News Flash
mobile phone

बच्चों के शारीरिक और मानसिक विकास पर गहरा असर

गुरुदत्त चौहान। पांवटा साहिब
डब्ल्यूएचओ का कहना है कि 5 साल से कम उम्र के बच्चों का निर्धारित समय से ज्यादा स्क्रीन टाइम उनके शारीरिक और मानसिक विकास पर सीधा असर डालता है। डब्ल्यूएचओ हाल ही में जारी की गई रिपोर्ट में 5 साल से कम उम्र के बच्चों का स्क्रीन टाइम निर्धारित कर दिया है।

आज के दौर में इलैक्ट्रोनिक डिवाइसेस हमारी जिंदगी का अहम हिस्सा बन गई हैं। फिर चाहे वे पेरेंट्स हों या बच्चे। बच्चों को व्यस्त रखने के लिए माता-पिता अकसर उनके हाथ में फोन थमा देते हैं या फिर उन्हे टीवी के सामने बैठा देते हैं। ऐसे में कई बार माता-पिता इस बात का ध्यान तक नहीं देते कि बच्चा क्या देख रहा है और कितनी देर से स्क्रीन के सामने है।

शहरी जीवन शैली में बच्चों का खेलकूद, भाग-दौड़ कम होती जा रही है। बच्चे ज्यादा से ज्यादा समय घर की चार दिवारी के अंदर इलैक्ट्रोनिक गैजेट्स के साथ बिताते हैं।

इसका प्रभाव लंबे समय के बाद देखने को मिलता है। 2 साल के बच्चों को कार्टून देखना पसंद है, चाहे वह किसी भी भाषा में हो। बिहान की मां मनीषा बताती हैं कि बिहान हिन्दी, इंगलिश और स्पैनिश के कार्टून देखती है और उसी भाषा में बात करने की कोशिश करती है। वह दिन में 2 से 3 घंटे स्क्रीन के सामने रहता है।

बीजा देवी बताती हैं कि जब घर में मेहमान आते हैं या जब वह काम में बहुत ज्यादा व्यस्त रहती हैं तब वे एबी को फोन में कार्टून लगा कर दे देती हैं। उन्होंने बताया कि शुरुआत में वह ज्यादा समय के लिए को फोन दे देती थीं, लेकिन जब उन्होंने देखा कि एबी बिना फोन के खाना नहीं खा रही है, तो उन्होंने धीरे-धीरे उसके स्क्रीन टाइम को कम कर दिया। वह कोशिश करती हैं कि एबी को स्क्रीन से ज्यादा समय प्लेग्राउंड में बिताए। उनका कहना है कि आज के समय में बच्चों को पूरी तरह से मोबाइल फोन से दूर नहीं रखा जा सकता, लेकिन अगर बच्चों को फोन से दूर करना है तो उसके लिए पेरेंट्स को बच्चों को दूसरे खेलों में व्यस्त रखना चाहिए।

विश्व स्वास्थ संगठन यानी ने हाल ही में जारी की गई रिपोर्ट में 5 साल से कम उम्र के बच्चों का स्क्रीन टाइम निर्धारित कर दिया है।

अब तक लोगों का सिर्फ ये मानना था कि स्क्रीन के सामने ज्यादा समय बिताने से आंखें खराब होती हैं लेकन, डब्ल्यूएचओ की इस रिपोर्ट के मुताबिक इसके परिणाम ज्यादा खतरनाक हैं। 5 साल से कम उम्र के बच्चों का निर्धारित समय से ज्यादा स्क्रीन टाइम उनके शारिरिक और मानसिक विकास पर सीधा असर डालता है । इस रिपोर्ट के जरिए डब्ल्यूएचओ ने माता-पिता या अभिभावक को बच्चों को मोबाइल फोन, टीवी स्क्रीन, लैपटॉप और अन्य इलैक्ट्रोनिक उपकरणों से दूर रखने की हिदायत दी है।

स्थानीय डॉक्टर भी सही मानते हैं डब्ल्यूएचओ गाइडलाइंस :

पांवटा सिविल अस्पताल के इंचार्ज व आंखों के विशेषज्ञ डॉ. संजीव सहगल बताते हैं कि बच्चों के मानसिक और शारिरिक विकास के लिए बातचीत बहुत जरुरी है। 5 साल से कम उम्र के बच्चों कानेक्टिव स्किल विकसित नहीं हो पाती है । इसका मतलब ये है कि बच्चे सही और गलत में फर्क नहीं कर सकते। वे जो देखते हैं वही सीखते हैं।

कई बार देखा गया है कि बच्चे कार्टून की तरह ही बोलने की कोशिश करते हैं। कई पेरेंट्स ये शिकायत लेकर भी आते हैं कि बच्चे बहुत ज्यादा एग्रेसिव हो रहे हैं। अकसर पेरेंट्स बच्चों को खाना खिलाने के लिए भी टीवी के सामने बैठा देते हैं या फिर फोन में कुछ न कुछ लगा कर दे देते हैं। ये बहुत ही गलत प्रेक्टिस है। ऐसे में बच्चों का ध्यान बट जाता है और वे भूख से ज्यादा खाना खा लेते हैं।

Career Counsling

Get free career counsling and pursue your dreams