Mock Drill Una

घायलों की मदद के लिए नहीं बढ़ाए हाथ

बिल्डिंग क्षतिग्रस्त होने से एक की मौत व 53 घायल

हिमाचल दस्तक, चंद्रमोहन चौहान। ऊना

दिन वीरवार, स्थान राजकीय महाविद्यालय कॉलेज, समय सुबह के 8 बजकर 45 मिनट।

कॉलेज की बिल्डिंग का एक हिस्सा क्षतिग्रस्त होने से सॉयरन बजा तो सभी अलर्ट हो गए। अचानक आई आपदा में बिल्डिंग में पढ़ाई कर रहे सैंकड़ो छात्र फंस गए। सूचना मिलते ही पुलिस, आर्मी और प्रशासन सहित आलाधिकारी मौके पर पहुंच गए। जहां आर्मी व पुलिस के जवान ने संयुक्त रूप से बिल्डिंग के फंसे छात्रों को बचाने के लिए मॉक ड्रिल शुरू कर दी। वहीं इस भारी आपदा में प्रशासन के बड़े अधिकारी मूकदर्शक बने रहे। हैरत तो तब हुई जब कॉलेज प्रशासन के प्राचार्य सहित प्रोफेसर भी किसी छात्र की मदद बजाय एक किनारे खड़े होकर तमाशबीन बने रहे।

बिल्डिंग से बच्चों की हेल्प मी व चीखो-पुकार की आवाजें गुंज रही थी। आर्मी के जवान तो स्ट्रेचर, कंधो पर व रस्सियों की मदद से छात्रों से बाहर निकालने में जुट रहे। आर्मी द्वारा कैंपस में तैयार किए टैंट में घायलों को पहुंचाया गया, जहां पर आर्मी के डॉक्टर सहित क्षेत्रीय अस्पताल के डॉक्टरों ने घाययों का प्राथमिक उपचार किया। जहां से गंभीर रूप से घायलों को क्षेत्रीय अस्पताल ऊना भी रेफर किया गया।

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आपदा के कारण ऊना कॉलेज में शिक्षा ग्रहण करने पहुंचे एक छात्र की मौत हो गई, जबकि 53 छात्र घायल हुए हैं। इनमें 42 छात्र व 11 छात्राएं शामिल रही। करीब डेढ़ से दो घंटे तक चले मॉक ड्रिल में आर्मी, पुलिस व डॉक्टर मदद के लिए हाथ बढ़ा रहा था, लेकिन जिला के बड़े प्रशासन अधिकारियों ने किसी भी छात्र या पुलिस जवान की मदद के लिए अपने हाथ आगे नहीं बढ़ाए। आर्मी द्वारा बनाया गए टैंट किनारे खड़े होकर अधिकारी घायल बच्चों को ही देखते रहे। हैरानगी तो इस बात कि रही कि भरी गर्मी के बीच चल रहे मॉक ड्रिल में कॉलेज प्रशासन ने मौके पर मौजूद होने के बावजूद कोई मदद नहीं की और न ही छात्रों की मदद कर रहे जवानों के लिए पानी का इंतजाम किया।

भले ही कॉलेज में रिहर्सल के तहत मॉक ड्रिल का आयोजन किया गया था। अगर हकीकत में इस तरह की कोई आपदा आती, तो क्या तब भी जिला के बड़े अधिकारी व कॉलेज प्रशासन मूकदर्शक बना रहता है। चाहिए यह था कि जिला के बड़े अधिकारियों सहित कॉलेज स्टॉफ को भी भारी आपदा में छात्रों की मदद के लिए आगे आए।

मॉक ड्रिल में दिखी खामियां

वहीं दूसरी ओर हमीरपुर रोड़ पर स्थित नंदा अस्पताल में भी वीरवार सुबह 9 बजकर 20 मिनट पर आई आपदा पर डीसी संदीप कुमार, एसपी दिवाकर शर्मा व डीएसपी ऊना अशोक वर्मा सहित राहत टीम मौके पर पहुंच गई। करीब डेढ़ घंटे तक चले रैस्क्यू में काफी खामियां देखने को मिली।

जहां पर दूसरी मंजिल से उतार रहे घायलों के लिए लगाई गई सीढ़ी की सेटिंग नहीं ठीक बैठी। इसको लेकर डीसी व एसपी ने भी उचित दिशा-निर्देश दिए। सीढ़ी को ठीक करने में 20 से 25 मिनट लग गए। सीढ़ी ठीक न होने पर मरीज को पहले बिल्डिंग से नीचे उतारा गया। नंदा अस्पताल में आई आपदा के दौरान कुल 10 मरीज घायल हुए।

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