solid waste

शिवालिक सॉलिड वेस्ट प्लांट दभोटा से 650 उद्योगों ने किया था करार

  • कुछ गिने-चुने उद्योगों को छोड़कर अन्य बड़े-छोटे उद्योगों का कचरा भी जीरो
  • प्रदूषण विभाग और एनजीटी से बचने को उद्योगों ने खेला सॉलिड वेस्ट से करार का खेल

ओम शर्मा। बीबीएन
ठोस कचरा प्रबंधन और पर्यावरण को बचाने के उद्देश्य से दभोटा में सरकार द्वारा करोड़ों की लागत से स्थापित शिवालिक सॉलेड वेस्ट मैनेजमेंट पर्यावरण का ही भक्षक बन गया है। इस ठोस कचरा प्रबंधन संयंत्रण की आड़ में बीबीएन के बेलगाम उद्योग पर्यावरण का विनाश कर रहे हैं। दिखाबे के लिए उद्यमियों ने करार किया और बाद में सरकार, प्रदूषण विभाग और एनजीटी की आखों में धूल झोंक दी। करार के बावजूद उद्योगों ने ठोस कचरा इस संयंत्रण तक नहीं पहुंचाया। बीबीएन में छोटे-बड़े उद्योगों की संख्या लगभग 2200 के करीब है।

इसमें से 650 से अधिक छोटे बड़े उद्योगों ने सरकार द्वारा स्थापित शिवालिक सॉलेड वेस्ट प्लांट से ठोस कचरा देने का करार किया था। इसके तहत 650 उद्योग शिवालिक वेस्ट संयंत्र से लिस्टिड हुए और उद्योगों ने ठोस कचरा देने तय किया था। यह फार्मा व अन्य बड़े-छोटे उद्योगों से निकलने वाला वह ठोस कचरा था, जिसका निष्पादन सिर्फ उचित तरीके से ही किया जा सकता है। उद्योगों ने सरकार, प्रदूषण विभाग तथा एनजीटी के पचड़ों से बचने के लिए करार तो कर लिया, लेकिन कुछ समय बाद उद्योगों को हर माह भरी जाने वाली फीस चुभने लगी।

650 लिस्टिड उद्योगों में आज 250 से अधिक उद्योगों का कचरा जीरो हो चुका है

पहले तो 4-5 वर्षों तक कई उद्योग शिवालिक वेस्ट प्लांट दभोटा को ठोस कचरा देते रहे। कुछ वर्षों बाद इन उद्योगों का कचरा जीरो हो गया। पहले कचरा दे रहे उद्योगों द्वारा कुछ वर्षों बाद कचरा न देना उद्यमियों की पर्यावरण को लेकर चिंता और सोच को प्रमाणित करता है। उद्योगों ने सरकार, प्रदूषण कंट्रोल बोर्ड व एनजीटी के शिकंजे से बचने के लिए ठोस कचरा देने का करार तो कर लिया लेकिन कुछ समय बाद शिवालिक सॉलेड प्लांट में कचरा देना बंद हो गया।

650 लिस्टिड उद्योगों में आज 250 से अधिक उद्योगों का कचरा जीरो हो चुका है। अन्य उद्योगों की ठोस कचरा देने की मात्रा में भी भारी गिरावट आई है। इसके चलते आज यह ठोस कचरा क्षेत्र के खाली व सुनसान स्थानों, नदी-नालों और खेती योग्य भूमि के आसपास ठिकाने लगाया जा रहा है।

अंधेरे में फेंका जाता है जानलेवा वेस्ट

बीबीएन में बेलगाम उद्योगों द्वारा सॉलिड वेस्ट को ठिकाने लगाने के लिए ठेकेदार हायर किए गए हैं। जो टै्रक्टरों व बंद बॉडी वाहनों में कचरा भरकर रात को उद्योगों से निकालते हैं। इसके बाद उस हानिकारक कचरे को नदी नालियों में ठिकाने लगाने के बाद आग लगा दी जाती है।

23 लोहा व बड़े उद्योग ने किया था करार

वर्ष 2008 से दभोटा में स्थापित शिवालिक सॉलेड वेस्ट मैनेजमेंट के साथ 23 लोहा व बड़े उद्योगों लिस्टिड हुुए। इन उद्योगों से हानिकारक सल्ज निकलता है, जिसका निष्पादन सयंत्र भी ही सही ढंग से हो सकता है। आज की स्थिति हैरान करने वाली है। 23 में से 16 उद्योगों का सल्ज और ठोस कचरा आज 0 हो चुका है। जो उद्योग ठोस कचरा दे भी रहे हैं उनकी मात्रा में भी भारी गिरावट आई है। उद्यमियों को हर माह फिस देना चुभने लगा और कचरा बंद हो गया।

पहले के मुकाबले बीबीएन के उद्योगों द्वारा दिए जाने वाले ठोस कचरे की मात्रा में गिरावट आई है। कई उद्योगों ने कुछ साल बाद ठोस कचरा देना बंद कर दिया। शिवालिक सॉलिड वेस्ट संयंत्र के पीछे सरकार का मकसद बीबीएन को प्रदूषण मुक्त रखना था। उद्यमियों ने कभी पर्यावरण के प्रति गंभीरता नहीं दिखाई। इसके चलते आज सैकड़ों उद्योगों में से गिने चुने उद्योग ही ठोस कचरे का सही तरीके से निष्पादन कर रहे हैं।
-अशोक कुमार, सीईओ शिवालिक सॉलेड वेस्ट मैनेजमेंट

ठोस कचरे का सही तरीके से निष्पादन न हो पाना पर्यावरण के लिए बुरा संदेश है। प्रदूषण विभाग ने बीते रोज ही पर्यावरण से जुड़े कई ज्वलंत मुद्दों पर उद्योग संघों व सरकारी एजेंसियों के साथ मंथन किया है। जो उद्योग ठोस कचरे का गैर जिम्मेदाराना तरीके से निष्पादन कर पर्यावरण को नुकसान पहुंचा रहे हैं उन पर शिकंजा कसा जाएगा। -बृज भूषण, एक्सईएन, प्रदूषण कंट्रोल बोर्ड बद्दी।

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