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Not only the uniform, not even bought a school bag laptop

स्कूली बच्चों के सामान की खरीद समय पर नहीं कर पाई सरकार, अब स्कूल वर्दी का टेंडर रद करने के लिए तलाशे जा रहे हैं बहाने, लैपटॉप पर अब बात तक नहीं, स्कूल बैग का टेंडर तक नहीं हुआ

हिमाचल दस्तक ब्यूरो। शिमला : राज्य सरकार इस साल न केवल स्कूली बच्चों की वर्दी, बल्कि मेधावी छात्राओं एवं अन्य को निशुल्क दिया जाने वाला सामान भी नहीं खरीद पाई। इसमें वर्दी के अलावा स्कूल बैग, बोर्ड टॉपर्स के लैपटॉप और छात्राओं की सेनिटरी नेपकिन शामिल हैं।

शिक्षा विभाग ने सिविल सप्लाई निगम के माध्यम से वर्दी की खरीद करनी थी। 8.24 लाख छात्र-छात्राओं के लिए तीन साल की यह वर्दी करीब 174 करोड़ में खरीदी जा रही है, लेकिन चार महीने तक टेंडर प्रक्रिया को लटकाने के बाद अब इसे रद करने के बहाने तलाशे जा रहे हैं। पिछले एक हफ्ते से अब यह आधार नहीं मिल रहा है कि टेंडर को रद कैसे करें, क्योंकि शिक्षा विभाग ने इस खरीद पर आगे बढऩे की सिफारिश कर दी है। इस देरी के कारण शीतकालीन स्कूलों के बच्चों को इस साल निशुल्क वर्दी मिल ही नहीं पाई।

यही हाल स्कूल बैग और छात्राओं के सेनिटरी नेपकिन का है। सीएम ने बजट घोषणा की थी कि जमा दो तक की सभी छात्राओं को सैनिटरी नैपकिन पैकेट वर्तमान में 5 प्रति पैकेट से घटाकर 1 प्रति पैकेट की दर से उपलब्ध कराए जाएंगे। इन्हें आशा कार्यकर्ताओं द्वारा वितरित किया जाएगा। इसके लिए 4 करोड़ का बजट प्रावधान भी किया गया। लेकिन इन्हें कब कौन खरीदेगा, यह अब तक तय नहीं है।

बजट घोषणा पर भी समय पर खरीद नहीं

मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर ने वर्दी के साथ ही बजट घोषणा की थी कि वर्दी स्कीम के तहत ही अब पहली, तीसरी, छठी तथा नौवीं कक्षा के विद्यार्थियों को एक स्कूल बैग भी दिया जाएगा। यह स्कूल बैग इन चार कक्षाओं के बच्चों को दिया जाना था। लेकिन इसके अभी टेंडर तक नहीं हुए। इसकी स्पेसिफिकेशन की फाइल ठंडे बस्ते में ही पड़ी है। विभाग के बार बार आग्रह के बाद भी फैसला नहीं हुआ।

दृष्टिपत्र के वादे पर भी शिक्षा विभाग चुप

भाजपा ने अपने चुनाव घोषणा पत्र यानी दृष्टिपत्र में वादा किया था कि स्कूल के साथ साथ प्रथम श्रेणी वाले मेधारी कॉलेज के छात्र-छात्राओं को भी लैपटॉप या टेबलेट देंगे। इसके साथ ही हर महीने 1 जीबी इंटरनेट डाटा देने का भी वादा था। इससे पहले शिक्षा विभाग में 10वीं और 12वीं के बोर्ड टॉपर्स को ही लैपटॉप दिए जा रहे थे। लेकिन इन्हें कौन खरीदेगा, यह भी तय नहीं।

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