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कहा, आया राम-गया राम की राजनीति ठीक नहीं

हिमाचल दस्तक ब्यूरो। मंडी
मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर ने शुक्रवार को कहा कि अनिल शर्मा को भाजपा ने पूरा सम्मान दिया है। अनिल शर्मा को टिकट देने के साथ उन्हें कैबिनेट मंत्री बनाया गया। पंडित सुखराम अपने पोते के लिए भी टिकट मांग रहे थे जो संभव नहीं था। उन्होंने कहा कि भाजपा एक ही परिवार के उत्थान के लिए नहीं बल्कि पूरे प्रदेश के हित को मद्देनजर रखकर प्रत्येक कार्य करती है। मुख्यमंत्री शुक्रवार को सिराज विधानसभा क्षेत्र के देवधार में भाजपा कार्यकर्ताओं को संबोधित कर रहे थे।

सीएम ने कहा कि देश में आया राम-गया राम’ वाली जैसी राजनीति उचित नहीं है। इससे समाज में राजनीतिज्ञों के बारे में गलत संदेश जाता है। उन्होंने कहा कि कांग्रेस पार्टी के वरिष्ठ नेता वीरभद्र सिंह भी मानते हैं कि वर्तमान प्रदेश भाजपा सरकार ईमानदारी से लोगों की सेवा कर रही है। लेकिन पंडित सुखराम इस बात को नकारते हुए अलग राह पर चल रहे हैं, क्योंकि पंडित सुखराम अपने पूरे परिवार को सत्ता सुख दिलाना चाहते हैैं। जयराम ठाकुर ने कहा कि जनता ने तय कर लिया है कि केंद्र में फिर से मजबूत नेतृत्व वाली सरकार बनाई जाएगी। देश को केवल नरेंद्र मोदी ने ही मजबूत नेतृत्व दिया है। मोदी सरकार ने जनकल्याण के लिए कई योजनाएं शुरू की हैं।

उन योजनाओं से हिमाचल के भी लाखों परिवार लाभान्वित हुए हैं। उन्होंने कहा कि नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारत ने नई ऊंचाईयों को पार किया है। मुख्यमंत्री ने विश्वास जताया कि प्रदेश के चारों संसदीय क्षेत्रों से इस बार भाजपा की ऐतिहासिक जीत होगी।

इस्तीफा मांगो, मैं तैया : अनिल शर्मा

मंडी। बेटे या भाजपा के पक्ष में प्रचार के मसले को लेकर अनिल शर्मा ने एक बार फिर गेंद सीएम के पाले में डाल दी है। हालांकि यह स्थिति ज्यादा दिन चलने वाली नहीं है। क्योंकि भाजपा अनिल पर चुनाव मैदान में उतरने का निरंतर दबाव बना रही है। पार्टी ने तो समय आने पर उचित एक्शन लेने की बात भी कह दी है। ऐसे में हिमाचल दस्तक के एक सवाल के जवाब में ऊर्जा मंत्री अनिल शर्मा ने कहा कि चुनाव प्रचार में जाने के संदर्भ में उनका स्टैंड पहले जैसा ही है।

उन्होंने कहा कि यदि उनकी वजह से सीएम की पोजिशन खराब हो रही है तो वह इस्तीफा देने को तैयार हैं। वह उनसे इस्तीफा मांग सकते हैं। वह आज भी भाजपा में हैं। उन्होंने कहा ‘मैने काम किया है और काम करने में ही विश्वास रखता हूं।’ उन्होंने कहा कि परिवार और राजनीति अपनी जगह है। स्वयं पर परिवार के दबाव बारे एक सवाल के जवाब में अनिल ने कहा कि वह बिना दबाव के राजनीति करते आए हैं। मेरी ज्यादा महत्वाकांक्षा नहीं होती। इसलिए वह अपना काम राजनीति से हटकर कर रहे हैं।

बेशक आजकल राजनीति के अजीब मोड़ पर खड़े हैं। एक ओर बेटा है और उसका राजनीतिक करियर और दूसरी ओर भाजपा है जिसने उन्हें मंत्री पद भी दिया है। अनिल शर्मा की स्थिति ऐसी है कि न वह बेटे की ओर से चुनाव में कूद पा रहे हैं और परिवार की बेडिय़ां उन्हें पार्टी का प्रचार करने से भी रोक रही हैं। चुनावी युद्व की पीड़ा उन्हें धर्मसंकट में डाले हुए है। वह भाजपा और परिवार दोनों ओर से दबाव झेल रहे हैं। इन हालात में अनिल ने स्वयं को चुनाव प्रचार से दूर रखने में ही भलाई समझी है।

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