Environment

चिनार के पेड़ Environment को सुरक्षित रखने में सहायक

हिमाचल दस्तक, केलांग।। शीत रेगिस्तान कहा जाने वाला लाहौल स्पीति छह माह बर्फ की कैद में रहता है। इस घाटी में Environment का अच्छा खासा उदाहरण देखने को मिलता है। इसी कड़ी में लाहौल स्पीति के स्थानीय लोगों द्वारा लगाए गए चिनार के पेड़ Environment को सुरक्षित रखने में सहायक सिद्ध तो हो ही रहे हैं साथ ही मिट्टी और जल संरक्षण में यह पेड़ पूरी मदद करता है।

  • पेड़ अज्ञात बीमारियों के कारण धीरे-धीरे सूखने लगे
  • हर साल लाहौल स्पीति के में टनों के हिसाब से लकड़ी की आपूर्ति

सर्दियों के मौसम में पूरी घाटी जब गहरी बर्फ की आड़ में होती है तो उस समय स्थानीय निवासी आंशिक रूप से पशुओं के लिए इसका चारा इसी पेड़ से प्राप्त करते हैं। लेकिन दुर्भाग्य की बात है कि यह मूल्यवान पेड़ अज्ञात बीमारियों के कारण धीरे-धीरे सूखने लगे हैं। डॉ वाईएस परमार विश्वविद्यालय सोलन के वैज्ञानिकों ने इनकी सूखने की बिमारियों का पता लगाने और प्रभावी नियंत्रण के उपाय सुझाने के लिए विफल रहे हैं।  ग्रामीण अभी भी सरकार से उम्मीद लगाए बैठे हैं कि उनकी मदद के लिए सरकार आग आएगी और विलुप्त हो जाने व सूखने का सामना कर रहे शेष पेड़ों को बचाया जाएगा।

जबकि हर साल लाहौल स्पीति के लिए सरकार इंंधन के लिए हजारों टनों के हिसाब से लकड़ी की आपूर्ति की मांग करती है। लकड़ी के परिहवन के लिए इसे हर साल खर्च किया जाता है। यदि इन पेड़ों को समय रहते बचाया गया तो स्थानीय लाहौल वासियों को इंधन के लिए दूसरे जिलों पर निर्भर नहीं होना पड़ेगा व इंधन की लकड़ी के लिए परिवहन किया जाने बाले बजट को भी बचाया जा सकता है।

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