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No break of Praveen Sharma in election management

1993 से लगातार 10 चुनावों की कर चुके हैं मैनेजमेंट,  संगठन की ओर से हर जिम्मेदारी को बखूबी निभाया

राजीव भनोट। ऊना : हिमाचल प्रदेश में चुनाव लडऩा या चुनावों का प्रबंधन करना बड़ा मसला है। लेकिन चुनाव प्रबंधन के मामले में प्रवीण शर्मा का कोई तोड़ नहीं है। 1993 से अब तक 10 चुनावों का प्रबंधन कर  चुके हैं।

हालांकि प्रवीण शर्मा ऊना जिले के चिंतपूर्णी विधानसभा क्षेत्र से हैं, लेकिन ऊना, हमीरपुर और बिलासपुर हलके की नब्ज को बेहतर तरीके से जानते हैं। उन्होंने खुद भी 2 चुनाव लड़े हैं। इनमें एक बार जीत मिली और धूमल सरकार में मंत्री भी रहे। भारतीय जनता पार्टी ने समय-समय पर प्रवीण शर्मा के चुनाव प्रबंधन की महारत को भुनाया और अधिकतर सफल ही रहे। प्रवीण शर्मा एक कुशल प्रशासक और प्रबंधक तो हैं ही, इससे भी बड़ी बात उनकी अपनी पार्टी के प्रति निष्ठा की है।

प्रवीण शर्मा को दो बार भाजपा ने टिकट दिया, इसमें उनका जीत प्रतिशत 50 फीसदी रहा। इसके बाद भाजपा की अंदरूनी राजनीति के चलते उन्हें भाजपा का टिकट नहीं मिला। इस पर भी प्रवीण शर्मा ने कोई विरोध नहीं दिखाया और पार्टी में बने रहकर कुशल प्रबंधन के बलबूते अपनी प्रवीणता का लोहा मनवाया।

प्रवीण शर्मा भाजपा के साथ जुड़े रहे। उन्हें संगठन की ओर से जो भी जिम्मेदारी दी गई, उसे बखूबी निभाया।प्रदेश भाजपा नेतृत्व में बेहतरीन नेताओं में प्रवीण शर्मा की गणना होती है और अब वर्तमान में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के चहेतों में भी उनको गिना जाता है। अब की बार लोकसभा चुनाव में उन्हें हमीरपुर संसदीय क्षेत्र का चुनाव प्रभारी बनाया गया है।

प्रोफाइल

1975 में एबीवीपी के सक्रिय कार्यकर्ता रहे और आरएसएस से जुड़े।
1993 में भाजपा के महामंत्री बने।
1998 में 3 उपचुनावों में अपनी प्रतिभा का लोहा मनवाया।
 2004 के बाद लगातार 3 संसदीय क्षेत्रों के चुनाव में प्रभारी रहे।
 2012 व 2017 के विधानसभा चुनाव प्रबंधन समिति के अध्यक्ष रहे। 2017 में विस चुनाव प्रबंधन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
 2019 के लोकसभा चुनाव में हमीरपुर संसदीय क्षेत्र के प्रभारी हैं।

“कभी भी पार्टी से कोई मांग नहीं की। पार्टी के निष्ठावान सिपाही के रूप में अपनी सेवाएं दी हैं। जब-जब भी कोई जिम्मेदारी लगाई है, उसे पूरा किया है। मुझे प्रसन्नता है कि अधिक चुनावों में प्रबंधन का दायित्व संभालने का मौका मिला। सभी नेताओं व संगठन के साथ टीम वर्क के चलते सफलता मिलती रही है। “
-प्रवीण शर्मा, पूर्व मंत्री।

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