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pollution control board

हाईकोर्ट ने कहा, झूठा शपथ पत्र देने वालों से निपटें

बोर्ड स्वायत्त संस्था, पर्यावरण के लिए करे काम

हिमाचल दस्तक ब्यूरो। शिमला
हाईकोर्ट में बद्दी में स्थापित उद्योगों द्वारा प्रदूषण फैलाने की शिकायत को लेकर चल रहे मामले में प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की चेयरपर्सन मनीषा नंदा द्वारा गुमराह करने वाला शपथपत्र दायर करने पर उन्हें कड़ी फटकार लगाई। कोर्ट ने पाया कि यह शपथपत्र हाईकोर्ट के निर्देशानुसार दायर नहीं किया गया। कोर्ट ने अपने आदेशों में कहा कि जब तक यह शपथपत्र दायर नहीं किया गया था, तब तक प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड कोर्ट को गुमराह करने में लगा रहा और यह दर्शाने का भरसक प्रयत्न करता रहा कि जमीनी स्तर पर सब कुछ बहुत बढिय़ा चल रहा है।

कोर्ट ने ऐसे झूठे शपथपत्र दायर करने वालों से उचित समय पर निपटने के आदेश भी पारित किए। कोर्ट ने खेद प्रकट किया कि अतिरिक्त मुख्य सचिव के शपथपत्र में यह कहीं नहीं बताया गया कि बोर्ड के दोषी कर्मियों के खिलाफ क्या कार्रवाई की? शपथ पत्र में यह भी नहीं बताया गया है कि बद्दी तहसील के तहत गांव बटेड़ में मैसर्ज हरिपुर क्राफ्ट कंपनी गांव गुरुमाजरा में मैसर्ज नॉक्सपर फार्मा प्राइवेट लिमिटेड व बद्दी में मैसर्ज सिलान ग्रीन प्राइवेट लिमिटेड कम्पनी के पास पर्यावरणीय मंजूरी न होने के बावजूद किसने इन उद्योगों को काम करने की इजाजत दी?

कोर्ट ने बोर्ड को याद दिलाया कि वह एक स्वायत्त संस्था है और……

कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश संजय करोल व न्यायाधीश अजय मोहन गोयल की खंडपीठ ने कहा कि शपथपत्र में यह भी नहीं बताया गया है कि समय समय पर कितनी बार प्रदेश में लगे उद्योगों का निरीक्षण किया जाना जरूरी है और बोर्ड के संबंधित कर्मियों ने उन नियमों का कितना पालन किया? कोर्ट ने बोर्ड को याद दिलाया कि वह एक स्वायत्त संस्था है और उसे बिना किसी दबाव के पर्यावर्णीय कानूनों की अनुपालना सुनिश्चित करवानी चाहिए।

उनका मकसद उद्योगों को बंद करवाना नहीं, बल्कि यह सुनिश्चित करना है कि दोषी उद्योग अथवा अधिकारी व कर्मचारी बिना सजा के न छूट जाएं। कोर्ट ने इन टिप्पणियों के दृष्टिगत अतिरिक्त मुख्य सचिव को आदेश दिए कि वह पुन: अपना स्पष्टीकरण शपथपत्र के माध्यम से कोर्ट के समक्ष रखे। कोर्ट ने दोषी कर्मियों पर कार्रवाई के आदेश भी दिए। कोर्ट ने शपथ पत्र एक सप्ताह के भीतर दायर करने के आदेश दिए।

धर्मपुर में ठोस कचरा फेंकने पर बोर्ड को लताड़

  • हाईकोर्ट ने कहा, लग रहा नींद में है प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड
  • अब 26 को होगी मामले की सुनवाई

शिमला। उच्च न्यायालय ने सोलन के धर्मपुर क्षेत्र में अवैज्ञानिक तरीके से सॉलिड वेस्ट फेंकने के मामले में प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड को लताड़ लगाई है। कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश संजय करोल व न्यायाधीश अजय मोहन गोयल की खंडपीठ ने कहा कि पर्यावरण से जुड़े मामले में क्यों ऐसा होता है कि हाईकोर्ट द्वारा संज्ञान लेने प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड नींद से जागता है।

खुद अपने आप किसी भी तरह का कदम उठाने के लिए तैयार नहीं रहता। प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के अध्यक्ष को आदेश दिए हैं कि उन्होंने सॉलिड वेस्ट को एकत्रित करने वैज्ञानिक तरीके से डंपिंग करने के लिए क्या कारगर कदम उठाए हैं। मामले पर सुनवाई 26 मार्च को होगी।

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