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पंचायतों के प्रधानों ने भी सरकार के खिलाफ खोला मोर्चा

ललित ठाकुर । पधर

पंचायतों में ई टेंडरिंग के खिलाफ द्रंग खंड के बाद अब सदर खंड की पंचायतों के प्रधानों ने भी सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। पंचायत प्रधानों ने हिमाचल सरकार द्वारा पंचायत में 50 हजार से अधिक राशि के बजट के सभी कार्यों को इ- टेंडरिंग से करवाए जाने की नीति का कड़ा विरोध किया। संघ ने मुख्यमंत्री जय राम ठाकुर से इस नीति पर पुर्नविचार करने की मांग की है। पंचायत प्रधानों का सीधा आरोप है कि ठेकेदारों को लाभान्वित करने के लिए इ टेंडरिंग प्रक्रिया पंचायतों में शुरू की जा रही है।

सरकार की यह नीति पंचायत प्रधानों को कतई मंजूर नही है।

सदर खंड की ग्राम पंचायत रोपा चैहटीगढ़ के प्रधान प्रेम ठाकुर, कपिल ठाकुर झिड़ी, दलीप ठाकुर नागधार, हेम सिंह टिहरी, नुप राम कटौला, हरि सिंह सेगली, रीता देवी कमांद, हेत राम नवलाय, प्रेम सिंह मैहनी, कौशल्या देवी नगवाई और शारदा शर्मा ग्राम पंचायत टकोली की प्रधान ने कहा कि पंचायती राज मंत्री का पंचायतों द्वारा चौदहवां वित्त आयोग का बजट खर्च न कर पाने का बयान सरासर गलत है। जबकि लगभग नब्बे फीसदी पैसा पंचायतें खर्च कर चुकी है। जो दस फीसदी के करीब आउटस्टैंडिंग है, वह इन कारणों से है कि समय पर सीमेंट और क्रेटवायर आदि की सप्लाई नही मिलती। क्रेटवायर एग्रो इंडस्ट्री से लिए जाते हैं। जहां कई बार 6-6 महीने तक क्रेट नही मिलते हैं।

दूसरा सरकार के पास कर्मचारियों की कमी है। एक टेक्नीकल और ग्राम रोजगार सेवक तीन तीन पंचायत में काम कर रहे हैं। इससे विकास कार्य प्रभावित हो रहे हैं। प्रधानों ने मांग की है की हर पंचायत में एक सचिव, एक टेक्नीकल, एक ग्राम रोजगार सेवक हो ताकि विकास कार्यों का मूल्यांकन समय समय पर हो।

उन्होंने कहा कि एक साल तक 14वें वितायोग की सेल्फ अप्रूवल नही होती है।

14वें वितायोग ने ग्राम सभा को सर्वोपरि मान कर राशि ग्राम सभा के माध्यम से खर्च करने का निर्णय लिया था। जिससे विकास कार्यों में हर नागरिक की सहभागिता होती थी। पंचायत प्रधानों ने मुख्यमंत्री से मांग की है कि जिस तरह से विधायकों को पेंशन सुविधा का प्रावधान है, उसी तर्ज पर पंचायत प्रधानों को भी पेंशन का प्रावधान चाहिए।

एक बार विधायक बनने पर ताउम्र पेंशन प्रावधान है, जबकि पचीस प्रधान रहने बावजूद किसी तरह की कोई पेंशन, स्वस्थ्य और अन्य किसी प्रकार की कोई सुविधा नहीं मिलती। प्रधानों ने चेतावनी देते हुए कहा कि अगर मुख्यमंत्री जय राम ठाकुर और पंचायती राज मंत्री वीरेंद्र कंवर इ- टेंडरिंग के फैसले को वापिस नहीं लेते हैं तो पंचायत प्रधान सरकार के खिलाफ किसी भी तरह का आंदोलन करने से कोई गुरेज नहीं करंगें। जिसका खामियाजा आने वाले समय मे सरकार को भुगतना पड़ सकता है।

पंचायतों के प्रधानों का ये है आरोप

पंचायतें एमएलए, एमपी हैड के तहत मिलने वाली एक लाख और दो लाख रुपए की बजट राशि से रकम से अधिक का कार्य करती हैं। जिसका साल दर साल ऑडिट होता है। ई टेंडरिंग के तहत बाहर के जिला का ठेकेदार दूसरे जिला की पंचायत में कार्य ले सकता है। उस ठेकेदार को उस पंचायत से क्या हित होगा। आईपीएच, पीडब्ल्यूडी और हाउसिंग बोर्ड में कई कार्य सालों से लटके हुए हैं। जबकि कई ठेकेदार आधा अधूरा कार्य को छोड़ देते हैं। वहां सरकार बजट खर्च करने का मसला क्यों नही उठाती।

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