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प्रशासनिक ट्रिब्यूनल ने सुनाया फैसला, पेंशन देने के भी निर्देश

हेल्थ सुरवाइजर के तबादले पर भी रोक

हिमाचल दस्तक । सरकाघाट 

बिजली बोर्ड के कर्मचारियों को पक्का करने को पेंशन देने के आदेश हिमाचल प्रदेश प्रशासनिक ट्रिब्यूनल के सदस्य डीके शर्मा ने मंडी सर्किल के दौरान कुलवंत सिंह गांव धार जिला हमीरपुर  व रोशन लाल गांव बालक रूपी जोगिंद्रनगर की याचिकाओं पर बिजली विभाग को आदेश दिए कि उन्हें 10 वर्ष की दैनिक सेवा पूरा करने पर पक्का किया जाए तथा पेंशन की पात्रता पूरा करने पर उन्हें 2004 तथा 2005 से पेंशन भी दी जाए।

गौरतलब है कि प्रार्थियों ने यह याचिका अपने वकील  के माध्यम से इसलिए दायर की थी कि वह बिजली बोर्ड में वर्ष 1979 तथा 1981 से बतौर दैनिक भोगी कार्यरत थे। बिजली बोर्ड ने उन्हें सितंबर 1997 में नियमित किया तथा दोनों वर्ष 2004  तथा 2005 में सेवानिवृत्त हो गए थे।  जिस पर ट्रिब्यूनल ने उन्हें 10 वर्ष की दैनिक भोगी सेवा के बाद नियमित करने तथा हाई कोर्ट द्वारा दी गई व्यवस्था के अनुसार उन्हें पेंशन भी देने के आदेश दिए।

एक अन्य फैसले में मेल हेल्थ सुपरवाइजर कमल किशोर के तबादले पर भी रोक लगा दी । प्रार्थी ने यह याचिका इसलिए दायर की थी कि उसे प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र कोट से सब सेंटर चबूतरा (हमीरपुर)बदल दिया था, जबकि उसकी सेवानिवृत्ति में मात्र 15 महीने बाकी थे जिस पर ट्रिब्यूनल ने प्रार्थी के तबादले पर रोक लगा दी तथा प्रार्थी को एक सप्ताह के भीतर डायरेक्टर हेल्थ के प्रतिवेदन देने के आदेश दिए है ।

श्रेणी सुधार वर्ष को माना जाए उत्तीर्ण वर्ष

बेरोजगार शास्त्री संघ ने उठाई मांग, चुनाव बहिष्कार का ऐलान

सुंदरनगर। वीरवार को सुंदरनगर में बेरोजगार शास्त्री संघ की बैठक संपन्न हुई। बैठक की अध्यक्षता संघ के प्रधान रोशन लाल शर्मा ने की। बैठक में उपस्थित सभी सदस्यों ने अपने-अपने विचार रखे। बैठक में श्रेणी सुधार का विषय छाया रहा। सदस्यों ने इस बात पर जोर दिया कि श्रेणी सुधार वर्ष को उत्तीर्ण वर्ष न मानकर उत्तीर्ण वर्ष को ही बैच वर्ष माना जाए। उन्होंने कहा कि संघ के सदस्य कई बार मुख्यमंत्री वीरभद्र से मिलकर ज्ञापन सौंप चुके हैं, लेकिन हर बार मात्र आश्वासन ही मिला।

संघ के सदस्यों ने इस बात पर जोर दिया कि सरकार ने हमारी मांगों को नहीं माना, इसलिए संघ के सभी सदस्यों ने हिमाचल विधानसभा चुनाव में मतदान न करने का फैसला लिया है। उन्होंने कहा कि प्रदेश में वर्ष 2009 से पूर्व लगभग 12,000 शास्त्री है, जिसमें से 10,000 के करीब सभी ने श्रेणी सुधार किया, जिनकी उम्र 40 वर्ष के पार हो चुकी है। इसलिए श्रेणी सुधार वर्ष को उत्तीर्ण वर्ष न मानकर उत्तीर्ण वर्ष को ही बैच वर्ष माना जाए।

 

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