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NGT ने NHIA व फोरलेन कंपनी से मांगा राइट ऑफ वे प्लान

  • प्रशासन व कंपनी से पूछा कैसे हो नुकसान की भरपाई
  • फोरलेन विस्थापित समिति ने दायर की याचिका

हिमाचल दस्तक ब्यूरो। बिलासपुर
NGT ने निर्माणाधीन कीरतपुर नेरचौक फोरलेन सड़क मार्ग पर हो रहे पर्यावरण से छेड़छाड़ न डंपिग साईट से जुडे मुद्दों पर कड़े तेवर अपनाए हैं। एनजीटी ने गत 20 दिसंबर 2017 को नई दिल्ली में हुई सुनवाई के दौरान पारित आदेशों में NHIA व सड़क निर्माण से जुड़ी कंपनी से राईट आफ वे प्लान को पूरा ब्यौरा तलब करने को कहा है। कि इस सड़क मार्ग निर्माण में कहां-कहां इससे निकलने वाले मलबे को ठिकाने लगाया जाना तय है अथवा नहीं।

इसके अलावा NGT ने इस फोरलेन सड़क निर्माण के कारण होने वाली डंपिंग से लोगों को होने वाले नुकसान की भरपाई पर NHIA तथा जिला प्रशासन से भी जवाब मांग कर पूछा है कि इससे होने वाले नुकसान की भरपाई होगी। NGT ने अपने आदेशों में कहा कि कोई भी व्यक्ति, संस्था इस संबंध में न्यायालय की शरण में जा सकता है कि जिसकी जमीन पर बिना अनुमति सड़क निर्माण से संबंधित मलबा गिराया गया है। तथा जिससे नुकसान हो रहा है।

कीरतपुर नेरचौक फोरलेन सड़क मार्ग का निर्माण कार्य पिछले लगभग चार पांच वर्षों से चल रहा है

फोरलेन सड़क निर्माण कार्य का मलबा इसके साथ लगती जमीन, साथ लगती गोविंद सागर झील, वन भूमि अथवा में गिराया गया है। इस तरह के आरोप अक्सर पहले से ही फोरलेन कंपनी पर लगते रहे हैं। हालांकि इस मामले पर पहले दो तीन NGT के निर्देशों पर गठित टीमें दौरा भी कर चुकी हैं। कीरतपुर नेरचौक फोरलेन सड़क मार्ग का निर्माण कार्य पिछले लगभग चार पांच वर्षों से चल रहा है। जिसके चलते फोरलेन कंपनी पर पहले से लोगों की जमीनों पर मलब को डंप करने के आरोप लगे हैं।

हालांकि फोरलेन कंपनी अक्सर इससे निकलने वाले मलबे को इसी के बीच प्रयोग करने का हवाला देती रही है। बिलासपुर की फोरलेन प्रभावित विस्थापित समिति भी इस मुद्दे को पिछले काफी वर्षों से सरकार, जिला प्रशासन के समक्ष उठा रही है लेकिन बाद में सरकार व प्रशासन के सुस्त रवैये के चलते समिति को NGT की शरण में जाना पड़ा।

NGT ने मांगा है जवाब : मदन लाल

बिलासपुर की फोरलेन प्रभावित विस्थापित समिति के महासचिव एवं याचिका कर्ता मदन लाल शर्मा का कहना है कि NGT ने गत 20 दिसंबर 2017 को नई दिल्ली में हुई सुनवाई के दौरान पारित आदेशों में NHIA व सड़क निर्माण से जुड़ी कंपनी से राईट आफ वे प्लान को पूरा ब्यौरा मांगा है। समिति इस आंदोलन को अंतिम छोर तक लड़ेगी। ताकि फोरलेन प्रभावित विस्थापितों को न्याय मिल सके।

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