Post mortem of the budget started in the house

कांग्रेस ने बजट को पूरी तरह से नकारते हुए अपने-अपने दिए तर्क ,  विपक्षी सदस्यों ने की बजट की आलोचना तो सत्तापक्ष ने की सराहना

रविंद्र पंवर। शिमला : मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर के विधानसभा में प्रस्तुत बजट 2019-20 का सदन में अब पोस्टमार्टम होने लगा है। बैठी कांग्रेस ने इस बजट को पूरी तरह से नकारते हुए सोमवार को अपने-अपने तर्क पेश किए। दूसरी तरफ सत्तापक्ष के सदस्यों ने मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर की बजट के रूप में सोच की सराहना की।

साथ ही केंद्र की विभिन्न योजनाओं को लेकर भी आभार जताया गया। मुख्यमंत्री ने शनिवार को प्रदेश सरकार की आगामी वित्त वर्ष लिए भावी योजनाओं का खाका पेश किया था। इस बजट पर सोमवार से चर्चा शुरू हुई, जिसमें पक्ष-विपक्ष के सदस्यों ने अपनी-अपनी बात रखी। यह अलग बात है कि धनीराम शांडिल ने बजट के विरोध के बीच कई जगह सरकार के प्रयासों को सराहा भी। इसके अलावा सत्तापक्ष के सदस्य प्रकाश राणा ने सदन में हो रही बहसबाजी को आईना दिखाते हुए मिलकर कार्य करने पर बल दिया।

बजट को सबसे पहले नेता प्रतिपक्ष मुकेश अग्निहोत्री ने यूं कहकर नकारा कि मुख्यमंत्री कर रहित बजट पेश करके प्रदेश को कर्ज रुपी अंधेरी गली का रास्ता दिखा गए। इसके बाद हर विपक्ष के सदस्य ने मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर के बजट के एक-एक पहलू को उधेडऩा शुरू किया और इसे आम जनता के साथ छलावा करार दिया। दूसरी तरफ सत्तापक्ष के विधायकों ने अपनी सरकार के गुणगान करने सहित केंद्र सरकार के सहयोग पर आभार प्रकट किया।

क्या बोले सत्तापक्ष के विधायक

बजट पर चर्चा के दौरान सत्ता पक्ष की ओर से पांवटा के विधायक सुखराम चौधरी का कहना था कि मुख्यमंत्री ने हर वर्ग को ध्यान में रखकर बजट पेश किया है। उन्होंने इसे गरीबों का बजट करार दिया। विधायक विनोद कुमार बोले कि विपक्ष रमेश धवाला को योजना बोर्ड उपाध्यक्ष बनाए जाने पर सवाल उठा रहा है, जबकि पूर्व सरकार ने पांच साल तक इस पद गंगूराम मुसाफिर को बैठाए रखा। अभी तक उन्होंने वह कोठी भी खाली नहीं की। पूर्व सरकार ने किसानों को दी जाने वाली बिजली की दरों में बढ़ोतरी की थी, जबकि वर्तमान सरकार ने इसे घटाकर फिर से 75 पैसे प्रति यूनिट किया है।

सरकार ने पीटीए अध्यापकों को नियमित अध्यापकों के समान वेतन देकर सबसे अधिक राहत प्रदान की है। दून के विधिायक परमजीत सिंह ने कहा कि कांग्रेस ने देश में 55 साल तक राज किया, लेकिन किसानों को लेकर कुछ नहीं किया। इसके विपरीत मोदी सरकार ने छोटे किसानों को सालाना छह हजार देने की बात कही है। आनी के विधायक किशोरी लाल ने मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर के बजट को आम आदमी, किसान, युवा व कर्मचारी हित में बताया।

विपक्ष ने की बजट की आलोचना

बजट परिचर्चा पर रामलाल ठाकुर ने खेल नीति पर सरकार को घेरा। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री कुछ, जबकि उनके मंत्री कुछ और ही कहते हैं। हमारे खिलाड़ी राष्ट्रीय व अंतरराष्ट्रीय स्तर से मेडल तो ला रहे हैं, लेकिन सरकार कोच तक नियुक्त नहीं कर पा रही। युवा नीति पर बात करना सरकार को शोभा नहीं देता। लोकसभा चुनाव को देखते हुए जल्दबाजी में बजट पेश किया गया, यह केंद्र के बजट का कॉपी पेस्ट है। सरकार एक बूटा बेटी नाम योजना का राग अलाप रही है, लेकिन देखते नहीं कि बरसात में लगने वाले पौधे सर्दी में बांटे जा रहे हैं।

विधायक धनीराम शांडिल ने कहा कि सरकार को घोषणा ऐसी करनी चाहिए जो पूरी हो सके। मुख्यमंत्री ने बजट तो अच्छा पेश किया, लेकिन उन्हें धरातल पर उतारना सरकार के लिए मुश्किल होगा। विधायक अनिरुद्ध सिंह ने कहा कि सरकार का जनमंच पूरी तरह फेल रहा। सरकार जनमंच में जनता का पैसा बर्बाद कर रही है। सरकार पर आउटसोर्स कर्मचारियों के साथ धोखा करने का आरोप लगाया। नशा गंभीर समस्या बन चुका है। इसी तरह फसल बीमा योजना को लेकर भी किसानों को कोई दस्तावेज नहीं दिए जा रहे हैं।

आशा ने उठाया प्वाइंट ऑफ ऑर्डर

सदन में जिस समय धनीराम शांडिल बजट पर चर्चा में भाग लेने उठे तो वहां मुख्यमंत्री व कोई भी मंत्री मौजूद नहीं थे। ऐसे में आशा कुमारी ने इसका विरोध जताया कि वरिष्ठ मंत्रियों के बिना हाउस नहीं चला सकते। इस पर विपक्षी सदस्य बोलने लगे तो उन्होंने चुप करवा दिया कि आपको नियम नहीं पता। इतने में ही शिक्षा मंत्री सुरेश भारद्वाज आ पहुंचे तो आशा ने कहा कि भारद्वाज जी आप तो रूल के माहिर हैं, इस पर भी ध्यान दें। इसके बाद विधानसभा उपाध्यक्ष हंसराज ने विपक्ष को चुप रहने के लिए कहकर आशा कुमारी को आश्वस्त किया कि मैं सुनिश्चित करुंगा। तब जाकर सदन की कार्यवाही आगे बढ़ी।

हमें मिलकर चलना होगा : प्रकाश

सत्ता पक्ष की ओर से विधायक प्रकाश राणा ने चर्चा में भाग लेते हुए इसका समर्थन किया। उन्होंने कहा कि उनका क्षेत्र पहले विकास से अछूता था, लेकिन मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर वहां कई घोषणाएं की। पहली बार विधानसभा पहुंचे प्रकाश राणा सदन में पक्ष व विपक्ष की बहसबाजी से आहत दिखे, जिस पर उन्होंने कहा कि हमें मिलकर चलना होगा ताकि प्रदेश का विकास हो सके। हम आज भी पुराने ढर्रे पर चल रहे हैं। यह विधानसभा प्रदेश का सबसे बड़ा मंदिर है, जिससे सभी की आस्थाएं जुड़ी हैं।

यहां हमारी लड़ाई ही खत्म नहीं हो रही, विकास कहां से होगा। हम सब को नाकारात्मकता त्यागकर अपनी सोच बदलनी होगी। सभी लोग हर बात के लिए मुख्यमंत्री को निशाना बनाते हैं, कोई भी सीएम गलत नहीं करना चाहता, सब को मिलकर सहयोग करना होगा। उनका कहना था कि हम सब एक हैं और यदि अपने पार्टनर को ही दोष देते रहेंगे तो घर कैसे चलेगा।

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