army recruitment

2 साल से कभी ऊना, तो कभी पांवटा-बिलासपुर हो रही भर्ती

हिमाचल दस्तक ब्यूरो। शिमला
मंडी, कुल्लू और लाहौल-स्पीति जिलों के युवा सेना में भर्ती के लिए प्रदेश के अन्य जिलों के खाक छान रहे हैं। पिछले दो साल से सेना मंडी भर्ती कार्यालय के दायरे में भर्तियां नहीं कर रही है और युवकों को भर्ती के लिए कभी ऊना, कभी पांवटा तो कभी बिलासपुर जाना पड़ रहा है। इस बार भर्ती ऊना में है। इस कारण इन उपरोक्त तीन जिलों के युवाओं का समय और पैसा बर्बाद हो रहा है। गौरतलब है कि प्रदेश में सेना के चार भर्ती कार्यालय चिन्हित हैं।

इनमें एक मंडी, दूसरा पालमपुर, तीसरा हमीरपुर और चौथा शिमला में है। आसपास के जिले इन्हीं चार कार्यालयों से जोड़े गए हैं, ताकि भर्ती के लिए युवकों को दूर न जाना पड़े। साल में सामान्य तौर पर दो बार भर्ती होती है। दो साल पहले मंडी के पड्डल मैदान के उपलब्ध न होने को आर्मी ने कारण बताया था। इसके बाद अब स्टाफ की कमी का हवाला दिया जा रहा है, जबकि सेना भर्ती के लिए स्टाफ कम होने का सवाल ही पैदा नहीं होता।

इस बारे में ब्रिगेडियर खुशाल ठाकुर से जब बात की गई तो उनका कहना है कि सेना भर्ती के लिए स्टाफ हमेशा उपलब्ध रहता है, खासकर पीस टाइम में। अब ये भारत सरकार को कारण बताना चाहिए कि मंडी, कुल्लू और लाहौल के युवाओं से इतना खर्चा बाहर का क्यों करवाया जा रहा है?

सांसद रामस्वरूप ने रक्षा मंत्री से उठाया मामला

इस मामले को मंडी से भाजपा सांसद रामस्वरूप शर्मा ने भारत सरकार के रक्षा मंत्री से उठाया है। हालांकि अब तक इसका कोई हल नहीं निकल पाया है। रामस्वरूप ने कहा कि जब रक्षा मंत्री का कार्यभार अरुण जेटली के पास था, तब उन्होंने एक पत्र इस बारे में लिखा था। अब नई रक्षा मंत्री निर्मला सीतारमन से भी वह इस बारे में बात करेंगे, ताकि इस विवाद का हल हो सके।

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