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धूमल के बयान के मायने तलाशने लगे कई भाजपाई

सुरेंद्र कटोच। हमीरपुर

आखिर सुरेश चंदेल की कांग्रेस में जाने की कहानी कहां लिखी गई? कुछ तो जरूर ऐसा रहा होगा जो चाह रहा था कि चंदेल भाजपा में न रहे। यह ऐसे प्रशन बनकर सामने आने लगे हैं, जिनका जबाब अब कई भाजपाई तलाशने लगे हैं। यह सवाल पूर्व मुख्यमंत्री प्रेम कुमार धूमल द्वारा दिए गए बयान के बाद खड़ा हो रहा है।

धूमल के बयान के आखिर क्या मायने हैं? जबकि मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर और सतपाल सिंह सत्ती कह रहे हैं कि चंदेल के जाने से कोई फर्क नहीं पड़ेगा, जबकि धूमल कह रहे कि नुकसान तो होता है। इस बात की चर्चा भाजपा में चलने लगी है कि चंदेल के जाने की पटकथा कहीं पहले ही तो नहीं लिखी जा चुकी थी। इस बात का चंदेल को भी अहसास तक नहीं होने दिया। स्वंय चंदेल का मानना है कि उनके प्र्रति सरकार व पार्टी का अलग सा व्यवहार उनके लिए पहेली बन गया है।

बताते चलें कि चंदेल के कांग्रेस में जाने को लेकर उस समय चर्चाएं सामने आने लगीं जब सरकार में बोर्डो-निगमों में ताजपोशियां पूरी हो गई और चंदेल का कहीं नाम नहीं आया। उस समय से टिकट के लिए दिल्ली में डेरा डालने तक प्रदेश भाजपा में किसी ने चंदेल से बात नहीं की। जब केंद्रीय हाईकमान ने हस्तक्षेप किया तब प्रदेश की तरफ से प्रयास हुआ, जो केवल औपचारिक ही लगा।

सूत्रों की मानें तो धूमल नहीं चाहते थे कि ऐसे वक्त में चंदेल पार्टी छोड़ें, लेकिन चंदेल की मानें तो उन्हें केवल लोकसभा के कार्य में लगाने के अलावा मान-सम्मान के लिए बात ऊपर करने पर ही तय होना बताया जा रहा था। एक ओर भाजपा चारों सीटें जीतने का दावा कर रही है। ठीक चुनावों के समय शिमला संसदीय क्षेत्र से महेंद्र नाथ सोफत को लिया गया है, लेकिन संसदीय क्षेत्र हमीरपुर से सुरेश चंदेल के जाने पर कोई ज्यादा महत्व न देना पूर्व में ही लिखी जा चुकी पटकथा की ओर इशारा करती है।

उर्मिल को वापस लेगी भाजपा!

उधर वर्ष 2014 के चुनावों में सुजानपुर उप चुनाव के समय टिकट कटने नाराज चल रही पूर्व विधायक उर्मिल ठाकुर की घर वापसी पर अभी कुछ क्लीयर नहीं है। इससे पहले भी उर्मिल की वापसी जिला एवं प्रदेश हाईकमान के बीच लटकती रही। उनका भाजपा में वापस आने की खबरें विधानसभा चुनावों से चल रही है। गत वर्ष दिसंबर में उनकी वापसी पर प्रेम कुमार धूमल ने भी हरी झंडी दी थी, लेकिन तब यह तर्क दिए जाते रहे कि जिला वालों ने उनका निष्कासन नहीं किया, बल्कि प्रदेश से निष्कासन हुआ है और अब उनकी वापसी भी प्रदेश स्तर पर ही होगी।

दूसरी ओर जिला से तर्क दिया गया कि पहले आवेदन जिला में आना चाहिए। अब मामला यहां तक पहुंच गया है कि जिला से प्रस्ताव प्रदेश हाईकमान को भेजा जा चुका है। इस संदर्भ में प्रदेशाध्यक्ष सतपाल सत्ती का कहना है कि शीघ्र ही उनकी घर वापसी हो जाएगी, लेकिन होगी कब? यह साफ नहीं किया।

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