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Manimahesh Yatra के तहत शिव चेलों ने डल तोडऩे की परंपरा का किया निर्वहन

हिमाचल दस्तक,भरमौर।। पवित्र Manimahesh Yatra के तहत राधाष्टमी के पवित्र स्नान से पहले संचूई के शिव चेलों ने डल तोडऩे की सदियों से चली आ रही परंपरा का निर्वहन किया। भगवान कार्तिक स्वामी की अनुमति मिलते ही शिव चेले डल में उतर गए और भोले नाथ के जयकारों के साथ इसे आर-पार कर गए।

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इस नजारे को देखने के लिए सोमवार से लेकर मंगलवार तीन बजे तक पवित्र डल झील पर हजारों की तादाद में शिवभक्तों की भीड़ उमड़ी। शिव चेलों द्वारा डल को तोडऩे की रस्म निभाते ही राधा अष्टमी का स्नान आरंभ हो गया है। गौरतलब है कि 15 अगस्त को जन्माष्टमी के पावन अवसर पर उत्तरी भारत की प्रसिद्ध मणिमहेश यात्रा का आगाज हुआ था, जिसके बाद से यहां पर लगातार यात्रियों के आने का क्रम जारी है।

शिव चेलों की उनके बैठने के स्थान पर यात्रियों ने की मालिश

इसी कड़ी में राधाष्टमी पर होने वाले पवित्र स्नान से पहले सोमवार को हड़सर के गौरी-शंकर मंदिर से संचूई के शिव चेले डल झील पर पहुंचे। इस दौरान शिव चेलों की उनके बैठने के स्थान पर यात्रियों ने मालिश की, जिसके पश्चात डल झील में बलि के रूप में नारियल चढ़ा कर इस रस्म की अदायगी की गई। इस दौरान भगवान कार्तिक स्वामी के गूर ने डल पर मौजूद शिव चेलों को डल झील में उतरने का इशारा किया। अलबत्ता देखते ही देखते संचूई के शिव चेले डल झील को आर-पार कर गए। इस दौरान डल झील पर मौजूद हजारों श्रद्धालुओं ने इस नजारे को देखा और समस्त घाटी भगवान भोले नाथ के जयकारों से गूंज उठी।

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