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प्रधानों पंचायतों में 50 हजार से ऊपर के कार्यो को ई टेंडरिंग से करवाये जाने किया विरोध

ललित ठाकुर । पधर

विकास खंड द्रंग की पंचायत समिति सभा कक्ष में पंचायती राज मंहासंघ द्रंग खंड के प्रधानो ने एक बैठक का आयोजन किया गया। बैठक की अध्यक्षता पंचायती राज महासंघ द्रंग के अध्यक्ष ओम प्रकाश ठाकुर ने की । बैठक में द्रंग खण्ड के सभी प्रधानो ने भाग लिया। बैठक में सभी प्रधानों ने हिमाचल सरकार द्वारा पंचायत में 50 हजार से ऊपर के सभी कार्यों को इ- टेंडरिंग से करवाये जाने का विरोध किया है और जय राम सरकार से इस नीति पर पुर्नविचार करने की मांग की है। प्रधानों का मानना है कि इ- टेंडरिंग से सरकार ठेकेदारों को फाइदा देना चाहती है। इससे स्थानीय जनता को रोजगार का अवसर नहीं मिलेगा।

उन्होंने कहा कि एक तरफ सरकार सभी लोंगों को रोजगार देने की बड़ी बड़ी बाते करती है और दूसरी तरफ रोजगार एक ही ठेकेदार को देने की नीति बना रही। सरकार की यह दोहरी नीति पंचायत प्रधानों को नामंजूर है। प्रधानों ने कहा कि पंचायत के विकास कार्यों में उसी पंचायत के लोंगों जैसे मिस्त्री , मजदूर , सटरिंग , टिपर , और आम आदमी को भी रोजगार मिलता है। इन विकास कार्यों में उसी पंचायत के 25-30 लोंगों को प्रत्यक्ष/परोक्ष रोजगार मिलता है जो पंचायती राज की मूल भावनाओं के अनुकूल है।

प्रधानों ने कहा की एक टेक्नीकल व ग्राम रोजगार सेवक तीन तीन पंचायतों में काम कर रहे हैं

जबकि सरकार की नई नीति इस भावना के प्रतिकूल है। प्रधानों ने रोष प्रकट करते हुए कहा कि पंचायती राज मंत्री ने जो बयान दिया है कि 14वें वितायोग का पैसा पंचायतें खर्च नहीं कर पा रही है लेकिन ऐसा नही है। प्रधानों ने कहा कि हकीकत यह है कि सरकार के पास कर्मचारियों की कमी है सरकार पहले दफ्तरों में कर्मचारी भरें उसके बाद प्रधानों को दोष दें।

प्रधानों ने कहा की एक टेक्नीकल व ग्राम रोजगार सेवक तीन तीन पंचायतों में काम कर रहे हैं। जिससे की कार्य करने में ज्यादा परेशानी आ रही है। प्रधानों ने मांग की है की हर पंचायत में एक सचिव, एक टेक्नीकल, एक ग्राम रोजगार सेवक हो ताकि विकास कार्यों को जल्द किया जा सके।

प्रधानों ने कहा कि एक साल तक 14वें वितायोग की सेल्फ अप्रुबल नहीं होती है। जबकि 14वें वितायोग ने ग्राम सभा को सर्वोपरि मान कर राशि ग्राम सभा के माध्यम से खर्च करने का निर्णय लिया था। इस से विकास कार्यों में हर नागरिक की सहभागिता होती थी। पंचायत प्रधानो ने मुख्यमंत्री से मांग की है कि जिस तरह से पहली बार जीतकर विधायक को पेंशन मिलती है उसी तरह से प्रधानों को भी पेंशन मिलनी चाहिए । क्योंकि विधायक भी लोगो की सेवा के लिए होता है और प्रधान भी।

विधयाक अगर एक बार भी बनता है तो उसे पेंशन मिलती है। लेकिन प्रधान 25 साल तक रहा हो उसे किसी तरह की कोई पेंशन, स्वस्थ्य व अन्य किसी प्रकार की कोई सुविधा नहीं मिलती है। प्रधानों ने चेतावनी देते हुए कहा कि अगर मुख्यमंत्री जय राम ठाकुर व पंचायती राज मंत्री वीरेन्द्र कँवर अगर हमारी इन मांगों को नहीं मानते है और इ- टेंडरिंग के इस फैसले को वापिस नहीं लेते है तो प्रधान आने वाले दिनों में किसी भी तरह का आंदोलन करने से कोई गुरेज नहीं करंगें। जिसका खमयाजा सरकार को भुगतना होगा। इस आपात कालीन बैठक में खंड के 25 प्रधानों ने हिस्सा लिया।

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