रहों के बुरे प्रभावों को खत्म करने वाले
16.भीमसेन सहायकृथे : भीम के सहायक
17.सर्वदुख: हरा : दुखों को दूर करने वाले
18.सर्वलोकचारिणे : सभी जगह वास करने वाले
19.मनोजवाय : जिसकी हवा जैसी गति है
20.पारिजात द्रुमूलस्थ : प्राजक्ता पेड़ के नीचे वास करने वाले
21.सर्वमन्त्र स्वरूपवते : सभी मंत्रों के स्वामी
22.सर्वतन्त्र स्वरूपिणे : सभी मंत्रों और भजन काआकार जैसा
23.सर्वयन्त्रात्मक : सभी यंत्रों में वास करने वाले
24.कपीश्वर : वानरों के देवता
25.महाकाय : विशाल रूप वाले
26.सर्वरोगहरा : सभी रोगों को दूर करने वाले
27.प्रभवे : सबसे प्रिय
28.बल सिद्धिकर :
29.सर्वविद्या सम्पत्तिप्रदायक : ज्ञान और बुद्धि प्रदान करने वाले
30.कपिसेनानायक : वानर सेना के प्रमुख
31.भविष्यथ्चतुराननाय : भविष्य की घटनाओं के ज्ञाता
32.कुमार ब्रह्मचारी : युवा ब्रह्मचारी
33.रत्नकुण्डल दीप्तिमते : कान में मणियुक्त कुंडल धारण करने वाले
34.चंचलद्वाल सन्नद्धलम्बमान शिखोज्वला : जिसकी पूंछ उनके सर से भी ऊंची है
35.गन्धर्व विद्यातत्वज्ञ : आकाशीय विद्या के ज्ञाता
36.महाबल पराक्रम : महान शक्ति के स्वामी
37.काराग्रह विमोक्त्रे : कैद से मुक्त करने वाले
38.शृन्खला बन्धमोचक : तनाव को दूर करने वाले
39.सागरोत्तारक : सागर को उछल कर पार करने वाले
40.प्राज्ञाय : विद्वान
41.रामदूत : भगवान राम के राजदूत
42.प्रतापवते : वीरता के लिए प्रसिद्ध
43.वानर : बंदर
44.केसरीसुत : केसरी के पुत्र
45.सीताशोक निवारक : सीता के दुख कानाश करने वाले
46.अन्जनागर्भसम्भूता : अंजनी के गर्भ से जन्म लेने वाले
47.बालार्कसद्रशानन : उगते सूरज की तरह तेजस
48.विभीषण प्रियकर : विभीषण के हितैषी
49.दशग्रीव कुलान्तक : रावण के राजवंश का नाशकरने वाले

50.लक्ष्मणप्राणदात्रे : लक्ष्मण के प्राण बचाने वाले
51.वज्रकाय : धातु की तरह मजबूत शरीर
52.महाद्युत : सबसे तेजस
53.चिरंजीविने : अमर रहने वाले
54.रामभक्त : भगवान राम के परम भक्त
55.दैत्यकार्य विघातक : राक्षसों की सभी गतिविधियों को नष्ट करने वाले
56.अक्षहन्त्रे : रावण के पुत्र अक्षय का अंत करने वाले
57.कांचनाभ : सुनहरे रंग का शरीर
58.पंचवक्त्र : पांच मुख वाले
59.महातपसी : महान तपस्वी
60.लन्किनी भंजन : लंकिनी का वध करने वाले
61. श्रीमते : प्रतिष्ठित
62.सिंहिकाप्राण भंजन : सिंहिका के प्राण लेने वाले
63.गन्धमादन शैलस्थ : गंधमादन पर्वत पार निवास करने वाले
64.लंकापुर विदायक : लंका को जलाने वाले
65.सुग्रीव सचिव : सुग्रीव के मंत्री
66.धीर : वीर 67.शूर : साहसी
68.दैत्यकुलान्तक : राक्षसों का वध करने वाले
69.सुरार्चित : देवताओं द्वारा पूजनीय
70.महातेजस : अधिकांश दीप्तिमान
71.रामचूडामणिप्रदायक : राम को सीता का चूड़ा देने वाले
72.कामरूपिणे : अनेक रूप धारण करने वाले
73.पिंगलाक्ष : गुलाबी आँखों वाले
74.वार्धिमैनाक पूजित : मैनाक पर्वत द्वारा पूजनीय
75.कबलीकृत मार्ताण्डमण्डलाय : सूर्य को निगलने वाले
76.विजितेन्द्रिय : इंद्रियों को शांत रखने वाले
77.रामसुग्रीव सन्धात्रे : राम और सुग्रीव के बीच मध्यस्थ
78.महारावण मर्धन : रावण का वध करने वाले
79.स्फटिकाभा : एकदम शुद्ध
80.वागधीश : प्रवक्ताओं के भगवान
81.नवव्याकृतपण्डित : सभी विद्याओं में निपुण
82.चतुर्बाहवे : चार भुजाओं वाले
83.दीनबन्धुरा : दुखियों के रक्षक
84.महात्मा : भगवान
85.भक्तवत्सल : भक्तों की रक्षा करने वाले
86.संजीवन नगाहर्त्रे : संजीवनी लाने वाले
87.सुचये : पवित्र 88.वाग्मिने : वक्ता
89.दृढव्रता : कठोर तपस्या करने वाले
90.कालनेमि प्रमथन : कालनेमि का प्राण हरने वाले
91.हरिमर्कट मर्कटा : वानरों के ईश्वर
92.दान्त : शांत 93.शान्त : रचना करने वाले
94.प्रसन्नात्मने : हंसमुख
95.शतकन्टमदापहते : शतकंट के अहंकार को ध्वस्त करने वाले
96.योगी : महात्मा
97.रामकथा लोलाय : भगवान राम की कहानी सुनने के लिए व्याकुल
98.सीतान्वेषण पण्डित : सीता की खोज करने वाले
99.वज्रद्रनुष्ट: वज्र से दानव और दुष्टों को मारने वाले
100.वज्रनखा : वज्र की तरह मजबूत नाखून
101.रुद्रवीर्य समुद्भवा : भगवान शिव का अवतार
102.इन्द्रजित्प्रहितामोघब्रह्मास्त्र विनिवारक : इंद्रजीत के ब्रह्मास्त्र के प्रभाव को नष्ट करने वाले
103.पार्थ ध्वजाग्रसंवासिने : अर्जुन के रथ पार विराजमान रहने वाले
104.शरपंजर भेदक : तीरों के घोंसले को नष्ट करने वाले
105.दशबाहवे : दस भुजाओं वाले
106.लोकपूज्य : ब्रह्मांड के सभी जीवों द्वारा पूजनीय
107.जाम्बवत्प्रीतिवर्धन : जाम्बवत के प्रिय
108.सीताराम पादसेवक : भगवान राम और सीता की सेवा में तल्लीन रहने वाले

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