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रोहतांग टनल लाएगी लाहौलवासियों के जीवन में बहार

केलांग-मनाली के बीच रह जाएगा मात्र दो घंटे का सफर

मोहन लाल रेलिंग्पा। केलांग
लाहौल वासियों का सपना जल्द साकार होने जा रहा है। समुंद्रतल से 3080 मीटर की उंचाई पर बनने वाला 8.9 किलोमीटर सुरंग के दोनो छोर को मिला दिया गया है। 6 महीने तक बर्फ की कैद काटने वाले लाहुली अब खुली हवा में सांस लेंगे। नार्थ तथा साऊथ पोर्टल के दोनों छोर को मिलाने की खुशी में लाहुली समाज 27 अक्तूबर को सिस्सू में जश्न मना रही है। डेढ़ साल बाद जब रोहतांग सुरंंग व मनाली लेह मार्ग बारह मासी हो जाएंगे, तब लाहुल में चौतरफा विकास की गंगा बहेगी।

क्यों पलायन करते हैं लाहौल के लोग

लाहुल में वर्तमान में परिस्थितियां लोगों के लिए काफी मुश्किलें पैदा करने वाली है। दर्द देने वाली यातायात सुविधा, जर्जर सड़कें, सीमित भूमि, सीमित कार्य अवधि, लघु व मध्यम उद्योगों का न होना, लचर संचार सुविधा, चिकित्सा सुविधाओं की भारी किल्लत, किसी तकनीकी कॉलेज व अंग्रेजी स्कूल का न होना व अविकसित अधारभूत ढांचे सहित अन्य समस्याओं के कारण लाहुलियों को पलायन करने को मजबूर करते हैं।

बाहरी लोग करेंगे यहां पर निवेश

डेढ़ साल बाद न केवल स्थानीय उद्यमी, बल्कि बाहरी लोग भी यहां के लोकल संसाधनों पर अधारित, अनछुए इलाकों में निवेश करने को उत्साहित व लालायित होंगे। सभी प्रकार के लघु व मध्यम औद्योगिक इकाइयों, होटल निर्माण तथा अन्य पारंपारिक एवं गैर पारंपारिक व्यवसायियों को स्थापित करने के लिए ऊर्जा का भी दोहन अति आवश्यक है। लाहुल की भौगोलिक परिस्थितियां जल विद्युत विकास के लिए अनुकुल मानी गई है तथा भविष्य में भी सभावनाओं से परिपूर्ण है।

टनल बनने के बाद ऐसा होगा लाहौल का परिदृश्य

टनल खुलने के तुरंत बाद यहां के लोगों का जीवन, बाहरी लोगों से मेल मिलाप, रहन-सहन तथा रोजमर्रा की जरुरतों में क्रांतिकारी बदलाव आएंगे। घाटी के स्थानीय उद्यमी एवं शिक्षित बेरोजगार, बागवानी एवं खेती से उपलब्ध संसाधनों पर अधारित छोटे-मोटे उद्योग स्थापित करेंगे तथा घाटी में पर्यटकों की आवाजाही के चलते, होटलों के निर्माण कार्य शुरु होते ही स्वरोजगार के नए-नए अवसर सृजित होंगे।

केलांग-मनाली के बीच रह जाएगा मात्र दो घंटे का सफर

रोहतांग टनल के बनने से लाहुल कुल्लू की दूरियां मिट जाएगी। मनाली से केलांग मात्र दो घंटे का सफर रह जाएगा। गौर हो कि वर्तमान में मनाली से केलांग के लिए 5 घंटे का समय लगता है। सामारिक दृष्टि से महत्वपूर्ण मनाली-लेह मार्ग की दूरी घटने से चीन की सीमाओं तक रसद एवं गोला बारुद पहुंचाने में समय की बचत होगी। चीन की सीमाओं तक शीघ्र पहुंचने के लिए रेलवे तथा शिंकुला जोत में 5 किमी लंबी सुरंग प्रस्तावित है।

 

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