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कांग्रेस छोड़ भाजपा में आए दीपा बनेंगे अब चेयरमैन

बहुमत साबित करने के दिन तक गायब रह सकते हैं पार्षद

सतीश शर्मा। बीबीएन
नगर परिषद बद्दी के चेयरमैन मदन चौधरी यदि अपने वादे पर अडिग रहते तो आज उन्हें यह दिन न देखना पड़ता। उनके विश्वास पात्र माने जाने वाले पार्षद नरेंद्र दीपा उनके खिलाफ बगावत करके भाजपा के साथ मिल गए हैं, जिससे चेयरमैन की कुर्सी पूरी तरह से डगमगा गई है। नरेंद्र दीपा को यदि उपाध्यक्ष बना दिया जाता तो आज वह चेयरमैन पद की दौड़ में कभी नहीं आ सकते थे। बताते चलें कि नप बद्दी के नौ पार्षदों में से पांच कांग्रेस के थे, जिससे दून के पूर्व विधायक चौधरी राम कुमार के बड़े भाई मदन लाल चौधरी चेयरमैन के पद पर काबिज हो पाए थे।

उसी दौरान यह तय हुआ था कि चारों पार्षद बारी-बारी से उपाध्यक्ष बनेंगे ताकि सभी को उपाध्यक्ष का तगमा मिल सके, लेकिन मोनिका कौशल तीन वर्षों तक उपाध्यक्ष पद पर जमीं रहीं, जिससे किसी एक कांग्रेसी पार्षद को तो उपाध्यक्ष पद किसी भी सूरत में नहीं मिल सकता था और जाहिर है कि उसकी नाराजगी कांग्रेस पर भारी पड़ सकती थी और हुआ भी यही, मोनिका कौशल के त्यागपत्र के बाद बंत सिंह को उपाध्यक्ष बनाने पर चर्चा की जा रही थी, जबकि नरेंद्र दीपा चाहते थे कि उन्हें उपाध्यक्ष बनाया जाए।

चेयरमैन मदन चौधरी भी पूरा प्रयास करेंगे कि उनकी कुर्सी सलामत रहे

इसी बीच पार्षद व एडवोकेट संदीप सचदेवा ने अपनी अहम भूमिका निभाते हुए विधायक परमजीत सिंह और जल प्रबंधन बोर्ड के उपाध्यक्ष दर्शन सिंह को अपनी रणनीति से अवगत करवाया। हालांकि कई भाजपा नेताओं ने संदीप सचदेवा का मजाक भी उड़ाया, क्योंकि यह तय था कि नरेंद्र दीपा कभी भाजपा में शामिल होंगे ही नहीं। संदीप सचदेवा की तरकीब काम कर गई और नरेंद्र दीपा भाजपा में शामिल हो गए। अब नरेंद्र दीपा चेयरमैन की दौड़ में शामिल हो गए हैं।

इस घटनाक्रम से यह साफ हुआ है कि यदि चेयरमैन अपने वादे पर अडिग रहते और मोनिका कौशल का निर्धारित समय पर त्यागपत्र ले लेते तो आज उन्हें इस संकट की घड़ी से न गुजरना पड़ता, क्योंकि अब इतना समय नहीं बचा है कि सभी पार्षदों को उपाध्यक्ष बनाया जा सके। इसी का फायदा भाजपा ने उठाया और कांग्रेसी पार्षद को अपने पाले में कर लिया।

निश्चित है कि अब वही पार्षद नरेंद्र दीपा नप बद्दी के चेयरमैन बनेंगे और यदि भाजपा ने किसी दूसरे पार्षद को चेयरमैन बनाने की कोशिश की तो नरेंद्र की घर वापसी भी हो सकती है। चेयरमैन मदन चौधरी भी पूरा प्रयास करेंगे कि उनकी कुर्सी सलामत रहे, लेकिन अब यह समझा जा रहा है कि सभी भाजपा के पार्षद भूमिगत हो जाएंगे और उसी दिन सामने आएंगे, जब चेयरमैन को बहुमत साबित करना होगा।

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