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सुखराम व कौल सिंह लिए अग्निपरीक्षा का समय

हिमाचल दस्तक । मंडी
विधानसभा चुनाव का परिणाम प्रदेश में बदलाव लाए या फिर सरकार को रिपीट करे, मगर इतना तो तय है कि मंडी जिले में दो परिवारों के राजनीतिक भविष्य को यह जरूर तय कर देगा। 1998 के बाद लगभग 20 साल बाद पंडित सुखराम व ठाकुर कौल सिंह एक-दूसरे के खिलाफ आकर खड़े हो गए हैं। 1998 में जब सुख राम ने हिविकां बनाकर पूरे प्रदेश में टेलीफोन की घंटी बजा दी थी उस समय कौल सिंह वीरभद्र सिंह के साथ चट्टान की तरह खड़े होकर उनका विरोध कर रहे थे।

सुखराम 2004 में कांग्रेस में लौट आए तो फिर से वीरभद्र सिंह के खास हो गए जबकि कौल सिंह धीरे-धीरे उनसे छिटकने लगे। अब फिर से स्थितियां बदली हैं। सुखराम परिवार भाजपा में चला गया तो कौल सिंह फिर से वीरभद्र सिंह के नजदीक जाते नजर आ रहे हैं। इसका लाभ कौल सिंह ने तत्काल उठा भी लिया। अपनी बेटी को मंडी सदर से कांग्रेस का उम्मीदवार बनाकर एक तरह से सालों तक उसके लिए सीट रिजर्व करवा ली तो लगे हाथ जिले में अपने तीन चहेतों नाचन से लाल सिंह कौशल, सरकाघाट से पवन ठाकुर व जोगिंद्रनगर से जीवन ठाकुर को भी टिकट दिलवा दिया।

सुखराम परिवार की राजनीति को ग्रहण लग सकता है

अब यदि सुखराम परिवार फिर से कांग्रेस में लौटता भी है तो सुख राम के पोते व अनिल के बेटे आश्रय शर्मा को मंडी सदर से चंपा के रहते हुए कांग्रेस का टिकट दिलवाना नाको चने चबाने जैसा होगा । देर-सवेर अनिल शर्मा राजनीति को बाय-बाय करके अपने बेटे आश्रय को विरासत देंगे ऐसा साफ लग रहा है।

अब एक तरफ कौल सिंह द्रंग से और उनकी बेटी मंडी सदर से कांग्रेस के हो गए, तो दूसरी तरफ भाजपा पर सुख राम व उनके बेटे अनिल शर्मा और पोते आश्रय ने कुंडली मार दी है। अब यदि अनिल शर्मा की पीठ कहीं इस चुनाव में लग जाती है तो सुखराम परिवार की राजनीति को ग्रहण लग सकता है, क्योंकि भाजपा इसे अपने लिए अशुभ मान कर शायद ही अगली बार अपनाने की सोचे।

राजनीति में संन्यास की बातें हमेशा हवाई ही रहती हैं

ऐसे में आश्रय के लिए दरवाजे अपने आप ही बंद हो गए। दूसरी ओर यदि कौल सिंह ठाकुर जो यह कह चुके हैं कि उनका आखिरी चुनाव है और वह इसे हार गए तो यह उनकी दुखदायी राजनीतिक विदाई मानी जाएगी साथ में शायद ही कांग्रेस उनके परिवार से निकट भविष्य में द्रंग से किसी को उतारे। यह बात अलग है कि राजनीति में संन्यास की बातें हमेशा हवाई ही रहती हैं। यही नहीं जैसा कि माना जा रहा है बागी पूर्ण चंद का प्रदर्शन काफी चौंकाने वाला रह सकता है तो ऐसे में आने वाले समय में द्रंग से कांग्रेस की ओर से उनका दावा मजबूत हो सकता है।

पूर्ण चंद की वकालत वीरभद्र सिंह भी करेंगे क्योंकि कौल को दूर करने के लिए वह पूर्ण चंद को अपने साथ जोड़े हुए थे। ऐसे में कौल की हार जीत के बड़े मायने होंगे। दूसरी ओर चंपा ठाकुर जो विधानसभा का पहला चुनाव लड़ रही है अभी जवान है और उसकी हार में भी उसकी जीत मानी जाएगी। जिस तरह के कयास लगाए जा रहे हैं वह बेहतरीन प्रदर्शन करने जा रही है और यह उसकी राजनीति में मजबूत स्थापना होगी जिसे निकट भविष्य में नजरअंदाज करना आसान नहीं होगा।

प्रकाश चौधरी ने ली फीडबैक

रिवालसर। आबकारी एवं कराधान मंत्री एवं बल्ह विस क्षेत्र से कांग्रेस पार्टी के उम्मीदवार प्रकाश चौधरी के निवास स्थान डडौर में रविवार को कांग्रेस पार्टी के कार्यकर्ताओं व पदाधिकारियों की एक विशेष बैठक हुई। बैठक में बल्ह घाटी के कोने- कोने से सेंकडों कार्यकर्ताओं ने भाग लिया। कार्यकर्ताओं ने अपन-अपने पोलिंग बूथों में हुये मतदान से संबंधित रिपोर्ट और फीडबैक आबकारी मंत्री के समक्ष रखी।

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