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Occupational farming changed the fate of Ramesh Sharma of Jamariadis

जमराडिय़ों के किसान रमेश शर्मा विशेषज्ञों की सलाह पर रहे खेती , खेतों में उगा रहे बरसाती प्याज, करेला, लौकर, चुुकंंदर मूली,हरा धनिया

कमल शर्मा। शाहतलाई  : शाहतलाई जंहा परंपरागत किसान खेती छोड़ कर अपनी उपजाऊ जमीन को बंजर बनाने पर तुले हुए हैं वंही क्षेत्र के किसान को मिले परामर्श से अब बंजर जमीन भी सोना उगलने लगी है। ऐसा ही मामला ग्राम पंचायत घंडीर के गांव जमराडियां मे देखने को मिला।

जंहा आजकल किसान व्यवसायिक खेती करके अपने क्षेत्र में एक मिशाल पैदा कर दी है। गौरतलब है कि ग्राम पंचायत घंडीर के गांव जमराडियां के निवासी रमेश शर्मा का कहना है कि एक छोटे से परामर्श ने आज उनकी तकदीर ही बदल दी । जिस कारण उन्हें एक अलग पहचान मिली। रमेश शर्मा ने बताया कि उनके गांव के चारों ओर घना जंगल होने के कारण हर समय जंगली जानवरों का बसेरा बना हुआ था। जिसके कारण खेतों मे बीजी गई फसलों को उजाडऩे मे कोई कसर नहीं छोडते थे, जब हम सदियों से ही गेहूं और मक्की की फसलों तक ही सिमित थे । जबकि अन्य फ सलों के बारे में कभी सोचा ही नहीं मगर इन फसलों पर से आमदनी कम जबकि खर्चा अधिक आता था । इसी बजह से उन्होंने अपनी उपजाऊ जमीन पर खेती करने का दायरा कम कर दिया।

हालांकी खेती से जुडें रहने के लिए कृषि विभाग व कृषि विज्ञान केंद्रों के विशेषज्ञों के शिविरों में जाकर मिली जानकारी से उन्हें एक बार फिर से खेती करने के लिए मजबूर होना पडा। जिसका नतीजा मिला कि जो किसान अपनी उपजाऊ जमीन पर खेती करने का दायरा कम दिया था आज उसी जमीन पर कम लागत से अधिक मुनाफा कमा कर मालामाल हो गया है। रमेश शर्मा का कहना है कि जब उपर वाले की मेहरबानी होती तो हर मुश्किल भी आसान हो जाती है।उन्होंने बताया कि इस गांव मे सिंचाई की कोई भी व्यवस्था नहीं थी ,पर कृषि विभाग के सौजन्य से व पंचायत प्रतिनिधियों के प्रयत्नों से यहां पर जायका की स्कीम मिलने से गांव मे सिंचाई सुविधा मिली।

इसके पश्चात उन्होंने कृषि विभाग के माध्यम से एक पोली हाउस लगाया और सब्जियों का काम किया लेकिन थोड़ा बहुत मुनाफा होने लगा।इतना ही नहीं । बल्कि रमेश शर्मा ने बताया कि सब्जियों में लगी बिमारियों के कारण कृषि विज्ञान केंद्र बरठीं के सब्जी विशेषज्ञ डाक्टर रविंद्र कुमार से हुई मुलाकात ने खेती को नई दिशा ही दे दी । उन्होंने बताया उस वक्त धीरे धीरे कृषि विज्ञान केंद्र के अन्य विशेषयज्ञो जैसे कि डॉक्टर संजय दालों व तिलहन, डाक्टर वर्मा बिमारियों के विशेषज्ञों के परामर्श के अनुसार अन्य किसान ने भी करने का मन मना लिया है।जिसका परिणाम आज देखने को मिल रहा है।

उन्होंने बताया कि सब्जी विशेषज्ञ डॉक्टर रविंद्र कुुमार ने उन्हें बरसाती प्याज, करेला, लौकर, चुुकंंदर मूली,हरा धनिया सहित अन्य सब्जियांं उगाने के लिए प्रेरित किया। रमेश शर्मा ने बताया कि उन्होंने कृषि विज्ञान केंद्र से मिले परामर्श के पश्चात उन्होंने वीते तीन चार वषों से प्याज,धनिया, मैथी, अजवाइन,तिल,मास,रौंगी,देशी मसर,हरहर,दालें खेती करके बाजार से नही खरीदे बल्कि बाजार में बेच रहे हैं।इतना ही नहीं बल्कि साल प्याज की दो फसलें ले रहे हैं।

रमेश शर्मा ने बताया कि इस से पूर्व उन्होंने लुधियाना ; पंजाब में भी हौजिरी काम किया। उसके पश्चात उन्होंने ने फिर क्षेत्र में भी हौजिरी का काम किया लेकिन मुनाफा होने के बजाय कर्ज बढता गया लेकिन बिशेषज्ञों के परामर्श ने उनकी तकदीर ही बदल और उन्हें नई पहचान मिली।उन्होंने प्रदेश सरकार के मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर से मांग की है कि वह छोटे छोटे किसानों के लिए करीब सतर व अस्सी फ ीसदी पर अनुदान देकर बोरवैल लगवाएं ताकि किसान अपनी आमदनी को दुगना कर सके।

 

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