New disclosed in poor pipe purchase

फैक्टरी में ही हो गया था इन पाइपों पर सारा खेल,  गुणवत्ता जांच एजेंसी खुद चुनी थी निर्माता फर्म ने ,  स्वतंत्र निरीक्षण एजेंसी के चयन पर भी उठे हैं सवाल

हिमाचल दस्तक ब्यूरो। शिमला: आईपीएच विभाग मेें हुई घटिया पाइप खरीद मामले में नया खुलासा हुआ है। अब तक हुई जांच में जो तथ्य सामने आए हैं, उनसे पता चला है कि यह सारा खेल फैक्टरी में पाइप बनाती बार ही हो गया था।

पाइपों के उत्पादन के समय इनकी गुणवत्ता जांच के लिए तीन एजेंसियां भारत सरकार ने अधिकृत की थीं। इनमें आरआईटीईएस, वैपकॉस लिमिटेड और एसजीएस एजेंसियां शामिल थीं। इनमें से एक एजेंसी का चयन पाइप निर्माता फर्म ने खुद किया। अब तक जांच में यहां तक सूचना है कि इन एजेंसियों का खर्चा भी पाइप निर्माता फर्मों ने ही उठाया। पाइप निर्माण प्रक्रिया में एक स्वतंत्र निरीक्षण का भी प्रावधान है। इसके लिए 5 एजेंसियां पहले से इंपैनल हैं। इनमें से भी एजेंसी के चयन खुद किया गया है, जो कई संशय पैदा कर रहा है।

इन पाइपों की क्वालिटी इतनी खराब है कि पाइप मोडऩे और डाई से चूडिय़ां निकालते समय टूट जा रहे हैं। यह खरीद करीब 100 करोड़ रुपये की है, जो सिविल सप्लाई निगम के माध्यम से हुई है। आईपीएच मंत्री ने इस मामले में चार चीफ इंजीनियरों को जांच दी है। तब तक इन पाइपों का इस्तेमाल रोक दिया गया है। संबंधित फर्मों का भुगतान बंद कर दिया है और इन्हें सारे पाइप रिप्लेस करने को कहा गया है।
हमीरपुर और मंडी जोन में चीफ इंजीनियर सैनी, शिमला जोन में चीफ इंजीनियर बीएस राणा और धर्मशाला जोन में चीफ इंजीनियर एचपी सिंह जांच कर रहे हैं । पाइप के टुकड़े लैब में भेजे गए हैं और इनकी रिपोर्ट का इंतजार है। जिन पाइपों की गुणवत्ता खराब होने की शिकायतें आई हैं, वे 15 से 150 एमएम के हैं।

ब्लैकलिस्ट होंगी सप्लायर कंपनियां

आईपीएच मंत्री महेंद्र सिंह ने कहा कि अभी तक इस मामले में जांच रिपोर्ट नहीं आई है, लेकिन सारा मामला वक्तव्य के जरिए उन्होंने विधानसभा में रख दिया है। इस मामले में ढील जिस भी स्तर पर रही हो, लेकिन जो भी दोषी होगा, उसके खिलाफ कार्रवाई होगी। विभाग ने सभी पाइपों को रिप्लेस करने के लिए संबंधित फर्मों को कह दिया है। जांच रिपोर्ट यदि सत्र के बीच ही आ गई, जो ये भी सदन में रख दी जाएगी।

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